पिनाराई विजयन अपनी ही पार्टी में घिरे: 99 से 35 सीटों की हार के बाद CPI(M) में विशेष प्लेनम की मांग

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पिनाराई विजयन अपनी ही पार्टी में घिरे: 99 से 35 सीटों की हार के बाद CPI(M) में विशेष प्लेनम की मांग

सारांश

तीन दशकों तक केरल की वामपंथी राजनीति के निर्विवाद नेता रहे पिनाराई विजयन अब अपनी ही पार्टी में घिर गए हैं। 99 से 35 सीटों पर आई ऐतिहासिक हार ने CPI(M) में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को हवा दी है और विशेष प्लेनम की आवाज़ें बुलंद हो रही हैं।

मुख्य बातें

लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट केरल विधानसभा में 99 सीटों से घटकर 35 सीटों पर सिमट गया।
पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर पथानामथिट्टा और कन्नूर जिला स्तर पर खुला विरोध।
गोविंदन पर संगठन से अधिक निजी हितों को प्राथमिकता देने के आरोप; पत्नी की हार ने स्थिति कमज़ोर की।
पथानामथिट्टा बैठक में आरोप — पिछले 10 वर्षों में आम कार्यकर्ताओं को पार्टी से दूर किया गया।
CPI(M) के भीतर विशेष प्लेनम बुलाने की मांग तेज़ हो गई है।

केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, जो तीन दशकों तक केरल की वामपंथी राजनीति के अपराजेय स्तंभ माने जाते रहे, अब अपनी ही पार्टी के भीतर गहरे विरोध का सामना कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की ऐतिहासिक हार — 140 सदस्यीय विधानसभा में 99 सीटों से गिरकर महज 35 सीटों तक सिमटना — ने पार्टी के भीतर संचित असंतोष को खुलकर बाहर आने का मौका दे दिया है।

तीन दशक की मजबूत पकड़ और अब बदलता समीकरण

पिनाराई विजयन ने 1996 में ई.के. नयनार सरकार में मंत्री पद संभाला और 1998 में पार्टी के राज्य सचिव बने। तब से उन्होंने संगठन पर ऐसी मजबूत पकड़ बनाई कि पार्टी के भीतर उनकी कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाने की हिम्मत बहुत कम नेता जुटा पाते थे। लेकिन चुनावी पराजय ने वह चुप्पी तोड़ दी है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पोलित ब्यूरो और राज्य समिति की बैठकों में विजयन तथा राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की नेतृत्व शैली और निर्णय-प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए गए। यह विरोध अब जिला स्तर तक फैल चुका है।

पथानामथिट्टा और कन्नूर में खुला विद्रोह

पथानामथिट्टा जिला सचिवालय की बैठक में नेताओं ने विजयन को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर ही आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि उम्र सीमा में जो छूट दी गई थी, वह मुख्यमंत्री पद के लिए थी — इतनी बड़ी हार के बाद नेतृत्व बनाए रखने के लिए नहीं। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि पिछले 10 वर्षों में मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यशैली ने आम कार्यकर्ताओं को पार्टी और सरकार दोनों से दूर कर दिया।

कन्नूर, जिसे परंपरागत रूप से विजयन का सबसे अभेद्य गढ़ माना जाता है, वहाँ भी नेताओं ने स्वीकार किया कि पार्टी जनता का मूड भाँपने में नाकाम रही। आलोचकों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान विजयन के बयान और उनकी शैली पार्टी के लिए प्रतिकूल साबित हुई।

गोविंदन पर भी दबाव, पत्नी की हार ने कमज़ोर किया

राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन भी दबाव से अछूते नहीं हैं। पार्टी के भीतर उन पर संगठन से अधिक निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देने के आरोप लग रहे हैं। उनकी पत्नी की चुनावी हार ने उनकी राजनीतिक स्थिति को और कमज़ोर किया है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी को एक मज़बूत और विश्वसनीय संगठनात्मक नेतृत्व की सख्त ज़रूरत है।

विशेष प्लेनम की मांग और नेतृत्व संकट

इन घटनाक्रमों के बीच CPI(M) के भीतर विशेष प्लेनम बुलाने की मांग तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि पार्टी के सामने यह केवल चुनावी हार का सवाल नहीं, बल्कि नेतृत्व के भविष्य और संगठनात्मक दिशा का गहरा संकट है। पहली बार पिनाराई विजयन और गोविंदन दोनों एक साथ अपनी ही पार्टी में राजनीतिक रूप से कमज़ोर नज़र आ रहे हैं।

आने वाले हफ्तों में पार्टी के भीतर होने वाली बैठकें और संभावित प्लेनम यह तय करेंगे कि केरल में वामपंथी राजनीति का अगला अध्याय कौन लिखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो हार उस दबे हुए असंतोष का वाल्व खोल देती है। असली सवाल यह है कि CPI(M) क्या सांगठनिक सुधार की दिशा में जाएगी, या महज नेतृत्व की अदला-बदली तक सीमित रहेगी — क्योंकि बिना ढाँचागत बदलाव के, नया चेहरा पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। 99 से 35 सीटों की गिरावट केरल में वामपंथी राजनीति के लिए एक संरचनात्मक चेतावनी है, जिसे सिर्फ व्यक्तिगत जवाबदेही से नहीं सुलझाया जा सकता।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पिनाराई विजयन को अपनी पार्टी में किस कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा है?
केरल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की 99 से 35 सीटों पर आई भारी हार के बाद CPI(M) के भीतर विजयन की नेतृत्व शैली और निर्णय-प्रक्रिया पर खुले सवाल उठने लगे हैं। पथानामथिट्टा और कन्नूर जिला बैठकों में उनकी कार्यशैली की आलोचना हुई और उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई गई।
CPI(M) में विशेष प्लेनम की मांग क्यों उठ रही है?
चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक दिशा पर व्यापक पुनर्विचार की ज़रूरत महसूस की जा रही है। विशेष प्लेनम एक ऐसा मंच होता है जहाँ पार्टी के सभी स्तरों के प्रतिनिधि मिलकर नीति और नेतृत्व पर निर्णय लेते हैं; इसकी मांग यह दर्शाती है कि असंतोष अब हाशिये पर नहीं, मुख्यधारा में है।
एम.वी. गोविंदन पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
CPI(M) राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन पर पार्टी के भीतर संगठन की तुलना में निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देने के आरोप लग रहे हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी की चुनावी हार ने भी उनकी राजनीतिक साख को कमज़ोर किया है।
लेफ्ट फ्रंट की इस हार का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
एक समय 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के पास 99 सीटें थीं, जो अब घटकर 35 रह गई हैं। यह गिरावट केरल में वामपंथी राजनीति के लिए हाल के दशकों की सबसे बड़ी चुनावी पराजयों में से एक मानी जा रही है।
पिनाराई विजयन का CPI(M) में भविष्य क्या होगा?
यह अभी अनिश्चित है। पार्टी के भीतर विशेष प्लेनम की मांग और जिला स्तर पर बढ़ता विरोध संकेत देता है कि उनकी स्थिति पहले जैसी मज़बूत नहीं रही। आने वाली पार्टी बैठकें और संभावित प्लेनम यह तय करेंगे कि नेतृत्व में बदलाव होगा या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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