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केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में पिनाराई विजयन के खिलाफ असंतोष, जमीन से शीर्ष तक उठे सवाल

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केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में पिनाराई विजयन के खिलाफ असंतोष, जमीन से शीर्ष तक उठे सवाल

सारांश

छह दशक के सार्वजनिक जीवन में पहली बार पिनाराई विजयन अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। केरल चुनाव में सीपीआई(एम) की करारी हार के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं से लेकर केंद्रीय समिति तक — हर स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। 'अजेय' माने जाने वाले नेता की छवि में अब तक की सबसे गहरी दरार।

मुख्य बातें

केरल विधानसभा चुनाव में सीपीआई(एम) की बड़ी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ पार्टी के भीतर असंतोष तेज़ हुआ।
सीपीआई(एम) केंद्रीय समिति ने केरल राज्य इकाई के उस दावे को खारिज किया कि सरकार के प्रति जनाक्रोश नहीं था।
चालाकुडी सहित कई एरिया कमेटी बैठकों में कार्यकर्ताओं ने विजयन की कार्यशैली और बयानों पर खुलकर आपत्ति जताई।
पार्टी राज्य सचिव एम.वी.
गोविंदन भी आलोचना के घेरे में, लेकिन जनाक्रोश का मुख्य केंद्र विजयन ही हैं।
करीब 25 वर्षों की राजनीतिक साख पर सवाल; पार्टी में आंतरिक सुधारों की माँग ज़ोर पकड़ रही है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — को केरल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ असंतोष तेज़ी से बढ़ रहा है। तिरुवनंतपुरम से मिली रिपोर्टों के अनुसार, यह विरोध अब केवल जमीनी स्तर की बैठकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक जा पहुँचा है। करीब छह दशक के सार्वजनिक जीवन में संभवतः पहली बार विजयन को अपनी ही पार्टी के भीतर से इस स्तर के राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्रीय समिति ने राज्य इकाई का दावा खारिज किया

सूत्रों के अनुसार, सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति ने केरल राज्य इकाई के उस दावे को सिरे से नकार दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य में सरकार के प्रति जनाक्रोश जैसी कोई स्थिति नहीं थी। पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने तीखा सवाल उठाया — यदि सरकार के विरुद्ध जनता में असंतोष नहीं था, तो इतनी बड़ी चुनावी पराजय की वजह क्या रही? यह टकराव राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है।

एरिया कमेटी बैठकों में खुली आलोचना

केरल में एरिया कमेटी की बैठकों के दौरान पार्टी सदस्यों ने खुलकर कहा कि विजयन का कार्यशैली और उनके सार्वजनिक बयान आम मतदाताओं को सीपीआई(एम) से दूर करते रहे। चालाकुडी क्षेत्र समिति की बैठक में सदस्यों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री का रवैया और उनके बयान पार्टी की जड़ों को कमज़ोर कर रहे थे। उम्मीदवारों के चयन और स्थानीय नेताओं के कामकाज के तरीके पर भी तीखी आपत्तियाँ दर्ज की गईं।

एम.वी. गोविंदन भी आलोचना के घेरे में

पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन भी आलोचना से अछूते नहीं रहे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर उनके जवाब इतने अस्पष्ट होते हैं कि पार्टी सदस्यों के लिए भी उन्हें समझना कठिन हो जाता है। हालाँकि, पार्टी के भीतर यह सर्वसम्मत धारणा है कि जनाक्रोश का मुख्य केंद्र अब भी पिनाराई विजयन ही हैं।

करीब 25 साल की राजनीतिक साख पर सवाल

करीब 25 वर्षों तक केरल में सीपीआई(एम) के सर्वाधिक प्रभावशाली नेता माने जाने वाले विजयन पर पिछले 10 वर्षों में सरकार की इतनी पकड़ थी कि उनकी सहमति के बिना कोई बड़ा निर्णय लेना असंभव माना जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी चुनावी नुकसान की समीक्षा कर रही है और आंतरिक सुधारों की माँग ज़ोर पकड़ रही है। गौरतलब है कि जिस नेता को कभी सीपीआई(एम) के भीतर अजेय माना जाता था, वह अब जमीनी कार्यकर्ताओं से लेकर शीर्ष नेतृत्व तक — हर स्तर पर — जवाबदेही की माँग का सामना कर रहा है।

आगे क्या होगा

पार्टी नेतृत्व चुनावी नुकसान की समीक्षा में जुटा है, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार विजयन के इर्द-गिर्द बनी 'अपराजेय नेता' की छवि में अब तक की सबसे गहरी दरार आ चुकी है। आने वाले हफ्तों में पार्टी की आंतरिक समीक्षा बैठकें यह तय करेंगी कि केरल में सीपीआई(एम) का नेतृत्व किस दिशा में जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सामान्य समीक्षा नहीं, बल्कि संरचनागत दरार का संकेत होता है। केंद्रीय समिति और राज्य इकाई के बीच का यह टकराव बताता है कि हार की जड़ें महज़ चुनावी रणनीति में नहीं, बल्कि शासन और आंतरिक संवाद की विफलता में हैं। असली सवाल यह है कि क्या पार्टी एक व्यक्ति की छवि से ऊपर उठकर संस्थागत आत्मचिंतन कर पाएगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल चुनाव में सीपीआई(एम) की हार के बाद पिनाराई विजयन को किस तरह की आलोचना का सामना है?
केरल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय नेतृत्व ने विजयन की कार्यशैली, सार्वजनिक बयानों और उम्मीदवार चयन पर तीखे सवाल उठाए हैं। एरिया कमेटी बैठकों में खुलकर कहा गया कि उनका रवैया मतदाताओं को पार्टी से दूर कर रहा था।
सीपीआई(एम) केंद्रीय समिति ने केरल राज्य इकाई के किस दावे को खारिज किया?
केंद्रीय समिति ने केरल राज्य इकाई के उस दावे को पूरी तरह नकार दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्य में सरकार के विरुद्ध कोई जनाक्रोश नहीं था। राष्ट्रीय नेताओं ने पूछा कि यदि ऐसा था, तो इतनी बड़ी चुनावी पराजय क्यों हुई।
एम.वी. गोविंदन की भूमिका इस विवाद में क्या है?
पार्टी राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन पर भी आलोचना हो रही है — कार्यकर्ताओं का कहना है कि संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर उनके जवाब अस्पष्ट और समझने में कठिन होते हैं। हालाँकि, पार्टी के भीतर जनाक्रोश का मुख्य निशाना अब भी पिनाराई विजयन ही हैं।
पिनाराई विजयन केरल में सीपीआई(एम) के कितने समय से प्रमुख नेता रहे हैं?
विजयन करीब 25 वर्षों से केरल में सीपीआई(एम) के सबसे प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं और उनका सार्वजनिक जीवन लगभग छह दशक पुराना है। पिछले 10 वर्षों में उनकी सरकार पर इतनी मजबूत पकड़ थी कि उनकी सहमति के बिना कोई बड़ा निर्णय संभव नहीं माना जाता था।
सीपीआई(एम) में इस असंतोष के बाद आगे क्या होने की संभावना है?
पार्टी चुनावी नुकसान की आंतरिक समीक्षा कर रही है और आने वाली बैठकों में केरल नेतृत्व की दिशा तय होगी। विश्लेषकों के अनुसार, आंतरिक सुधारों की माँग और केंद्र-राज्य इकाई के बीच तनाव को देखते हुए पार्टी संगठन में बड़े बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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