100% एथेनॉल ईंधन को गडकरी की हरी झंडी, फॉसिल फ्यूल आयात घटाने की बड़ी पहल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 14 जून 2025 को नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि उन्होंने 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन के उपयोग को कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह कदम भारत की आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेज़ी से बढ़ने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।
मंजूरी का विवरण
गडकरी ने बताया कि शनिवार रात 8 बजे उन्होंने फाइल पर हस्ताक्षर कर 100 प्रतिशत एथेनॉल उपयोग को कानूनी रूप से वैध बनाने वाले नियमों को अंतिम रूप दे दिया। यह घोषणा एनडीए सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में इस विचार का उपहास उड़ाया गया था — उनके शब्दों में, 'मैं जब यह सपना बताता था तो लोग हँसते थे। कुछ दोस्त इसकी आलोचना भी करते थे।'
ऑटोमोबाइल कंपनियों की तैयारी
Toyota, Suzuki, MG और Hyundai जैसी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियाँ अगले डेढ़ महीने में 100 प्रतिशत एथेनॉल-उपयुक्त वाहन बाज़ार में उतारने की तैयारी में हैं। गडकरी के अनुसार, उद्योग जगत, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन और अन्य संगठनों के साथ इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श जारी है।
एथेनॉल मिश्रण में भारत की प्रगति
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि भारत ने एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लिया है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 2014 में मात्र 1.5 प्रतिशत था, जो नवंबर 2022 तक 10 प्रतिशत हो गया। इससे भी उल्लेखनीय यह है कि 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य, जो 2030 तक पूरा करना था, 2024 में ही हासिल कर लिया गया।
ई85 ईंधन की शुरुआत
पिछले सप्ताह सरकार ने ई85 ईंधन भी लॉन्च किया, जो विशेष रूप से ई85-संगत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उपलब्ध है। यह पहल 100 प्रतिशत एथेनॉल मंजूरी से पहले की कड़ी के रूप में देखी जा रही है और भारत के ईंधन विविधीकरण रोडमैप को और पुख्ता करती है।
आगे की राह
एथेनॉल पेट्रोल का एक व्यावहारिक विकल्प बन सकता है, जिससे भारत का भारी ईंधन आयात बिल उल्लेखनीय रूप से घट सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत के चालू खाते के घाटे पर दबाव बनाए हुए है। गौरतलब है कि 100 प्रतिशत एथेनॉल वाहनों की व्यापक उपलब्धता और ईंधन वितरण नेटवर्क के विस्तार पर अमल ही इस नीति की असली कसौटी होगी।