केरल चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) में विजयन-गोविंदन के खिलाफ खुला विद्रोह, नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर एक अभूतपूर्व विद्रोह की लहर उठ खड़ी हुई है। पिनराई विजयन और राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व के खिलाफ जिला समितियों से लेकर पोलित ब्यूरो तक — हर स्तर पर जवाबदेही, नेतृत्व परिवर्तन और पार्टी के व्यापक राजनीतिक पुनर्गठन की माँग उठ रही है। 19 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम से मिली रिपोर्टों के अनुसार, यह संकट पार्टी के इतिहास में हाल के दशकों का सबसे गहरा आंतरिक टकराव बनता दिख रहा है।
अलाप्पुझा से कन्नूर तक: बैठकें बनीं आलोचना के मंच
जो बैठकें कभी विजयन के प्रति अटूट निष्ठा के माहौल में संपन्न होती थीं, वे अब तीखे विरोध के अखाड़े बन गई हैं। अलाप्पुझा जिला सचिवालय की बैठक में वरिष्ठ नेता थॉमस आइजैक और साजी चेरियन की मौजूदगी में कथित तौर पर यह सवाल उठाया गया कि चुनावी पराजय के बावजूद विजयन को असाधारण सुरक्षा और संरक्षण क्यों मिल रहा है।
सदस्यों ने माँग की कि विजयन विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा दें। साथ ही, एम.वी. गोविंदन की पत्नी पी.के. श्यामला को तालिपरम्बा से चुनाव लड़ाने के फैसले की भी कड़ी आलोचना की गई — जहाँ उन्हें भारी हार झेलनी पड़ी।
कन्नूर में जिला समिति की चर्चाओं में असंतोष और भी मुखर रहा। कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि नेतृत्व की कठोर और टकराव-केंद्रित राजनीति ने पार्टी को जनाधार से काट दिया। तालिपरम्बा और पय्यानूर जैसे पारंपरिक गढ़ों में हुई हार ने पार्टी को भीतर से हिला दिया है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी उठे सवाल
यह विद्रोह अब केरल की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुँच गया है। पोलित ब्यूरो सदस्य विजू कृष्णन ने ऑनलाइन पोलित ब्यूरो बैठक के दौरान खुले तौर पर सवाल उठाया कि केरल में हार के बाद विजयन का विपक्ष के नेता पद पर बने रहना उचित है या नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि यह हार सीधे नेतृत्व की विफलता का परिणाम है।
केंद्रीय समिति की सदस्य पी.के. श्रीमती ने इस हार को सार्वजनिक रूप से 'शर्मनाक और अपमानजनक' करार दिया। उनकी इन टिप्पणियों को व्यापक रूप से विजयन-गोविंदन खेमे पर सीधे प्रहार के तौर पर देखा जा रहा है।
जाँच आयोग पर उठे सवाल
पार्टी नेतृत्व द्वारा घोषित विशेष जाँच आयोग को लेकर भी आलोचकों का कहना है कि इसका असली मकसद हार के कारणों की निष्पक्ष पड़ताल करना नहीं, बल्कि जनाक्रोश को भटकाना और वरिष्ठ नेता पी. जयराजन जैसे असंतुष्ट नेताओं को हाशिये पर धकेलना है। हालाँकि नेतृत्व ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आगे क्या होगा
कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग केरल में विशेष पूर्ण सत्र बुलाए जाने और एम.वी. गोविंदन को राज्य सचिव पद से हटाए जाने की माँग कर रहा है। गौरतलब है कि सीपीआई(एम) में इस स्तर का खुला आंतरिक विरोध दुर्लभ है — पार्टी की संरचना परंपरागत रूप से केंद्रीकृत अनुशासन पर टिकी है। यह देखना होगा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस दबाव के सामने झुकता है या अपनी स्थिति बनाए रखता है।