केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में विजयन-गोविंदन के खिलाफ खुला विद्रोह, नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज

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केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में विजयन-गोविंदन के खिलाफ खुला विद्रोह, नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज

सारांश

केरल विधानसभा चुनाव में हार के बाद सीपीआई(एम) में विजयन और गोविंदन के खिलाफ अभूतपूर्व विद्रोह भड़क उठा है। अलाप्पुझा से कन्नूर तक बैठकें आलोचना के मंच बन गई हैं, पोलित ब्यूरो तक में सवाल उठे हैं — और पार्टी का केंद्रीकृत अनुशासन दरकता दिख रहा है।

मुख्य बातें

केरल विधानसभा चुनाव में हार के बाद सीपीआई(एम) में पिनराई विजयन और राज्य सचिव एम.वी.
गोविंदन के खिलाफ खुला विद्रोह शुरू हो गया है।
अलाप्पुझा जिला सचिवालय बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने विजयन के विपक्ष के नेता पद से इस्तीफे की माँग की।
पोलित ब्यूरो सदस्य विजू कृष्णन ने ऑनलाइन बैठक में विजयन के पद पर बने रहने पर सीधे सवाल उठाए।
केंद्रीय समिति सदस्य पी.के.
श्रीमती ने हार को सार्वजनिक रूप से 'शर्मनाक और अपमानजनक' बताया।
तालिपरम्बा और पय्यानूर जैसे पारंपरिक गढ़ों में हार ने पार्टी को भीतर से हिलाया।
आलोचकों का कहना है कि नेतृत्व का विशेष जाँच आयोग असंतुष्टों को अलग-थलग करने का औज़ार है।

केरल विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर एक अभूतपूर्व विद्रोह की लहर उठ खड़ी हुई है। पिनराई विजयन और राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व के खिलाफ जिला समितियों से लेकर पोलित ब्यूरो तक — हर स्तर पर जवाबदेही, नेतृत्व परिवर्तन और पार्टी के व्यापक राजनीतिक पुनर्गठन की माँग उठ रही है। 19 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम से मिली रिपोर्टों के अनुसार, यह संकट पार्टी के इतिहास में हाल के दशकों का सबसे गहरा आंतरिक टकराव बनता दिख रहा है।

अलाप्पुझा से कन्नूर तक: बैठकें बनीं आलोचना के मंच

जो बैठकें कभी विजयन के प्रति अटूट निष्ठा के माहौल में संपन्न होती थीं, वे अब तीखे विरोध के अखाड़े बन गई हैं। अलाप्पुझा जिला सचिवालय की बैठक में वरिष्ठ नेता थॉमस आइजैक और साजी चेरियन की मौजूदगी में कथित तौर पर यह सवाल उठाया गया कि चुनावी पराजय के बावजूद विजयन को असाधारण सुरक्षा और संरक्षण क्यों मिल रहा है।

सदस्यों ने माँग की कि विजयन विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा दें। साथ ही, एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को तालिपरम्बा से चुनाव लड़ाने के फैसले की भी कड़ी आलोचना की गई — जहाँ उन्हें भारी हार झेलनी पड़ी।

कन्नूर में जिला समिति की चर्चाओं में असंतोष और भी मुखर रहा। कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि नेतृत्व की कठोर और टकराव-केंद्रित राजनीति ने पार्टी को जनाधार से काट दिया। तालिपरम्बा और पय्यानूर जैसे पारंपरिक गढ़ों में हुई हार ने पार्टी को भीतर से हिला दिया है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी उठे सवाल

यह विद्रोह अब केरल की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुँच गया है। पोलित ब्यूरो सदस्य विजू कृष्णन ने ऑनलाइन पोलित ब्यूरो बैठक के दौरान खुले तौर पर सवाल उठाया कि केरल में हार के बाद विजयन का विपक्ष के नेता पद पर बने रहना उचित है या नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि यह हार सीधे नेतृत्व की विफलता का परिणाम है।

