केरल हार के बाद माकपा में बगावत: पिनराई विजयन पर इस्तीफे का दबाव, तीसरी बड़ी चुनावी निराशा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — जिसे माकपा या सीपीआई-एम भी कहा जाता है — के भीतर 23 मई 2026 को खुला विद्रोह उस समय सामने आया जब केरल में चुनावी पराजय के बाद पार्टी की समीक्षा बैठकों में वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन के खिलाफ इस्तीफे की माँग उठने लगी। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पहली बार विजयन को पार्टी के अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली समीक्षा बैठक और विजयन की अनुपस्थिति
पार्टी इन दिनों नई दिल्ली में तीन दिवसीय समीक्षा बैठक आयोजित कर रही है, जिसमें चुनावी हार के कारणों और कार्यकर्ताओं के बढ़ते असंतोष का आकलन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिनराई विजयन इस बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं, जिसे पार्टी के भीतर उनकी घटती पकड़ के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नेतृत्व को न केवल हार के बड़े अंतर ने, बल्कि पार्टी के अंदर से उठ रही मुखर आलोचना ने भी चौंका दिया है।
परस्साला एरिया कमेटी में सबसे तीखा हमला
सबसे तीखी आलोचना माकपा की परस्साला एरिया कमेटी की बैठक में सामने आई, जहाँ एरिया सचिव एस. अजयकुमार ने माँग की कि पिनराई विजयन विधायक पद से इस्तीफा दें और पार्टी के लिए उदाहरण पेश करें। अजयकुमार ने विजयन को चुनावी हार का पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे विपक्ष के नेता बनने के योग्य नहीं हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक पद छोड़ देना चाहिए। यह आलोचना इसलिए भी विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अजयकुमार लंबे समय से विजयन के करीबी समर्थक रहे हैं और उन्होंने पहले उनके समर्थन में सांस्कृतिक कार्यक्रम तक आयोजित किए थे।
रियास विवाद और अनुशासनात्मक चेतावनी
तिरुवंबाडी एरिया कमेटी की बैठक में भी तनाव उस समय चरम पर पहुँच गया जब कुछ सदस्यों ने हार के लिए पी.ए. मोहम्मद रियास को जिम्मेदार ठहराया। रियास पिनराई विजयन के दामाद हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं — हालाँकि इस चुनाव में उन्होंने बेपोर सीट से जीत दर्ज की है। विवाद तब और गहरा गया जब राज्य समिति सदस्य चंद्रन ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि रियास के खिलाफ आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं दिए गए तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। यह तब हुआ जब पार्टी नेतृत्व लगातार यह कह रहा था कि समीक्षा बैठकों में खुली आलोचना का स्वागत है — जो एक स्पष्ट विरोधाभास है।
कार्यशैली और विवादित बयानों पर आलोचना
राज्यभर की कई समिति बैठकों में पार्टी के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन और पिनराई विजयन की कार्यशैली, सार्वजनिक व्यवहार तथा संवेदनशील मुद्दों से निपटने के तरीके को लेकर भी तीखी आलोचना हुई। नेताओं का कहना है कि 'कडक्कू पुरथ' और 'डैश मोने' जैसे बयानों का राजनीतिक नुकसान हुआ और इससे मतदाता पार्टी से दूर हुए।
तीसरी बड़ी हार और नेतृत्व का भविष्य
यह हार माकपा के लिए लगातार तीसरी बड़ी चुनावी निराशा है। इससे पहले पार्टी को 2024 लोकसभा चुनाव और 2025 स्थानीय निकाय चुनावों में भी खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा था। गौरतलब है कि हर बार नेतृत्व ने वापसी का दावा किया, लेकिन पार्टी अपेक्षित सुधार नहीं कर सकी। बढ़ते दबाव के बावजूद नेतृत्व में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं — बताया जा रहा है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पहले ही पिनराई विजयन को केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने को मंजूरी दे चुका है। कभी अजेय माना जाने वाला यह वामपंथी गढ़ अब पिछले कई दशकों के सबसे गहरे संगठनात्मक संकट से गुजर रहा है।