यूसीसी पर मंत्री संजय निषाद का समर्थन: 'वोट बराबर है तो सम्मान और सुरक्षा भी बराबर होनी चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने 15 सितंबर 2026 को लखनऊ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का खुलकर समर्थन किया। निषाद ने कहा कि जब देश के सभी नागरिकों का वोट एक समान है, तो उनका सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता भी बराबर होनी चाहिए।
यूसीसी पर निषाद का रुख
मंत्री संजय निषाद ने कहा, 'मैं अमित शाह के बयान का स्वागत करता हूँ और उन्हें धन्यवाद देता हूँ कि कम से कम उन्होंने ऐसा कदम उठाया है।' उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल का विरोध इसलिए किया था क्योंकि उसमें भेदभाव था, और बाद में कांग्रेस को वह बिल स्वीकार करना पड़ा। निषाद के अनुसार, आज भी कुछ धर्मों में भेदभाव की स्थिति बनी हुई है, जिसे यूसीसी के ज़रिए दूर किया जा सकता है।
2027 विधानसभा चुनाव और सीट-शेयरिंग
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बँटवारे को लेकर मंत्री निषाद ने कहा कि गठबंधन सहयोगियों को वे सीटें दी जानी चाहिए, जिन पर वे पहले हार चुके हैं। उन्होंने त्रेता युग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह निषादराज ने भगवान राम को जीत दिलाई थी, उसी तरह आज निषाद समुदाय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भरोसा है। निषाद ने स्पष्ट किया कि सहयोगी दल तभी सार्थक होता है, जब वह गठबंधन की हारी हुई सीटों पर जीत दिला सके।
निषाद पार्टी के आंदोलन और जमीनी लड़ाई
निषाद पार्टी के विरोध-प्रदर्शनों पर मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी की नींव ही आंदोलनों पर टिकी है — रेल आंदोलन, सड़क आंदोलन, जेल भरो आंदोलन, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का घेराव और जंतर-मंतर आंदोलन इसकी मिसालें हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज ने भरोसा किया है, तो न्याय के लिए सड़क पर उतरना उनकी ज़िम्मेदारी है।
विपक्षी नेता से मुलाकात पर सफाई
विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे से हुई मुलाकात को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री निषाद ने कहा कि इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पांडे उनके वरिष्ठ और मार्गदर्शक रहे हैं, और उनके बीमार होने पर मिलना उनका 'फर्ज' था। निषाद ने माना कि जब दो वरिष्ठ नेता मिलते हैं, तो राजनीतिक चर्चा स्वाभाविक है, लेकिन इसे किसी गठबंधन-बदलाव का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
आगे क्या
यूसीसी पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ती जा रही है और उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दल अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं। निषाद के बयान को इसी राजनीतिक रणनीति के तहत देखा जा रहा है।