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केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में भूचाल: विजयन पर तीखे हमले, गोविंदन ने भी उठाए सवाल

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केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में भूचाल: विजयन पर तीखे हमले, गोविंदन ने भी उठाए सवाल

सारांश

केरल में LDF की हार के बाद सीपीआई(एम) की बंद दरवाज़ों वाली संस्कृति टूट गई है। जिला बैठकों में पिनाराई विजयन पर उनके अहंकार और जनता से दूरी के लिए खुले हमले हुए — और सबसे चौंकाने वाली बात यह कि गोविंदन ने खुद कहा कि उनके बेटे ने भी विजयन के हावभाव पर सवाल उठाए थे।

मुख्य बातें

लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की केरल विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद सीपीआई(एम) की जिला समिति बैठकें आंतरिक विद्रोह का मंच बन गई हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर अहंकार, जनता से दूरी और टकराव वाले हावभाव के लिए खुलकर निशाना साधा गया।
गोविंदन ने कथित तौर पर कहा कि उनके अपने बेटे ने भी विजयन के हावभाव और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाए थे।
नेताओं ने विजयन को उम्र संबंधी नियमों से दी गई छूट को असमानता का प्रतीक बताया, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं को चुनाव लड़ने से वंचित किया गया।
कैबिनेट सहयोगी एम.बी.
राजेश और वीणा जॉर्ज के प्रदर्शन को भी पार्टी की कमज़ोरी बताया गया।
पार्टी के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि यह विजयन और गोविंदन के प्रति अब तक की सबसे व्यापक और भावनात्मक आंतरिक आलोचना है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — के केरल में अब तक अनुशासित और बंद दरवाज़ों के पीछे चलने वाले अंदरूनी हलके विधानसभा चुनावों में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की करारी हार के बाद खुले विद्रोह के मंच में तब्दील हो गए हैं। तिरुवनंतपुरम सहित कई जिला समिति बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन को सीधे और भावनात्मक रूप से आवेशित आलोचना का सामना करना पड़ा है — केरल के हालिया राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है।

मुख्य घटनाक्रम

तिरुवनंतपुरम जिला सचिवालय की बैठक में नेताओं ने खुले तौर पर विजयन के कथित अहंकार, आम जनता से बढ़ती दूरी और टकराव वाले हावभाव को चुनावी पराजय की प्रमुख वजह बताया। बताया जा रहा है कि कई सदस्यों ने यह आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री की कार्यशैली ऐसी हो गई थी जिससे आम मतदाता खुद को जोड़ नहीं पा रहे थे, और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आत्मविश्वास के बजाय अधीरता और असहिष्णुता अधिक झलकती थी।

नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के माहौल की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों के लिए वहाँ तक पहुँचना लगभग असंभव हो गया था।

गोविंदन का चर्चित बयान

सबसे तीखी और राजनीतिक रूप से सबसे प्रतीकात्मक टिप्पणी खुद एम.वी. गोविंदन की ओर से आई। विजयन पर हो रही व्यापक आलोचना को समझाने की कोशिश में गोविंदन ने कथित तौर पर कहा कि उनके अपने बेटे ने भी अपने पिता के हावभाव और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाए थे। यह बयान पार्टी के अंदरूनी हलकों में असाधारण माना जा रहा है, क्योंकि यह सुझाव देता है कि विजयन की छवि की समस्या उनके निकटतम परिवेश तक भी पहुँच चुकी थी।

उम्र नियम और आंतरिक असमानता का सवाल

बैठकों में यह सवाल भी उठाया गया कि जब कई वरिष्ठ नेताओं और राज्य समिति के सदस्यों को चुनाव लड़ने के अवसर से वंचित किया गया, तब विजयन को अकेले ही पार्टी के उम्र संबंधी नियमों से छूट क्यों दी गई। आलोचकों का कहना है कि यह असमानता पार्टी के भीतर एक वर्ग-विशेष को मिलने वाले विशेषाधिकार का प्रतीक बन गई।

कैबिनेट सहयोगियों पर भी निशाना

विजयन के कैबिनेट सहयोगी एम.बी. राजेश और वीणा जॉर्ज भी कड़ी आलोचना के घेरे में हैं। नेताओं ने उनके प्रदर्शन और मंत्री के तौर पर उनके कामकाज को पार्टी के लिए एक बड़ी कमज़ोरी बताया। गौरतलब है कि यह आलोचना केवल विजयन तक सीमित न रहकर पूरी सरकारी टीम पर फैल गई है।

पार्टी के भविष्य की दिशा

सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता निजी तौर पर स्वीकार करते हैं कि विजयन और गोविंदन को संगठन के भीतर से पहले कभी भी इतनी सीधी और व्यापक आलोचना का सामना नहीं करना पड़ा था। एक ऐसी पार्टी के लिए जो दशकों से अपने कड़े अनुशासन और असहमति को सख्ती से नियंत्रित करने के लिए जानी जाती रही है, ये बैठकें गहरे असंतोष को उजागर कर रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह जवाबदेही और पार्टी की भावी दिशा को लेकर एक बड़ी आंतरिक लड़ाई का संकेत हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी पार्टी में अब जिला स्तर तक खुली आलोचना यह संकेत देती है कि नेतृत्व का नैतिक अधिकार कमज़ोर पड़ चुका है। गोविंदन का अपने बेटे का हवाला देना इस बात का प्रतीक है कि विजयन की छवि की समस्या अब केवल विपक्ष का एजेंडा नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर की स्वीकृत सच्चाई बन चुकी है। असली सवाल यह है कि क्या यह आलोचना संरचनात्मक सुधार की ओर ले जाएगी या केवल एक व्यक्ति के प्रस्थान तक सिमट जाएगी।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में LDF की हार के बाद सीपीआई(एम) में क्या हो रहा है?
विधानसभा चुनावों में LDF की करारी हार के बाद सीपीआई(एम) की जिला समिति बैठकों में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन के खिलाफ खुली और तीखी आलोचना सामने आई है। पार्टी के इतिहास में यह पहली बार माना जा रहा है जब इस स्तर की सार्वजनिक आंतरिक आलोचना हुई हो।
गोविंदन ने अपने बेटे का ज़िक्र क्यों किया?
विजयन पर हो रही व्यापक आलोचना को समझाते हुए गोविंदन ने कथित तौर पर कहा कि उनके अपने बेटे ने भी विजयन के हावभाव और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाए थे। यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विजयन की नकारात्मक छवि पार्टी के निकटतम हलकों तक भी पहुँच चुकी थी।
विजयन पर किन मुद्दों पर आलोचना हुई?
नेताओं ने विजयन के कथित अहंकार, आम जनता से दूरी, टकराव वाले हावभाव और मुख्यमंत्री कार्यालय की दुर्गमता को चुनावी हार का कारण बताया। इसके अलावा उन्हें उम्र संबंधी पार्टी नियमों से दी गई छूट पर भी सवाल उठाए गए, जबकि अन्य वरिष्ठ नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका गया था।
क्या सीपीआई(एम) के अन्य नेता भी आलोचना के घेरे में हैं?
हाँ, विजयन के पूर्व कैबिनेट सहयोगी एम.बी. राजेश और वीणा जॉर्ज भी कड़ी आलोचना के घेरे में हैं। नेताओं ने उनके मंत्री के तौर पर कामकाज को पार्टी के लिए एक बड़ी कमज़ोरी बताया है।
इस आंतरिक आलोचना का सीपीआई(एम) के भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ये बैठकें पार्टी में गहरे असंतोष को उजागर कर रही हैं और जवाबदेही तथा भावी नेतृत्व की दिशा को लेकर एक बड़ी आंतरिक लड़ाई का संकेत दे सकती हैं। एक ऐसी पार्टी जो अनुशासन के लिए जानी जाती थी, उसमें इस स्तर का खुला विद्रोह संरचनात्मक बदलाव की माँग को बल दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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