केरल चुनाव 2026: CPI(M) को 35 सीटें, MV गोविंदन प्रेस वार्ता बीच में छोड़ गए
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के केरल राज्य सचिव एमवी गोविंदन अपनी पहली प्रेस वार्ता में स्पष्ट रूप से असहज दिखे और कुछ ही मिनटों में पत्रकारों के सवालों से बचते हुए वहाँ से चले गए। 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में पार्टी महज 35 सीटें ही जीत सकी — जो दशकों में उसकी सबसे बुरी चुनावी हार मानी जा रही है। यह क्षण वाम मोर्चे की गहरी बेचैनी और आंतरिक उथल-पुथल का प्रतीक बन गया है।
मुख्य घटनाक्रम
CPI(M) ने इस चुनाव में ऐतिहासिक तीसरी बार लगातार सत्ता हासिल करने का दावा करते हुए आत्मविश्वास के साथ प्रचार किया था। लेकिन वास्तविकता बेहद कड़वी रही — 140 सीटों वाली विधानसभा में पार्टी केवल 35 सीटें ही जीत पाई। गोविंदन ने परिणाम को 'अप्रत्याशित' बताया और विस्तृत समीक्षा का वादा किया, लेकिन पत्रकारों के सवालों से बचते हुए प्रेस वार्ता को बीच में ही समाप्त कर देने की उनकी भागदौड़ ने पार्टी के रक्षात्मक रुख को और उजागर कर दिया।
गोविंदन ने कहा कि मई और जून में पार्टी सभी संगठनात्मक स्तरों पर व्यापक समीक्षा करेगी।
व्यक्तिगत आघात भी कम नहीं
राज्य सचिव के लिए यह हार व्यक्तिगत रूप से भी बेहद दर्दनाक रही। उनकी पत्नी पीके श्यामला थलीपरम्बा सीट से पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता टीके गोविंदन से हार गईं, जिन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) के समर्थन से चुनाव लड़ा था। पार्टी नेतृत्व से घनिष्ठ रूप से जुड़े इस निर्वाचन क्षेत्र में मिली हार ने राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों स्तरों पर आघात को और गहरा कर दिया।
पारंपरिक गढ़ों में भी सेंध
CPI(M) को कन्नूर, कोझिकोड और अलाप्पुझा जैसे पारंपरिक गढ़ों में भी हार का सामना करना पड़ा, जिन्हें लंबे समय से पार्टी की संगठनात्मक आधारशिला माना जाता रहा है। इन गढ़ों में आई गिरावट पार्टी के मूल समर्थक आधार के भीतर गहरे असंतोष की ओर इशारा करती है।
यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी से अलग होकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं को आश्चर्यजनक जीत मिली। टीके गोविंदन के अलावा पूर्व मंत्री जी. सुधाकरन और वी. कुंजिकृष्णन ने भी अप्रत्याशित जीत दर्ज की। इसे व्यापक रूप से आंतरिक असहमति के चुनावी परिणामों में परिलक्षित होने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पिनराई विजयन की चुप्पी पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, जिन्होंने बाद में सीएम पद से इस्तीफा दे दिया, पार्टी के भीतर से ही दुर्लभ आलोचना का सामना कर रहे हैं। चुनाव परिणामों के बाद से मीडिया से उनकी लगातार अनुपस्थिति ने जवाबदेही की माँगों के बीच और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या होगा
गोविंदन ने स्पष्ट किया कि पार्टी आने वाले हफ्तों में सभी संगठनात्मक स्तरों से परामर्श करते हुए एक व्यापक समीक्षा प्रक्रिया शुरू करेगी। चुनाव से पहले के मुखर आत्मविश्वास और परिणाम के बाद की स्पष्ट बेचैनी के बीच का विरोधाभास अब केरल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। आंतरिक और बाहरी दोनों दबाव बढ़ने के साथ, CPI(M) के अगले कदमों पर पूरे राज्य की कड़ी नज़र रहेगी।