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क्या स्वच्छ ऊर्जा में भारत दे रहा है 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर?

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क्या स्वच्छ ऊर्जा में भारत दे रहा है 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर?

सारांश

भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, जिसमें 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। यह देश की स्थिर नीतियों और पारदर्शी बाजार व्यवस्था का परिणाम है। जानिए भारत की ऊर्जा परिवर्तन नीति और इसकी वैश्विक महत्वता।

मुख्य बातें

भारत ने 2030 तक 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर सुनिश्चित किया है।
वसुधैव कुटुंबकम का सिद्धांत ऊर्जा नीति का आधार है।
भारत 2025 में 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
किसानों को सौर पंपों के माध्यम से सशक्त किया जा रहा है।
भारत का लक्ष्य 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को कहा कि भारत वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, ग्रिड और विनिर्माण क्षेत्रों में लगभग 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर प्रदान करता है।

संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) की 16वीं महासभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्थिर नीतियों और पारदर्शी बाजार व्यवस्था के चलते भारत स्वच्छ ऊर्जा में निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक देशों में से एक बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि तकनीक का हस्तांतरण, सस्ती वित्तीय सहायता, क्षमता निर्माण और मानकों का सामंजस्य बेहद जरूरी है। इससे विकासशील देशों को विकास से समझौता किए बिना नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।

एजेंसी के प्रति मजबूत समर्थन को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभव, संस्थानों और तकनीकी ज्ञान को साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत विशेष रूप से सबसे कम विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के साथ मिलकर वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को तेज करना चाहता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन केवल क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों, अवसरों और एक साझा टिकाऊ भविष्य से जुड़ा हुआ है।

महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि भारत की ऊर्जा परिवर्तन नीति वसुधैव कुटुंबकम यानी 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के सिद्धांत पर आधारित है। यह नीति समानता, समावेश और स्थिर नीतियों के लंबे समय के दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है।

उन्होंने दोहराया कि भारत वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने और वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य पाने के लिए प्रतिबद्ध है।

एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी देते हुए प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत ने वर्ष 2025 में ही अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर लिया है। यह लक्ष्य पेरिस समझौते के तहत तय समय से पांच साल पहले पूरा कर लिया गया। भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 266 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है, जिससे भारत दुनिया के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा देशों में शामिल हो गया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजारों में से एक होने के कारण भारत भरोसेमंद और मजबूत बिजली व्यवस्था को प्राथमिकता दे रहा है। इसके लिए ऊर्जा भंडारण समाधान, ग्रिड का आधुनिकीकरण, हरित ऊर्जा गलियारों का विकास और चौबीसों घंटे बिजली देने वाली परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बैटरी और इलेक्ट्रोलाइजर जैसे क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है। इससे देश आत्मनिर्भर बनेगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी मजबूत होगी। ऊर्जा परिवर्तन को लोगों से जोड़ने पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने घरों और किसानों को सशक्त बनाने के लिए कई प्रमुख योजनाएं शुरू की हैं।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत दो साल से भी कम समय में करीब 25 लाख घरों को छत पर सौर ऊर्जा प्रणाली का लाभ मिला है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ने का है।

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत लगभग 21.7 लाख किसानों को डीजल पंपों की जगह सौर पंप लगाने और कृषि बिजली लाइनों के सौरकरण का लाभ मिला है।

इससे पहले प्रल्हाद जोशी ने 'ऊर्जा भविष्य की नई कल्पना: साझा समृद्धि के लिए साहसिक सोच' विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय संवाद में भी भाग लिया।

उन्होंने कहा कि भारत लोगों को केंद्र में रखकर ऊर्जा परिवर्तन को आगे बढ़ा रहा है, जिसमें वित्त, तकनीक और शासन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अहम भूमिका है, ताकि सभी के लिए समान समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन को समानता और समावेश के साथ एक जन आंदोलन बनाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत ने वर्ष 2025 में लगभग 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है।

केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की अध्यक्षता संभालने पर डोमिनिकन गणराज्य को बधाई दी और उपाध्यक्ष देशों केन्या, सोलोमन द्वीप, स्पेन और एंटीगुआ और बारबुडा को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने भरोसा जताया कि इन देशों का नेतृत्व बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करेगा और एक टिकाऊ तथा समावेशी वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को आगे बढ़ाएगा। इसके अलावा प्रल्हाद जोशी ने संयुक्त अरब अमीरात की जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्री अमना बिन्त अब्दुल्ला अल दहाक से मुलाकात की।

इस बैठक में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की गई।

दोनों देशों ने वर्ष 2014 से 2024 के बीच हुए समझौतों के तहत नवीकरणीय ऊर्जा, निवेश और नवाचार में बढ़ती साझेदारी की समीक्षा की, जो संयुक्त अरब अमीरात के वर्ष 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप है।

चर्चा में नवीकरणीय ऊर्जा, विकेंद्रीकृत ऊर्जा समाधान, विनिर्माण, ऊर्जा भंडारण, तकनीकी सहयोग और मिक्स्ड फाइनेंस जैसे विषयों पर ध्यान दिया गया, ताकि लोगों के लिए सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय तक लाभ देने वाली ऊर्जा व्यवस्था बनाई जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसके साथ-साथ यह एक टिकाऊ भविष्य के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस दिशा में भारत की नीतियों और योजनाओं की सफलता सभी के लिए प्रेरणादायक है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में स्वच्छ ऊर्जा में निवेश के अवसर क्या हैं?
भारत वर्ष 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, ग्रिड और विनिर्माण क्षेत्रों में लगभग 300 अरब डॉलर का निवेश अवसर प्रदान करता है।
भारत की ऊर्जा परिवर्तन नीति का क्या महत्व है?
भारत की ऊर्जा परिवर्तन नीति 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत पर आधारित है, जो समानता और समावेश को प्राथमिकता देती है।
भारत का नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य क्या है?
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है।
किस योजनाओं से किसानों को लाभ हो रहा है?
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना से किसानों को सौर पंप लगाने का लाभ मिल रहा है।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता कितनी है?
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 266 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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