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₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना को उद्योग का समर्थन, पहले चरण में 7 आवेदन; अदाणी, NTPC शामिल

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₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना को उद्योग का समर्थन, पहले चरण में 7 आवेदन; अदाणी, NTPC शामिल

सारांश

₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना के पहले चरण में अदाणी, NTPC और तालचेर फर्टिलाइजर्स सहित सात कंपनियों ने आवेदन किया है। यह योजना 2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण क्षमता और ₹3 लाख करोड़ निवेश के लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

कोयला मंत्रालय ने बताया कि ₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना के पहले चरण में 7 आवेदन प्राप्त हुए।
अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने यूरिया उत्पादन की 3 परियोजनाओं के लिए, NTPC ने SNG परियोजना के लिए आवेदन किया।
योजना का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता; इसमें से 75 मिलियन टन इसी योजना से।
वित्त वर्ष 2024-25 में LNG, यूरिया, अमोनिया व मेथनॉल का कुल आयात ₹2.77 लाख करोड़ रहा।
योजना से ₹3 लाख करोड़ तक निवेश आकर्षित होने और बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन की उम्मीद।
योजना का दूसरा चरण खुला; आवेदन अवधि हर दो महीने के अंतराल पर उपलब्ध होगी।

केंद्र सरकार की ₹37,500 करोड़ की कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना को उद्योग जगत से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। कोयला मंत्रालय ने 9 सितंबर 2026 को बताया कि योजना के पहले चरण में बड़े कॉर्पोरेट समूहों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से कुल सात आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते निवेश विश्वास का संकेत देते हैं। मंत्रालय के अनुसार, 7 जुलाई को निविदा जारी होने के बाद पहले दौर के आवेदन जमा किए गए थे।

किन कंपनियों ने किया आवेदन

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने यूरिया उत्पादन से जुड़ी तीन परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है, जो इस योजना में किसी एकल समूह की सबसे बड़ी भागीदारी है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NTPC लिमिटेड ने सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG) परियोजना के लिए प्रस्ताव दिया है।

गैलेंट इस्पात लिमिटेड ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) और सिंथेसिस गैस (सिंगैस) उत्पादन परियोजना के लिए आवेदन किया है। इसके अतिरिक्त, श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड ने सिंगैस उत्पादन और तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (TFL) ने यूरिया उत्पादन परियोजना के लिए प्रस्ताव जमा किया है।

मंत्रालय की प्रतिक्रिया

कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जब हमने कहा था कि योजना में किसी की रुचि नहीं होने की खबरें समय से पहले थीं, तब हमें विश्वास था कि उद्योग जगत सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा। पहले ही चरण में सात आवेदन प्राप्त होना, जिनमें देश के कुछ सबसे बड़े औद्योगिक समूह और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ शामिल हैं, इस योजना और भारत के कोयला गैसीकरण मिशन में विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है।'

मंत्रालय का कहना है कि यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि उद्योग जगत कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात निर्भरता घटाने और औद्योगिक विकास को गति देने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रहा है।

योजना की पृष्ठभूमि और व्यापक लक्ष्य

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2026 में इस योजना को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य घरेलू कोयले और लिग्नाइट को सिंगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित करना है। गौरतलब है कि यह योजना जनवरी 2024 में स्वीकृत ₹8,500 करोड़ की पूर्ववर्ती प्रोत्साहन योजना का विस्तारित रूप है, जिसके अंतर्गत अभी 8 कोयला गैसीकरण परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में क्रियान्वित हो रही हैं।

सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में LNG, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों का कुल आयात मूल्य लगभग ₹2.77 लाख करोड़ रहा। इस योजना से इन उत्पादों पर आयात निर्भरता कम करने की उम्मीद है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

सरकार का अनुमान है कि इस पहल से देश में ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित होगा और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। यह योजना भारत के 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने के राष्ट्रीय लक्ष्य का भी अहम हिस्सा है, जिसमें से 75 मिलियन टन क्षमता इसी योजना के ज़रिये विकसित किए जाने का लक्ष्य है।

क्या होगा आगे

कोयला मंत्रालय ने घोषणा की कि योजना का दूसरा चरण मंगलवार से खोल दिया गया है। प्रस्ताव अनुरोध (RFP) के अनुसार, आवेदन जमा करने की नई अवधि हर दो महीने के अंतराल पर खोली जाएगी, जिससे पात्र कंपनियों को परियोजनाओं के लिए आवेदन करने का निरंतर अवसर मिलता रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अपने कदम तेज़ कर रहा है और घरेलू संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर ज़ोर दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — जनवरी 2024 की ₹8,500 करोड़ की पूर्ववर्ती योजना के तहत चल रही 8 परियोजनाओं की प्रगति अभी तक सार्वजनिक रूप से विस्तार से साझा नहीं की गई है। ₹2.77 लाख करोड़ के आयात बिल को घटाने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, परंतु कोयला गैसीकरण तकनीक की उच्च लागत और पानी की खपत जैसी पर्यावरणीय चुनौतियाँ दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर सवाल खड़े करती हैं। ₹3 लाख करोड़ के अनुमानित निवेश का कोई स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है। जब तक परियोजनाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा, पर्यावरण मंज़ूरी की स्थिति और रोज़गार सृजन के मापने योग्य संकेतक सार्वजनिक नहीं होते, यह घोषणा अपने पूर्ववर्तियों की तरह आशावादी अनुमानों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना क्या है?
यह केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मई 2026 में स्वीकृत योजना है, जिसका उद्देश्य घरेलू कोयले और लिग्नाइट को सिंगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित करने को प्रोत्साहित करना है। यह जनवरी 2024 की ₹8,500 करोड़ की पूर्ववर्ती योजना का विस्तार है।
पहले चरण में किन कंपनियों ने आवेदन किया है?
कोयला मंत्रालय के अनुसार, अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (3 यूरिया परियोजनाएँ), NTPC लिमिटेड (SNG परियोजना), गैलेंट इस्पात लिमिटेड (DRI व सिंगैस), श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड (सिंगैस) और तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (यूरिया) ने आवेदन किए हैं — कुल सात आवेदन।
इस योजना से आयात निर्भरता कैसे कम होगी?
वित्त वर्ष 2024-25 में LNG, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल का कुल आयात लगभग ₹2.77 लाख करोड़ रहा। सरकार का मानना है कि घरेलू कोयले से इन उत्पादों का उत्पादन बढ़ने पर इन आयातों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
भारत का 2030 तक कोयला गैसीकरण लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करना है, जिसमें से 75 मिलियन टन क्षमता इसी ₹37,500 करोड़ की योजना के माध्यम से विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना का दूसरा चरण कब और कैसे खुलेगा?
कोयला मंत्रालय ने घोषणा की कि दूसरा चरण 9 सितंबर 2026 से खोल दिया गया है। प्रस्ताव अनुरोध (RFP) के अनुसार, आवेदन जमा करने की अवधि हर दो महीने के अंतराल पर खोली जाएगी, जिससे पात्र कंपनियाँ नियमित रूप से आवेदन कर सकेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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