8 जुलाई 2026
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केरल हार के बाद माकपा में बगावत: पिनराई विजयन पर इस्तीफे का दबाव, तीसरी बड़ी चुनावी निराशा

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केरल हार के बाद माकपा में बगावत: पिनराई विजयन पर इस्तीफे का दबाव, तीसरी बड़ी चुनावी निराशा

सारांश

केरल में चुनावी हार के बाद माकपा में खुला विद्रोह — पिनराई विजयन के अपने करीबी समर्थक भी इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। यह लगातार तीसरी बड़ी पराजय है, फिर भी केंद्रीय नेतृत्व ने विजयन को विपक्ष का नेता बनाने की मंजूरी दे दी है।

मुख्य बातें

23 मई 2026 को केरल चुनावी हार के बाद माकपा (सीपीआई-एम) की समीक्षा बैठकों में पिनराई विजयन के खिलाफ इस्तीफे की माँग उठी।
परस्साला एरिया सचिव एस.
अजयकुमार — जो विजयन के पुराने करीबी समर्थक रहे हैं — ने उनसे विधायक पद छोड़ने की माँग की।
तिरुवंबाडी एरिया कमेटी में पी.ए.
मोहम्मद रियास (विजयन के दामाद) को हार का जिम्मेदार ठहराया गया; राज्य समिति सदस्य चंद्रन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी।
यह माकपा की 2024 लोकसभा और 2025 स्थानीय निकाय चुनावों के बाद लगातार तीसरी बड़ी चुनावी निराशा है।
बावजूद दबाव के, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पिनराई विजयन को केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने की मंजूरी पहले ही दे दी है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — जिसे माकपा या सीपीआई-एम भी कहा जाता है — के भीतर 23 मई 2026 को खुला विद्रोह उस समय सामने आया जब केरल में चुनावी पराजय के बाद पार्टी की समीक्षा बैठकों में वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन के खिलाफ इस्तीफे की माँग उठने लगी। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पहली बार विजयन को पार्टी के अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली समीक्षा बैठक और विजयन की अनुपस्थिति

पार्टी इन दिनों नई दिल्ली में तीन दिवसीय समीक्षा बैठक आयोजित कर रही है, जिसमें चुनावी हार के कारणों और कार्यकर्ताओं के बढ़ते असंतोष का आकलन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिनराई विजयन इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं, जिसे पार्टी के भीतर उनकी घटती पकड़ के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नेतृत्व को न केवल हार के बड़े अंतर ने, बल्कि पार्टी के अंदर से उठ रही मुखर आलोचना ने भी चौंका दिया है।

परस्साला एरिया कमेटी में सबसे तीखा हमला

सबसे तीखी आलोचना माकपा की परस्साला एरिया कमेटी की बैठक में सामने आई, जहाँ एरिया सचिव एस. अजयकुमार ने माँग की कि पिनराई विजयन विधायक पद से इस्तीफा दें और पार्टी के लिए उदाहरण पेश करें। अजयकुमार ने विजयन को चुनावी हार का पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे विपक्ष के नेता बनने के योग्य नहीं हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक पद छोड़ देना चाहिए। यह आलोचना इसलिए भी विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अजयकुमार लंबे समय से विजयन के करीबी समर्थक रहे हैं और उन्होंने पहले उनके समर्थन में सांस्कृतिक कार्यक्रम तक आयोजित किए थे।

रियास विवाद और अनुशासनात्मक चेतावनी

तिरुवंबाडी एरिया कमेटी की बैठक में भी तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब कुछ सदस्यों ने हार के लिए पी.ए. मोहम्मद रियास को जिम्मेदार ठहराया। रियास पिनराई विजयन के दामाद हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं — हालाँकि इस चुनाव में उन्होंने बेपोर सीट से जीत दर्ज की है। विवाद तब और गहरा गया जब राज्य समिति सदस्य चंद्रन ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि रियास के खिलाफ आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं दिए गए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह तब हुआ जब पार्टी नेतृत्व लगातार यह कह रहा था कि समीक्षा बैठकों में खुली आलोचना का स्वागत है — जो एक स्पष्ट विरोधाभास है।

कार्यशैली और विवादित बयानों पर आलोचना

राज्यभर की कई समिति बैठकों में पार्टी के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन और पिनराई विजयन की कार्यशैली, सार्वजनिक व्यवहार तथा संवेदनशील मुद्दों से निपटने के तरीके को लेकर भी तीखी आलोचना हुई। नेताओं का कहना है कि 'कडक्कू पुरथ' और 'डैश मोने' जैसे बयानों का राजनीतिक नुकसान हुआ और इससे मतदाता पार्टी से दूर हुए।

तीसरी बड़ी हार और नेतृत्व का भविष्य

यह हार माकपा के लिए लगातार तीसरी बड़ी चुनावी निराशा है। इससे पहले पार्टी को 2024 लोकसभा चुनाव और 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में भी खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था। गौरतलब है कि हर बार नेतृत्व ने वापसी का दावा किया, लेकिन पार्टी अपेक्षित सुधार नहीं कर सकी। बढ़ते दबाव के बावजूद नेतृत्व में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं — बताया जा रहा है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पहले ही पिनराई विजयन को केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने को मंजूरी दे चुका है। कभी अजेय माना जाने वाला यह वामपंथी गढ़ अब पिछले कई दशकों के सबसे गहरे संगठनात्मक संकट से गुजर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या फिर समीक्षा बैठकें महज औपचारिकता बनकर रह जाएँगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माकपा में पिनराई विजयन के खिलाफ इस्तीफे की माँग क्यों उठ रही है?
केरल विधानसभा चुनाव में बड़े अंतर से हार के बाद माकपा की समीक्षा बैठकों में विजयन की कार्यशैली और विवादित बयानों को हार का कारण बताते हुए उनसे विधायक पद छोड़ने की माँग की जा रही है। यह उनके लंबे राजनीतिक जीवन में पहली बार है जब पार्टी के भीतर से इतनी मुखर आलोचना सामने आई है।
परस्साला एरिया सचिव एस. अजयकुमार कौन हैं और उनकी माँग क्या है?
एस. अजयकुमार माकपा की परस्साला एरिया कमेटी के सचिव हैं और लंबे समय से पिनराई विजयन के करीबी समर्थक माने जाते रहे हैं। उन्होंने माँग की है कि विजयन विधायक पद से इस्तीफा दें और पार्टी के लिए उदाहरण पेश करें, साथ ही कहा कि वे विपक्ष के नेता बनने के योग्य नहीं हैं।
पी.ए. मोहम्मद रियास विवाद क्या है?
पी.ए. मोहम्मद रियास पिनराई विजयन के दामाद हैं और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। तिरुवंबाडी एरिया कमेटी की बैठक में कुछ सदस्यों ने हार के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया, जिसके बाद राज्य समिति सदस्य चंद्रन ने कथित तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी।
क्या पिनराई विजयन विपक्ष के नेता बनेंगे?
बताया जा रहा है कि माकपा का केंद्रीय नेतृत्व पहले ही पिनराई विजयन को केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने को मंजूरी दे चुका है। इसका मतलब है कि पार्टी के भीतर बढ़ते दबाव के बावजूद नेतृत्व में कोई बड़ा बदलाव फिलहाल नहीं होगा।
माकपा की यह हार कितनी बड़ी है और इसका इतिहास क्या है?
केरल की यह हार माकपा के लिए लगातार तीसरी बड़ी चुनावी निराशा है — इससे पहले 2024 लोकसभा चुनाव और 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा था। हर बार नेतृत्व ने वापसी का दावा किया, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
राष्ट्र प्रेस
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