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यूसीसी पर अमित शाह के बयान का स्वागत, यूपी मंत्री अनिल राजभर बोले — उत्तर प्रदेश सबसे पहले लागू करेगा

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यूसीसी पर अमित शाह के बयान का स्वागत, यूपी मंत्री अनिल राजभर बोले — उत्तर प्रदेश सबसे पहले लागू करेगा

सारांश

अमित शाह के 2029 से पहले 21 एनडीए राज्यों में यूसीसी लागू करने के ऐलान के बाद यूपी मंत्री अनिल राजभर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश इसे सबसे पहले लागू करेगा। बिहार में भी सहमति की प्रक्रिया शुरू, लेकिन जदयू ने अभी अपनी स्थिति स्पष्ट करना बाकी रखी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए और भाजपा शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा।
यूपी मंत्री अनिल राजभर ने घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश यूसीसी लागू करने में सबसे पहले पहल करेगा।
बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस बारे में बातचीत की है।
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे, तब पार्टी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होगी।
उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए और भाजपा शासित 21 राज्यों में लागू करने के ऐलान के बाद 15 सितंबर 2026 को देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एनडीए के सहयोगी दलों — विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार — ने इस घोषणा का खुलकर स्वागत किया है।

यूपी का दावा — सबसे पहले लागू करेंगे

उत्तर प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने गृह मंत्री के बयान की प्रशंसा करते हुए कहा, 'हम सभी गृह मंत्री अमित शाह के बयान का सम्मान करते हैं और यह देश के हित में है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मंशा को जमीनी स्तर पर उतारने में सबसे आगे रहेगा। राजभर के अनुसार, 'अगर सब कुछ ठीक रहा तो हम इसे जल्द ही उत्तर प्रदेश में भी लागू करेंगे।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले से ही यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है, और यूपी की योगी सरकार इस दिशा में अपनी प्राथमिकता का संकेत देना चाहती है।

बिहार में सहमति बनाने की कोशिश

पटना में बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने भी यूसीसी को 'एक महत्वपूर्ण कानून' करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और इसे लागू करने का संकल्प लिया जा चुका है। यादव ने यह भी जानकारी दी कि गृह मंत्री शाह ने इस प्रक्रिया के तहत बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बातचीत की है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लिया जाएगा और उनके साथ चर्चा के बाद ही यूसीसी को लागू करने का प्रयास किया जाएगा। यह बयान संकेत देता है कि बिहार में सहमति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, भले ही अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

जदयू की सतर्क प्रतिक्रिया

गौरतलब है कि जनता दल (यूनाइटेड) — जो एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी है — ने अभी तक अपना पक्ष सीधे तौर पर स्पष्ट नहीं किया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद यूसीसी पर पार्टी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होगी। यह सतर्क रुख बताता है कि एनडीए के भीतर भी सर्वसम्मति अभी पूरी तरह नहीं बनी है।

यूसीसी की पृष्ठभूमि और राजनीतिक महत्व

यूनिफॉर्म सिविल कोड लंबे समय से भाजपा के मूल एजेंडे का हिस्सा रहा है। उत्तराखंड ने इसे पहले ही राज्य स्तर पर अधिसूचित किया है। अब केंद्रीय नेतृत्व की ओर से 2029 की चुनावी समयसीमा तय करना इसे एक रणनीतिक प्राथमिकता बनाता है। आलोचकों का कहना है कि यूसीसी का विस्तार जटिल धार्मिक और सामाजिक प्रश्नों से जुड़ा है, जिन पर व्यापक सामाजिक संवाद अभी भी अपेक्षित है।

आगे क्या होगा

जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की गृह मंत्री शाह से प्रस्तावित मुलाकात के बाद एनडीए की एकजुट रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है। राज्यवार क्रियान्वयन की समयसीमा और विधायी प्रक्रिया का ब्यौरा अभी सामने आना बाकी है। यह घटनाक्रम 2029 के आम चुनावों से पहले एनडीए के भीतर यूसीसी को एक केंद्रीय मुद्दे के रूप में स्थापित करने का प्रयास है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर क्रियान्वयन का रोडमैप अभी भी अस्पष्ट है — न समयसीमा, न विधायी प्रक्रिया का विवरण। उत्तराखंड का अनुभव बताता है कि राज्य स्तर पर यूसीसी की अधिसूचना और उसका व्यावहारिक अनुपालन दो अलग-अलग चुनौतियाँ हैं। बिना विस्तृत ड्राफ्ट और सामाजिक संवाद के, ये घोषणाएँ 2029 की राजनीतिक ज़मीन तैयार करने का काम तो करती हैं, पर नीतिगत वास्तविकता से दूर भी रह सकती हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसा कानूनी ढाँचा है जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों पर — धर्म-निरपेक्ष रूप से — एक समान कानून लागू करेगा। फिलहाल भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ प्रचलित हैं।
अमित शाह ने यूसीसी पर क्या कहा है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश के सभी एनडीए और भाजपा शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। इस बयान के बाद सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
उत्तर प्रदेश यूसीसी कब लागू करेगा?
यूपी मंत्री अनिल राजभर के अनुसार, यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं तो उत्तर प्रदेश यूसीसी लागू करने में सबसे पहले पहल करेगा। हालाँकि, अभी तक कोई ठोस तारीख या विधायी समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
जदयू ने यूसीसी पर क्या रुख अपनाया है?
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद यूसीसी पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल जदयू ने न समर्थन, न विरोध — सतर्क प्रतीक्षा का रुख अपनाया है।
क्या बिहार यूसीसी लागू करने पर सहमत है?
बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने यूसीसी को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बातचीत की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लेकर ही इसे लागू करने का प्रयास किया जाएगा — यानी अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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