केरल चुनाव हार पर सीपीआई (एम) बैठक में पिनराई विजयन की कार्यशैली पर तीखे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कोझिकोड में सीपीआई (एम) की राज्य समिति की विस्तारित बैठक मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को अपने अंतिम चरण में पहुँच गई — और इसके साथ ही पार्टी के भीतर वह असाधारण बहस भी अपने सबसे तीखे मुकाम पर आ गई, जो 2026 के केरल विधानसभा चुनावों में वामपंथी मोर्चे की करारी हार की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। आलोचना का केंद्र बिंदु स्पष्ट रूप से पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की नेतृत्व शैली रही, जो लगभग तीन दशकों से केरल की वाम राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरे रहे हैं।
बैठक का मिज़ाज: अभूतपूर्व खुलापन
तीन दिवसीय इस विस्तारित बैठक में जिला कमेटियों और प्रतिनिधियों ने जिस बेबाकी से अपनी बात रखी, वह सीपीआई (एम) जैसी अनुशासित पार्टी में बेहद असामान्य मानी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कोल्लम जिला कमेटी ने दुनिया के अन्य हिस्सों में कम्युनिस्ट पार्टियों के पतन को उनके नेताओं के 'अहंकार' से सीधे तौर पर जोड़ा। कन्नूर कमेटी ने यह तर्क दिया कि एलडीएफ के शासन के एक दशक ने पार्टी संगठन को भीतर से कमज़ोर कर दिया है।
प्रतिनिधियों ने 2026 के चुनाव अभियान में इस दावे की भी आलोचना की कि 'एलडीएफ का कोई विकल्प नहीं है' — और कहा कि इस अति-आत्मविश्वास ने पार्टी की ही साख को नुकसान पहुँचाया। यह आलोचना इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि केंद्रीय समिति की रिपोर्ट ने खुद संगठन और राजनीति से जुड़ी गंभीर कमियों को स्वीकार किया था।
विजयन की विरासत: सवालों के घेरे में
पिनराई विजयन 1998 में पहली बार राज्य सचिव बने और 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 2016 से 2026 तक वे केरल के मुख्यमंत्री रहे। हालाँकि बैठक में वे मुख्य वक्ता नहीं रहे, लेकिन आलोचना का मुख्य जोर स्पष्ट रूप से उनके राजनीतिक कामकाज के तरीके — केंद्रीकृत निर्णय-प्रक्रिया और संगठन को कमज़ोर पड़ने देने — से जुड़ा रहा।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी वाम शासन के बाद सीपीआई (एम) में आंतरिक मंथन हुआ हो, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इस बार बहस की तीव्रता और खुलापन पिछले अनुभवों से कहीं अधिक है।
गोविंदन पर दबाव
राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन भी आलोचना के दायरे में आए हैं — विशेष रूप से पार्टी संगठन की लगातार गिरती स्थिति और चुनावी नुकसान को रोकने में उनकी कथित नाकामी को लेकर। सभी की नजरें अब बैठक में उनके समापन जवाब पर टिकी हैं। उनसे यह अपेक्षा है कि वे प्रतिनिधियों की चिंताओं को स्वीकार करें, ज़रूरत पड़े तो नेतृत्व का बचाव भी करें, और साथ ही कोई विश्वसनीय सुधार-मार्ग भी सुझाएँ — यह सब इस तरह से कि बहस खुली नेतृत्व-चुनौती में न बदल जाए।
तत्काल बदलाव के आसार कम
इतनी कड़ी आलोचना के बावजूद, रिपोर्टों के अनुसार इस बात के संकेत बेहद कम हैं कि बैठक शीर्ष स्तर पर किसी तत्काल नेतृत्व-परिवर्तन की दिशा में बढ़ रही है। विजयन या गोविंदन से जुड़े किसी बड़े बदलाव के लिए भारी राजनीतिक दखल की आवश्यकता होगी, जिसके निकट भविष्य में होने के आसार नहीं हैं।
रैली और आगे की राह
विस्तारित राज्य समिति की बैठक कोझिकोड में एक बड़ी जनसभा के साथ समाप्त होगी, जिसमें पार्टी का दावा है कि एक लाख से अधिक समर्थक शामिल होंगे। यह रैली नेतृत्व को एकजुटता प्रदर्शित करने का अवसर दे सकती है। लेकिन बैठक के भीतर हुई बहस ने यह तय कर दिया है कि विजयन के दौर और उनकी विरासत के सवाल को अब पार्टी के चुनाव-पश्चात विश्लेषण से बाहर नहीं रखा जा सकता। सुधार की माँग कर रहे प्रतिनिधियों ने यह भी कहा है कि पार्टी को अपनी गलतियाँ और उन्हें सुधारने के कदम जनता और कार्यकर्ताओं — दोनों — के सामने स्पष्ट रूप से रखने चाहिए।