कोयला गैसीकरण से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती: केंद्रीय मंत्री
सारांश
Key Takeaways
- कोयला गैसीकरण ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है।
- आयात पर निर्भरता कम करता है।
- सरकार ने नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन की शुरुआत की है।
- नवीनतम तकनीकों का उपयोग पर्यावरणीय प्रभावों को कम करता है।
- भारत के कोयला भंडार लगभग 400 अरब टन हैं।
नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि कोयला गैसीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता को कम करने और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में अपने संबोधन के दौरान, मंत्री ने कोयला गैसीकरण को एक क्रांतिकारी तकनीक के रूप में प्रस्तुत किया, जो कोयले को सिनगैस में परिवर्तित करती है। इस गैस का उपयोग बाद में अधिक स्वच्छ ईंधन, रसायन, खाद और हाइड्रोजन के उत्पादन में किया जा सकता है। यह प्रक्रिया घरेलू संसाधनों के अधिक प्रभावी और स्थायी उपयोग को संभव बनाती है, साथ ही आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा देती है।
मंत्री ने बताया कि इस तकनीक को प्रोत्साहित करने के लिए, सरकार ने 'नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन' का आरंभ किया है, जिसका उद्देश्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स को सहायता प्रदान करने के लिए 8,500 करोड़ रुपए का इंसेंटिव फ्रेमवर्क भी तैयार किया गया है। कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर पहले से ही काम चल रहा है, और 64,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश पाइपलाइन में है।
उन्होंने 'अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन' (यूसीजी) जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी चर्चा की, जो उन कोयला भंडारों तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं जहाँ पहले जाना संभव नहीं था। साथ ही, ये पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को भी कम करती हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत की तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था को ऊर्जा के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो विकास और स्थिरता दोनों को एक साथ लेकर चले। मंत्री ने भारत के विशाल कोयला भंडारों का उल्लेख किया, जिनका अनुमान लगभग 400 अरब टन है, जो दुनिया में सबसे बड़े भंडारों में से एक हैं। कोयला, ऊर्जा के कुल उपयोग में लगभग 55 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में लगभग 74 प्रतिशत का योगदान देता है।
वर्तमान में कोयले की वार्षिक मांग लगभग एक अरब टन है, और 2047 तक इसके काफी बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोयले का महत्व आगे भी बना रहेगा, भले ही भारत 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हो।
मंत्री ने आयात पर निर्भरता की ओर भी इशारा किया, जिसमें लगभग 83 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस, और 90 प्रतिशत से अधिक मेथनॉल और खाद शामिल हैं। इस कारण, ऊर्जा सुरक्षा एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है।
मंत्री ने उद्योग, शिक्षा क्षेत्र, स्टार्ट-अप और अनुसंधान संस्थानों को एक साझा वातावरण बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण कई विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित है, जिनमें बिजली, तेल और गैस, और खाद निर्माण शामिल हैं। उन्होंने सरकार की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि वह मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाएगी, सहायक नीतियाँ लागू करेगी, और प्रारंभिक चरण में ही लोगों को इसमें शामिल होने और निवेश करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नवाचार, स्वदेशी तकनीक के विकास और आपसी सहयोग से, भारत 'क्लीन कोल टेक्नोलॉजी' के क्षेत्र में एक अग्रणी देश बन सकता है, और साथ ही वह ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को भी आगे बढ़ा सकता है।