केंद्रीय समिति की सदस्य पी.के. श्रीमती ने इस हार को सार्वजनिक रूप से 'शर्मनाक और अपमानजनक' करार दिया। उनकी इन टिप्पणियों को व्यापक रूप से विजयन-गोविंदन खेमे पर सीधे प्रहार के तौर पर देखा जा रहा है।

जाँच आयोग पर उठे सवाल

पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित विशेष जाँच आयोग को लेकर भी आलोचकों का कहना है कि इसका असली मकसद हार के कारणों की निष्पक्ष पड़ताल करना नहीं, बल्कि जनाक्रोश को भटकाना और वरिष्ठ नेता पी. जयराजन जैसे असंतुष्ट नेताओं को हाशिये पर धकेलना है। हालाँकि नेतृत्व ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आगे क्या होगा

कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग केरल में विशेष पूर्ण सत्र बुलाए जाने और एम.वी. गोविंदन को राज्य सचिव पद से हटाए जाने की माँग कर रहा है। गौरतलब है कि सीपीआई(एम) में इस स्तर का खुला आंतरिक विरोध दुर्लभ है — पार्टी की संरचना परंपरागत रूप से केंद्रीकृत अनुशासन पर टिकी है। यह देखना होगा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस दबाव के सामने झुकता है या अपनी स्थिति बनाए रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यक्ति-केंद्रित नेतृत्व मॉडल की परिणति है जिसे विजयन ने वर्षों में खड़ा किया। विडंबना यह है कि जो पार्टी 'जनवादी केंद्रीयवाद' की सैद्धांतिक पक्षधर है, उसमें असहमति को इतने लंबे समय तक दबाया गया कि वह अब एक साथ फट पड़ी है। जाँच आयोग की विश्वसनीयता पर उठते सवाल यह भी बताते हैं कि पार्टी का आत्म-मूल्यांकन तंत्र कितना कमज़ोर पड़ चुका है। असली परीक्षा यह है कि क्या केंद्रीय नेतृत्व इस दबाव में वास्तविक संरचनात्मक बदलाव करेगा, या फिर एक बार फिर अनुशासन की आड़ में जवाबदेही को टाल देगा।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में सीपीआई(एम) के खिलाफ आंतरिक विद्रोह क्यों भड़का?
केरल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पिनराई विजयन और एम.वी. गोविंदन की नेतृत्व शैली को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि अहंकार, व्यक्ति-केंद्रित कार्यशैली और कठोर राजनीति ने पार्टी को जनाधार से काट दिया।
पिनराई विजयन से इस्तीफे की माँग क्यों हो रही है?
अलाप्पुझा जिला सचिवालय बैठक में सदस्यों ने माँग की कि विजयन विपक्ष के नेता पद छोड़ें, क्योंकि चुनावी हार के बाद उनका उस पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है। पोलित ब्यूरो सदस्य विजू कृष्णन ने भी इसी माँग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है।
एम.वी. गोविंदन की पत्नी के चुनाव लड़ने पर विवाद क्यों है?
पार्टी के भीतर आलोचकों का कहना है कि राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को तालिपरम्बा से टिकट देना एक गलत फैसला था, जो परिवारवाद का संकेत देता है। श्यामला को वहाँ भारी हार का सामना करना पड़ा।
सीपीआई(एम) का विशेष जाँच आयोग क्या है और इस पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
नेतृत्व ने हार के कारणों की समीक्षा के लिए एक विशेष जाँच आयोग गठित किया है। आलोचकों का कहना है कि यह आयोग असली कमियों की पड़ताल के बजाय असंतुष्ट नेताओं — विशेष रूप से पी. जयराजन — को निशाना बनाने और जनाक्रोश को भटकाने का माध्यम है।
इस आंतरिक संकट का सीपीआई(एम) के भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है?
कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग केरल में विशेष पूर्ण सत्र और गोविंदन को हटाने की माँग कर रहा है। यदि केंद्रीय नेतृत्व ने इस दबाव को नजरअंदाज किया, तो पार्टी के भीतर दरार और गहरी हो सकती है — खासकर उन गढ़ों में जहाँ पार्टी पहले ही कमज़ोर हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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