केरल CM पिनाराई विजयन ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा, एक दशक लंबा कार्यकाल हुआ समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 4 मई 2026 की सोमवार रात राज्यपाल राजेंद्र वी. आर्लेकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह कदम भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई-एम के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की ऐतिहासिक चुनावी पराजय के महज कुछ घंटों बाद उठाया गया। राज्यपाल ने विजयन से अनुरोध किया कि वे नए मुख्यमंत्री के पदभार ग्रहण करने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बने रहें।
चुनावी परिणाम: एलडीएफ का ऐतिहासिक पतन
केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों में एलडीएफ की सीटें घटकर मात्र 35 रह गईं, जो मोर्चे के लिए एक ऐतिहासिक निम्न स्तर है। इसके विपरीत, कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने 102 सीटें जीतकर सत्ता पर दावा ठोका, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को केवल तीन सीटें मिलीं। यह हार एलडीएफ के लिए न केवल संख्यात्मक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी एक गहरा झटका है।
विजयन का एक दशक लंबा सफर
इस इस्तीफे के साथ ही पिनाराई विजयन का लगभग दस वर्षों का मुख्यमंत्री कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। विजयन 2016 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 2021 में पुनः निर्वाचित होकर उन्होंने केरल की दशकों पुरानी बारी-बारी से सरकार बदलने की परंपरा को तोड़ा — एक ऐसी उपलब्धि जो राज्य के राजनीतिक इतिहास में अभूतपूर्व थी। इस प्रकार वे राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए।
विजयन ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक दृढ़ता और केंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया की छवि बनाई। उनके नेतृत्व में केरल ने लगातार बाढ़ और कोविड-19 महामारी जैसी आपदाओं का सामना किया। साथ ही उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों और विपक्ष के निरंतर हमलों का भी सामना करना पड़ा।
हार के कारण और राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस पराजय के पीछे सत्ता-विरोधी लहर, शासन से जुड़े असंतोष और लगातार दस वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद मतदाताओं के बीच पार्टी के कमज़ोर होते जनाधार को प्रमुख कारण माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब एलडीएफ ने 2021 में एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी और पार्टी में आत्मविश्वास अपने चरम पर था।
आलोचकों का कहना है कि विजयन की शासन शैली, जो अपने केंद्रीकृत स्वभाव के लिए जानी जाती थी, धीरे-धीरे पार्टी के भीतर और आम मतदाताओं के बीच असंतोष का कारण बनती गई।
विजयन का अगला कदम: अटकलों का बाज़ार
जैसे ही एलडीएफ आत्मनिरीक्षण में जुटी है, सबकी निगाहें अब विजयन के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हैं। पार्टी में उनके रुतबे और विधायी अनुभव को देखते हुए, इस बात की अटकलें तेज़ हो गई हैं कि क्या वे नवनिर्वाचित विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाएंगे।
उल्लेखनीय है कि यह इस्तीफा विजयन के 82वें जन्मदिन से ठीक दो सप्ताह पहले आया है। मई 2016 में, मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मीडियाकर्मियों को मिठाई बांटी थी और पूछा था कि क्या कोई जानता है ऐसा क्यों किया जा रहा है — जब कोई जवाब नहीं आया, तो उन्होंने बताया कि यह उनके जन्मदिन का उत्सव था। यह इस्तीफा सिर्फ सत्ता का हस्तांतरण नहीं, बल्कि केरल की राजनीति के एक पूरे युग का पटाक्षेप है — एक ऐसा युग जो ऐतिहासिक उम्मीदों के साथ शुरू हुआ और एक ऐतिहासिक झटके के साथ समाप्त हुआ।