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भारत में ₹65,000 करोड़ की कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ सक्रिय, 2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण का लक्ष्य

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भारत में ₹65,000 करोड़ की कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ सक्रिय, 2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण का लक्ष्य

सारांश

₹65,000 करोड़ की कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ अब ज़मीन पर उतर चुकी हैं — नीति से क्रियान्वयन तक का यह सफर तेज़ है। ₹37,500 करोड़ की दूसरी बड़ी योजना की तैयारी और 2030 तक 100 मिलियन टन के लक्ष्य के साथ, भारत कोयले को रसायन व ईंधन में बदलकर आयात निर्भरता तोड़ने की दिशा में बड़ा दांव खेल रहा है।

मुख्य बातें

भारत में ₹65,000 करोड़ से अधिक की कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ वर्तमान में सक्रिय हैं।
जनवरी 2024 में स्वीकृत ₹8,500 करोड़ की योजना के तहत 8 परियोजनाएँ क्रियान्वयन में; ₹6,233 करोड़ का प्रोत्साहन आवंटित।
सरकार ₹37,500 करोड़ की वृहत्तर प्रोत्साहन योजना के लिए RFP अंतिम रूप दे रही है।
महाराष्ट्र में 5 परियोजनाएँ सक्रिय; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निवेश-अनुकूल माहौल का वादा किया।
कुल 25 परियोजनाओं से ₹2.5–3 लाख करोड़ निवेश आकर्षित होने की उम्मीद।
राष्ट्रीय लक्ष्य: 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण।

केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत में ₹65,000 करोड़ से अधिक मूल्य की कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ वर्तमान में क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। यह संकेत है कि कोयले को रसायनों, ईंधन और औद्योगिक कच्चे माल में रूपांतरित करने की सरकारी पहल अब केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन पर तेज़ी से उतर रही है। 19 जून 2026 को आयोजित एक उद्योग कार्यक्रम में यह जानकारी सामने आई।

मुख्य घटनाक्रम

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि इस क्षेत्र को उद्योग जगत से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। उनके अनुसार, जनवरी 2024 में स्वीकृत ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आठ परियोजनाएँ पहले से ही क्रियान्वयन के चरण में हैं, जिन्हें ₹6,233 करोड़ का प्रोत्साहन समर्थन प्राप्त है।

ये परियोजनाएँ कोयले से सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG), एथेनॉल, हाइड्रोजन, एसीटिक एसिड, अमोनियम नाइट्रेट, DRI आधारित इस्पात और सतत विमानन ईंधन (SAF) जैसे उत्पाद तैयार करने से जुड़ी हैं — जो आयात प्रतिस्थापन की दृष्टि से रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।

बड़ी प्रोत्साहन योजना की तैयारी

सरकार ₹37,500 करोड़ की एक वृहत्तर प्रोत्साहन योजना के लिए निविदा आमंत्रण (RFP) को भी अंतिम रूप दे रही है। मसौदा दस्तावेज़ हितधारकों की राय के लिए पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका है। गौरतलब है कि यह दूसरी योजना पहली से चार गुना से भी अधिक बड़ी है, जो इस क्षेत्र में सरकार की बढ़ती महत्त्वाकांक्षा को दर्शाती है।

महाराष्ट्र बना प्रमुख केंद्र

केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कार्यक्रम में कहा कि महाराष्ट्र कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है, जहाँ पहले से ही पाँच परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य को वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के माध्यम से कोयले की उपलब्धता, सुदृढ़ औद्योगिक ढाँचे और नीतिगत सहयोग का लाभ मिल रहा है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य इस क्षेत्र के लिए निवेश-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मुंबई का कोयला गैसीकरण तकनीक से ऐतिहासिक संबंध रहा है।

निवेश और राष्ट्रीय लक्ष्य

सरकार को उम्मीद है कि कोयला गैसीकरण पहल के तहत लगभग 25 परियोजनाओं में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित होगा। राष्ट्रीय स्तर पर सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है।

यह पहल भारत की उस व्यापक रणनीति का अंग है जिसका उद्देश्य उर्वरक, रसायन और ईंधन के आयात पर निर्भरता घटाना, घरेलू औद्योगिक क्षमता को मज़बूत करना और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत आयात बिल कम करने के लिए घरेलू संसाधनों के दोहन पर ज़ोर दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की सक्रिय परियोजनाएँ और ₹37,500 करोड़ की आगामी योजना प्रभावशाली संख्याएँ हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये परियोजनाएँ समयसीमा में उत्पादन तक पहुँचती हैं। भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी घोषणाओं और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की खाई ऐतिहासिक रूप से चौड़ी रही है। कोयले से हाइड्रोजन और SAF जैसे उत्पाद बनाना तकनीकी रूप से जटिल और लागत-संवेदनशील है — वैश्विक बाज़ार में प्राकृतिक गैस की कीमतें गिरने पर इन परियोजनाओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता दबाव में आ सकती है। 2030 का 100 मिलियन टन लक्ष्य महत्त्वाकांक्षी है, और स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के बिना यह आँकड़ा केवल लक्ष्य-पत्र तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ क्या हैं और इनका उद्देश्य क्या है?
कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में कोयले को रसायनों, ईंधन और औद्योगिक कच्चे माल — जैसे सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, हाइड्रोजन, एथेनॉल और सतत विमानन ईंधन — में रूपांतरित किया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य उर्वरक, रसायन और ईंधन के आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत करना है।
₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना के तहत कितनी परियोजनाएँ चल रही हैं?
जनवरी 2024 में स्वीकृत ₹8,500 करोड़ की योजना के तहत आठ परियोजनाएँ क्रियान्वयन के चरण में हैं, जिन्हें ₹6,233 करोड़ का प्रोत्साहन समर्थन मिला है। ये परियोजनाएँ SNG, हाइड्रोजन, एथेनॉल, DRI इस्पात और SAF जैसे उत्पादों से जुड़ी हैं।
महाराष्ट्र कोयला गैसीकरण का प्रमुख केंद्र क्यों बन रहा है?
महाराष्ट्र में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के ज़रिए कोयले की उपलब्धता, सुदृढ़ औद्योगिक ढाँचा और राज्य सरकार का नीतिगत सहयोग मिल रहा है। वर्तमान में राज्य में पाँच परियोजनाएँ सक्रिय हैं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निवेश-अनुकूल वातावरण बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
सरकार का 2030 तक कोयला गैसीकरण का क्या लक्ष्य है?
सरकार ने 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही लगभग 25 परियोजनाओं के ज़रिए ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित करने की उम्मीद है।
₹37,500 करोड़ की नई प्रोत्साहन योजना कब तक लागू होगी?
सरकार इस योजना के लिए निविदा आमंत्रण (RFP) को अंतिम रूप दे रही है और मसौदा दस्तावेज़ हितधारकों की राय के लिए पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका है। क्रियान्वयन की सटीक समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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