एथेनॉल स्टोव से एलपीजी से सस्ता खाना पकाना संभव: गडकरी ने नागपुर में किया अनावरण, ₹40 करोड़ की विज्ञान पहल भी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 25 मई 2025 को नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान एथेनॉल आधारित स्वदेशी कुकिंग स्टोव तकनीक का अनावरण किया और दावा किया कि इस स्टोव पर खाना पकाना कमर्शियल एलपीजी की तुलना में सस्ता पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने युवा भारतीयों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए ₹40 करोड़ की एक अलग पहल की भी घोषणा की।
तकनीक कैसे काम करती है
गडकरी ने बताया कि इस स्वदेशी स्टोव में एथेनॉल और पानी के मिश्रण से खाना पकाने योग्य लौ उत्पन्न की जाती है। उन्होंने कहा, "पानी में 7 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर स्टोव से लौ उत्पन्न की जा सकती है, और यह खाना पकाने वाली गैस से सस्ती है। यह हमारे देश में ही विकसित की गई है।" यह तकनीक पूरी तरह भारत में विकसित बताई जा रही है, जो इसे 'मेक इन इंडिया' की भावना के अनुरूप बनाती है।
एथेनॉल नीति से जुड़ाव
यह घोषणा गडकरी के जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में एथेनॉल को बढ़ावा देने के दीर्घकालिक रुख के अनुरूप है। गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 87 प्रतिशत आयात करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख नीतिगत प्राथमिकता बनी हुई है। सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को आक्रामक रूप से बढ़ाया है — यह अनुपात 2014 में 1.53 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 20 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
घरेलू रसोई तक विस्तार
प्रस्तावित एथेनॉल स्टोव तकनीक इस ऊर्जा नीति को घरेलू खाना पकाने के क्षेत्र तक ले जाने का प्रयास है, जहाँ लाखों परिवार अभी भी एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर हैं। यदि इसे बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक लागू और व्यवसायीकृत किया जाता है, तो यह पारंपरिक खाना पकाने वाली गैस का एक किफायती और स्थानीय रूप से विकसित विकल्प बन सकता है।
₹40 करोड़ की विज्ञान पहल
गडकरी ने इस अवसर पर एक और घोषणा करते हुए कहा, "जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी विकसित हो रही है, हम युवाओं और बच्चों में विज्ञान के प्रति प्रेम जगाने के लिए ₹40 करोड़ की एक परियोजना पर भी काम कर रहे हैं।" यह पहल भारत के तकनीकी और वैज्ञानिक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक कदम के रूप में देखी जा रही है।
आगे की राह
एथेनॉल स्टोव तकनीक का व्यावसायिक विस्तार अभी प्रारंभिक चरण में है। इसकी सफलता बड़े पैमाने पर उत्पादन, वितरण नेटवर्क और एथेनॉल की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार घरेलू ऊर्जा लागत को कम करने और स्वच्छ ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।