4 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर काम कर रही सरकार — गडकरी का बड़ा ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर काम कर रही सरकार — गडकरी का बड़ा ऐलान

सारांश

भारत के कच्चे तेल के आयात बिल पर लगाम लगाने की कोशिश में सरकार ने एक नया दांव खेला है — डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाना। गडकरी के अनुसार एथेनॉल से तैयार यह ईंधन कृषि और निर्माण उपकरणों पर परीक्षण में खरा उतर चुका है और यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का अगला बड़ा कदम हो सकता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा — सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की अनुमति देने पर काम कर रही है।
एथेनॉल को सीधे डीजल में न मिला पाने के कारण सरकार एथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल तैयार करने की प्रक्रिया पर केंद्रित है।
कृषि उपकरणों और निर्माण मशीनों पर आइसोब्यूटेनॉल का परीक्षण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
100% एथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाले दो जनरेटर सेट पहले ही लॉन्च किए जा चुके हैं।
यह कदम एथेनॉल, SAF, बायो-सीएनजी, हाइड्रोजन सहित स्वच्छ ईंधन बढ़ावा देने की व्यापक सरकारी रणनीति का हिस्सा है।
मंत्री ने वाहन निर्माताओं से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और यूरो-VI वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल अनुकूल बनाने में तेजी लाने की अपील की।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की अनुमति देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। उनके अनुसार यह कदम भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा है।

क्या है आइसोब्यूटेनॉल और क्यों है यह अहम

गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता, इसलिए सरकार एथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल तैयार करने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा, 'आइसोब्यूटेनॉल डीजल का एक प्रभावी विकल्प बन सकता है। हम डीजल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर भी काम कर रहे हैं।' यह बयान उन्होंने 4 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार के लॉन्च कार्यक्रम में दिया, जिसमें केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी उपस्थित थे।

परीक्षण और व्यावहारिक उपयोग

गडकरी ने बताया कि आइसोब्यूटेनॉल का परीक्षण निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और कृषि उपकरणों पर पहले ही शुरू किया जा चुका है। सफल परीक्षणों से यह प्रमाणित हुआ है कि यह ईंधन व्यावहारिक रूप से उपयोग के योग्य है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ऐसे दो जनरेटर सेट लॉन्च किए हैं जो 100 प्रतिशत एथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल पर संचालित होते हैं, जो यह दर्शाता है कि इन ईंधनों पर पूरी तरह चलने वाले इंजन विकसित किए जा सकते हैं।

सरकार की व्यापक ऊर्जा रणनीति

आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग का यह प्रस्ताव सरकार की उस बड़ी नीति का अंग है, जिसके तहत एथेनॉल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), बायो-सीएनजी, मेथेनॉल, बायोडीजल, एलएनजी, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे स्वच्छ ईंधनों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। गडकरी ने रेखांकित किया कि वैकल्पिक ईंधनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद भारत अब भी बड़ी मात्रा में जीवाश्म ईंधनों का आयात करता है, इसलिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना समय की आवश्यकता है।

वाहन निर्माताओं से अपील

केंद्रीय मंत्री ने वाहन निर्माताओं से भी आग्रह किया कि वे फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के विकास में तेजी लाएं और अधिकृत सर्विस सेंटरों के माध्यम से मौजूदा यूरो-VI वाहनों को भी फ्लेक्स-फ्यूल के अनुकूल बनाने की दिशा में काम करें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने के लिए हर संभव विकल्प तलाश रहा है।

आगे की राह

आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग नीति को अंतिम रूप देने और व्यापक स्तर पर लागू करने की समयसीमा अभी सरकार की ओर से स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन कृषि और निर्माण उपकरणों पर सफल परीक्षण इस दिशा में एक ठोस शुरुआत के संकेत देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग को पेट्रोलियम मंत्रालय की नियामकीय मंजूरी मिले और बड़े पैमाने पर उत्पादन व वितरण का ढाँचा तैयार हो। एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने पेट्रोल में सफलता दिखाई है, लेकिन डीजल के लिए वैकल्पिक मार्ग — आइसोब्यूटेनॉल — अभी तक व्यावसायिक पैमाने पर अप्रमाणित है। भारत हर साल लाखों करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात करता है; इस निर्भरता को घटाने के लिए घोषणाएँ पर्याप्त नहीं, बल्कि उत्पादन क्षमता, आपूर्ति श्रृंखला और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता का ठोस रोडमैप ज़रूरी है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आइसोब्यूटेनॉल क्या है और इसे डीजल में क्यों मिलाया जाएगा?
आइसोब्यूटेनॉल एथेनॉल से तैयार किया जाने वाला एक वैकल्पिक ईंधन है जिसे डीजल में मिलाया जा सकता है, जबकि एथेनॉल को सीधे डीजल में नहीं मिलाया जा सकता। सरकार इसे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में देख रही है।
डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना कब लागू होगी?
अभी तक सरकार ने इस नीति को लागू करने की कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की है। गडकरी के अनुसार इस पर काम जारी है और कृषि व निर्माण उपकरणों पर परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।
क्या आइसोब्यूटेनॉल का परीक्षण हो चुका है?
हाँ, गडकरी ने बताया कि आइसोब्यूटेनॉल का परीक्षण निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और कृषि उपकरणों पर किया जा चुका है और परिणाम सकारात्मक रहे हैं। इसके अलावा 100% एथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाले दो जनरेटर सेट भी लॉन्च किए जा चुके हैं।
यह योजना भारत की ऊर्जा नीति से कैसे जुड़ी है?
आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें एथेनॉल, SAF, बायो-सीएनजी, मेथेनॉल, बायोडीजल, एलएनजी, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों का आयात कम करना और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
वाहन निर्माताओं से सरकार ने क्या अपेक्षा जताई है?
गडकरी ने वाहन निर्माताओं से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के विकास में तेजी लाने और अधिकृत सर्विस सेंटरों के ज़रिए मौजूदा यूरो-VI वाहनों को भी फ्लेक्स-फ्यूल के अनुकूल बनाने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले