पिनाराई विजयन की चुप्पी टूटी: 'सीपीएम मजबूती से वापसी करेगी', पार्टी में बगावत के बीच बोले नेता प्रतिपक्ष
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की ऐतिहासिक हार के बाद पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन ने 19 मई 2026 को सार्वजनिक मंच से अपनी प्रतिक्रिया दी। यह बयान ऐसे नाज़ुक दौर में आया है जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम की जिला समीक्षा बैठकों में विजयन की कार्यशैली को लेकर अभूतपूर्व नाराज़गी सामने आ रही है।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार को अपने गृह जिले कन्नूर में एक पार्टी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विजयन ने कहा कि बीते 10 वर्षों में वाम सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कचरा प्रबंधन और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में केरल को आगे बढ़ाने के लिए ठोस काम किए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम जनता के फैसले को पूरी तरह स्वीकार करते हैं। हम यह नहीं कहते कि केवल हम ही ये काम कर सकते हैं। नई सरकार अगर जनकल्याण के लिए काम करेगी तो हम उसका समर्थन करेंगे, लेकिन अगर रास्ता गलत होगा तो हम विरोध भी करेंगे। किसी को भी इसे एलडीएफ या सीपीएम का अंत नहीं समझना चाहिए। हम मजबूती से वापसी करेंगे।'
चुनावी हार का संदर्भ
4 मई 2026 को आए चुनाव परिणामों में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 102 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। तीसरी बार लगातार सत्ता में लौटकर इतिहास रचने का सपना देख रही एलडीएफ महज 35 सीटों पर सिमट गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी 3 सीटें जीतकर विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
गौरतलब है कि परिणाम आने के बाद विजयन सार्वजनिक रूप से लगभग पूरी तरह अनुपस्थित रहे थे। हार के कुछ दिनों बाद उन्होंने केवल एक संक्षिप्त सोशल मीडिया पोस्ट किया था, जिससे राजनीतिक गलियारों में उनकी चुप्पी को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया था।
सीपीएम में बढ़ता असंतोष
सूत्रों के अनुसार, केरल भर में चल रही सीपीएम की जिला समिति समीक्षा बैठकों में विजयन के खिलाफ असाधारण नाराज़गी उभरकर सामने आई है। कथित तौर पर कई नेताओं ने विजयन की कार्यशैली को अहंकारी बताया और आरोप लगाया कि वे आम कार्यकर्ताओं से कट गए थे।
आलोचकों का कहना है कि सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण और नेतृत्व का जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं से दूर होना इस चुनावी हार के प्रमुख कारणों में से एक रहा। बताया जा रहा है कि कुछ बैठकों में विजयन को नेता प्रतिपक्ष पद से हटाने की माँग भी उठी, जबकि राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन से भी हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की माँग की गई।
विजयन के बयान का राजनीतिक अर्थ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विजयन का 'मजबूत वापसी' वाला बयान केवल समर्थकों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश नहीं है — इसे पार्टी के भीतर अपनी पकड़ और नेतृत्व कायम रखने के स्पष्ट संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सीपीएम के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की माँगें तेज़ हो रही हैं।
आगे की राह सीपीएम के लिए आसान नहीं होगी — पार्टी को न केवल आंतरिक असंतोष से निपटना होगा, बल्कि एक मज़बूत विपक्ष की भूमिका भी निभानी होगी।