क्या ऊर्जा परिवर्तन तभी सफल होगा, जब लगातार और संतुलित निवेश किया जाए? : हरदीप सिंह पुरी

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क्या ऊर्जा परिवर्तन तभी सफल होगा, जब लगातार और संतुलित निवेश किया जाए? : हरदीप सिंह पुरी

सारांश

भारत के ऊर्जा परिवर्तन में निवेश की महत्ता पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि संतुलित निवेश के बिना परिवर्तन संभव नहीं है। 'इंडिया एनर्जी वीक 2026' में वैश्विक ऊर्जा मांग के बदलावों और भारत की भूमिका पर चर्चा की गई।

मुख्य बातें

ऊर्जा परिवर्तन के लिए संतुलित निवेश आवश्यक है।
भारत एक जिम्मेदार वैश्विक ऊर्जा केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इंडिया एनर्जी वीक में वैश्विक ऊर्जा मांग पर चर्चा की गई।
निवेश, नीतिगत तालमेल और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दे रही है।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 'इंडिया एनर्जी वीक 2026' की मंगलवार को औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें निवेश, साझेदारी और ऊर्जा बदलाव को जमीन पर उतारने की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि 'इंडिया एनर्जी वीक' तेजी से एक ऐसा वैश्विक मंच बन गया है, जो ऊर्जा से जुड़े संवाद को ठोस कार्रवाई में बदलने का कार्य कर रहा है। यह मंच नीति निर्माताओं, ऊर्जा उत्पादकों, उपभोक्ताओं, प्रौद्योगिकी कंपनियों और निवेशकों को एक साथ लाकर वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बड़े परिवर्तनों का समाधान तलाशने में मदद कर रहा है।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन तभी सफल होगा, जब इसमें लगातार और संतुलित निवेश किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा बदलाव का मतलब सिर्फ पुराने स्रोतों को हटाना नहीं, बल्कि नए और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को जोड़ना है। इसके लिए तेल, गैस, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन, एलएनजी और स्वच्छ ईंधन जैसे क्षेत्रों में निवेश जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और जलवायु न्याय की दिशा में हो रही प्रगति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने सुधार आधारित नीतियों के माध्यम से ऊर्जा की उपलब्धता, किफायती दरों और टिकाऊ व्यवस्था को मजबूत किया है।

मंत्री ने बताया कि भारत ने बड़े तलछटी बेसिनों को अन्वेषण के लिए खोला है। इसके साथ ही ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (डीएसएफ) के तहत लगातार बोली प्रक्रियाएं चलाई जा रही हैं। इन सुधारों का उद्देश्य वैश्विक निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित करना है।

पुरी ने कहा कि एलपीजी कवरेज का तेजी से विस्तार, स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा और विविध ऊर्जा मिश्रण भारत की समावेशी विकास नीति को दर्शाते हैं। इससे देश के हर वर्ग तक सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा पहुंच रही है।

इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उद्योग एवं उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री और एडीएनओसी के मैनेजिंग डायरेक्टर व ग्रुप सीईओ सुल्तान अहमद अल जाबेर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा मांग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जिसमें उभरते बाजार, डिजिटल तकनीक और अलग-अलग ऊर्जा प्रणालियों का एकीकरण अहम भूमिका निभा रहा है। भारत इन वैश्विक रुझानों के केंद्र में है और आने वाले दशकों में ऊर्जा मांग को दिशा देने वाला देश बनेगा।

अल जाबेर ने चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा प्रणाली के सामने सबसे बड़ा खतरा निवेश की कमी है। उन्होंने सभी प्रकार की ऊर्जा में संतुलित निवेश की आवश्यकता बताई, ताकि ऊर्जा सुरक्षा, किफायत और स्थिरता बनी रहे। उन्होंने भारत-यूएई ऊर्जा साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि एडीएनओसी भारत को कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी का भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता रहा है।

वहीं, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि इंडिया एनर्जी वीक अब विचारों को कार्रवाई में बदलने वाला वैश्विक मंच बन चुका है। उन्होंने बताया कि गोवा 2050 तक 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य लेकर चल रहा है। हरित अर्थव्यवस्था और ब्लू इकॉनमी के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

इससे यह स्पष्ट है कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक ऊर्जा केंद्र के रूप में उभर रहा है, जो व्यावहारिक, समावेशी और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधान प्रस्तुत कर रहा है। वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को तेज करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार और निवेश को सबसे अहम साधन बताया गया है।

'इंडिया एनर्जी वीक' देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है, जो सरकार, उद्योग जगत और नवाचार करने वालों को एक साथ लाकर सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती ऊर्जा भविष्य की दिशा में काम करता है। एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में यह निवेश, नीतिगत तालमेल और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को नई दिशा मिलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जलवायु न्याय की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में ऊर्जा परिवर्तन कितना महत्वपूर्ण है?
भारत में ऊर्जा परिवर्तन न केवल पर्यावरणीय लाभ देता है, बल्कि यह आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
क्या संतुलित निवेश से ऊर्जा परिवर्तन सफल होगा?
हाँ, संतुलित और लगातार निवेश के बिना ऊर्जा परिवर्तन संभव नहीं है। यह सभी ऊर्जा स्रोतों को समाहित करता है।
इंडिया एनर्जी वीक का उद्देश्य क्या है?
इंडिया एनर्जी वीक का उद्देश्य ऊर्जा क्षेत्र में संवाद को ठोस कार्रवाई में बदलना और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
भारत ने सुधार आधारित नीतियों के माध्यम से ऊर्जा की उपलब्धता और किफायती दरों को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की भूमिका क्या है?
भारत आने वाले दशकों में वैश्विक ऊर्जा मांग को दिशा देने वाला देश बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस