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कोयला गैसीकरण रोड शो 2026: ₹37,500 करोड़ की योजना से 50,000 रोजगार और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

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कोयला गैसीकरण रोड शो 2026: ₹37,500 करोड़ की योजना से 50,000 रोजगार और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

सारांश

₹37,500 करोड़ की केंद्रीय योजना के तहत कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में रोड शो आयोजित किया। 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण और 50,000 रोजगार का लक्ष्य — यह पहल एलएनजी, यूरिया और मेथनॉल के आयात पर भारत की निर्भरता घटाने की दिशा में एक रणनीतिक दांव है।

मुख्य बातें

कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण पर रोड शो आयोजित किया।
योजना का वित्तीय परिव्यय ₹37,500 करोड़ ; अनुमानित निवेश ₹2.5–3 लाख करोड़ ।
लक्ष्य: 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण और 50,000 प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार।
प्रतिवर्ष 75 मीट्रिक टन कोयले के उपयोग से लगभग ₹6,300 करोड़ राजस्व अपेक्षित।
एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य।
किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कोयला मंत्रालय ने 29 मई 2026 को नई दिल्ली में सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं पर एक उच्चस्तरीय रोड शो आयोजित किया, जो ₹37,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली केंद्र सरकार की प्रोत्साहन योजना का हिस्सा है। इस पहल का उद्देश्य भारत के विशाल कोयला और लिग्नाइट भंडारों का स्वच्छ एवं मूल्यवर्धित उपयोग सुनिश्चित करना और 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करना है।

योजना में क्या शामिल है

मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत देश के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 25 परियोजनाएँ स्थापित की जाएंगी। इनमें 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश अपेक्षित है, जिससे 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। इसके साथ ही 75 मीट्रिक टन कोयले और लिग्नाइट के वार्षिक उपयोग से लगभग ₹6,300 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है, जिसमें जीएसटी और अन्य करों से मिलने वाला अतिरिक्त राजस्व शामिल नहीं है।

ऊर्जा सुरक्षा पर असर

कोयला मंत्रालय का कहना है कि इस योजना से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को उल्लेखनीय बल मिलेगा। विशेष रूप से एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसी प्रमुख वस्तुओं के आयात पर निर्भरता में कमी आने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता रहा है।

रोड शो में प्रमुख भागीदार

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त तथा अपर सचिव सनोज कुमार झा सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और वित्तीय संस्थानों ने कोयला गैसीकरण के उभरते अवसरों और भावी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया।

क्या होगा आगे

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह रोड शो देश में एक सशक्त कोयला गैसीकरण इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में उसके निरंतर प्रयासों की कड़ी है। गौरतलब है कि कोयला गैसीकरण को भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति में एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है, जो जीवाश्म ईंधन के पारंपरिक दहन से आगे बढ़कर स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की ओर एक व्यावहारिक कदम माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ की यह योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — भारत में बड़े ऊर्जा-क्षेत्र के वादे अक्सर निवेश आकर्षित करने के चरण में ही अटक जाते हैं। कोयला गैसीकरण तकनीकी रूप से जटिल और पूंजी-गहन है, और वैश्विक स्तर पर इसके व्यावसायिक पैमाने पर सफल होने के उदाहरण सीमित हैं। यह भी विचारणीय है कि जब दुनिया नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रही है, तब कोयला-आधारित गैसीकरण में इतना बड़ा निवेश भारत की दीर्घकालिक जलवायु प्रतिबद्धताओं के साथ कितना सामंजस्य रखता है — यह सवाल नीतिगत बहस में केंद्रीय रहेगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सतही कोयला गैसीकरण योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की ₹37,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के कोयला और लिग्नाइट भंडारों को स्वच्छ गैस में परिवर्तित करना है। इससे एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य है।
कोयला गैसीकरण से कितने रोजगार मिलेंगे?
कोयला मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत लगभग 25 परियोजनाओं में 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। ये रोजगार मुख्यतः देश के कोयला उत्पादक क्षेत्रों में होंगे।
2030 तक कोयला गैसीकरण का राष्ट्रीय लक्ष्य क्या है?
भारत सरकार ने 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। यह रोड शो उसी लक्ष्य की दिशा में निवेशकों और उद्योग जगत को एकजुट करने का प्रयास है।
इस योजना से राजस्व कितना मिलेगा?
मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, 75 मीट्रिक टन कोयले और लिग्नाइट के वार्षिक उपयोग से प्रतिवर्ष लगभग ₹6,300 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त जीएसटी और अन्य करों से भी राजस्व मिलेगा।
रोड शो में कौन-कौन से हितधारक शामिल हुए?
कार्यक्रम में नीति निर्माता, राज्य सरकारों के अधिकारी, उद्योगपति, निवेशक, प्रौद्योगिकी प्रदाता और वित्तीय संस्थान शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
राष्ट्र प्रेस
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