यूसीसी पर अमित शाह के बयान का स्वागत, यूपी मंत्री अनिल राजभर बोले — उत्तर प्रदेश सबसे पहले लागू करेगा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए और भाजपा शासित 21 राज्यों में लागू करने के ऐलान के बाद 15 सितंबर 2026 को देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एनडीए के सहयोगी दलों — विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार — ने इस घोषणा का खुलकर स्वागत किया है।
यूपी का दावा — सबसे पहले लागू करेंगे
उत्तर प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर ने गृह मंत्री के बयान की प्रशंसा करते हुए कहा, 'हम सभी गृह मंत्री अमित शाह के बयान का सम्मान करते हैं और यह देश के हित में है।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मंशा को जमीनी स्तर पर उतारने में सबसे आगे रहेगा। राजभर के अनुसार, 'अगर सब कुछ ठीक रहा तो हम इसे जल्द ही उत्तर प्रदेश में भी लागू करेंगे।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले से ही यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है, और यूपी की योगी सरकार इस दिशा में अपनी प्राथमिकता का संकेत देना चाहती है।
बिहार में सहमति बनाने की कोशिश
पटना में बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने भी यूसीसी को 'एक महत्वपूर्ण कानून' करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और इसे लागू करने का संकल्प लिया जा चुका है। यादव ने यह भी जानकारी दी कि गृह मंत्री शाह ने इस प्रक्रिया के तहत बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बातचीत की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लिया जाएगा और उनके साथ चर्चा के बाद ही यूसीसी को लागू करने का प्रयास किया जाएगा। यह बयान संकेत देता है कि बिहार में सहमति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, भले ही अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
जदयू की सतर्क प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि जनता दल (यूनाइटेड) — जो एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी है — ने अभी तक अपना पक्ष सीधे तौर पर स्पष्ट नहीं किया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद यूसीसी पर पार्टी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होगी। यह सतर्क रुख बताता है कि एनडीए के भीतर भी सर्वसम्मति अभी पूरी तरह नहीं बनी है।
यूसीसी की पृष्ठभूमि और राजनीतिक महत्व
यूनिफॉर्म सिविल कोड लंबे समय से भाजपा के मूल एजेंडे का हिस्सा रहा है। उत्तराखंड ने इसे पहले ही राज्य स्तर पर अधिसूचित किया है। अब केंद्रीय नेतृत्व की ओर से 2029 की चुनावी समयसीमा तय करना इसे एक रणनीतिक प्राथमिकता बनाता है। आलोचकों का कहना है कि यूसीसी का विस्तार जटिल धार्मिक और सामाजिक प्रश्नों से जुड़ा है, जिन पर व्यापक सामाजिक संवाद अभी भी अपेक्षित है।
आगे क्या होगा
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा की गृह मंत्री शाह से प्रस्तावित मुलाकात के बाद एनडीए की एकजुट रणनीति स्पष्ट होने की उम्मीद है। राज्यवार क्रियान्वयन की समयसीमा और विधायी प्रक्रिया का ब्यौरा अभी सामने आना बाकी है। यह घटनाक्रम 2029 के आम चुनावों से पहले एनडीए के भीतर यूसीसी को एक केंद्रीय मुद्दे के रूप में स्थापित करने का प्रयास है।