केरल में एलडीएफ की हार के बाद सीपीआई और सीपीआई(एम) में तनाव, विपक्ष उपनेता पद पर खींचतान

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केरल में एलडीएफ की हार के बाद सीपीआई और सीपीआई(एम) में तनाव, विपक्ष उपनेता पद पर खींचतान

सारांश

केरल में सत्ता गँवाने के बाद एलडीएफ के भीतर नई दरार उभरी है — सीपीआई ने विपक्ष उपनेता पद की खुली माँग कर सीपीआई(एम) को असहज कर दिया है। यह विवाद पदों से कहीं बड़ा है; यह वाम गठबंधन में वर्चस्व की लंबी लड़ाई का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

एलडीएफ की चुनावी हार के बाद सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच तनाव सार्वजनिक हो गया है।
सीपीआई राज्य सेक्रेटरी बिनॉय विश्वम ने खुलेआम विपक्ष के डिप्टी लीडर का पद सीपीआई को देने की माँग की।
एलडीएफ संयोजक टी.पी.
रामकृष्णन ने कहा कि ऐसे मामले मीडिया में नहीं, गठबंधन बैठक में उठाए जाने चाहिए।
सीपीआई ने हार की जिम्मेदारी सीधे पिनाराई विजयन की शासन-शैली पर डाली है।
पिनाराई विजयन के एक दशक के शासन में सीपीआई कम से कम दो बार दबाव बनाकर मुख्यमंत्री का रुख बदलवा चुकी है।

केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की करारी चुनावी हार के बाद गठबंधन के भीतर दरारें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के बीच वर्षों से दबा तनाव अब विपक्ष के उपनेता पद को लेकर सार्वजनिक संघर्ष में बदल गया है। तिरुवनंतपुरम से मिली रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद केवल एक पद तक सीमित नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर प्रभाव और राजनीतिक वर्चस्व की व्यापक लड़ाई का रूप ले चुका है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

सीपीआई के राज्य सेक्रेटरी बिनॉय विश्वम ने सार्वजनिक रूप से मांग की कि विधानसभा में विपक्ष के डिप्टी लीडर का पद सीपीआई को दिया जाए। इस खुली माँग से सीपीआई(एम) नाराज हो गई। एलडीएफ संयोजक टी.पी. रामकृष्णन ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर गठबंधन की आंतरिक बैठक में चर्चा होनी चाहिए, न कि मीडिया के सामने। गौरतलब है कि रामकृष्णन उन दिनों कांग्रेस के मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा में देरी का मज़ाक उड़ा रहे थे, जबकि उनके अपने गठबंधन में अंदरूनी असंतोष सुलग रहा था।

सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच पुराना तनाव

पिनाराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ के एक दशक लंबे शासन के दौरान सीपीआई ने कम से कम दो बड़े मौकों पर इतना दबाव बनाया कि मुख्यमंत्री को अपना रुख बदलना पड़ा। हालाँकि सीपीआई अधिकांश समय जूनियर सहयोगी की भूमिका में रही, लेकिन उसने बार-बार यह संकेत दिया कि वह सीपीआई(एम) के वर्चस्व के सामने पूरी तरह नतमस्तक नहीं होगी। यह ऐसे समय में आया है जब गठबंधन सत्ता खोने के बाद अपनी भूमिका और पहचान को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है।

हार के लिए विजयन के शासन पर सीधा निशाना

सीपीआई ने चुनावी हार की जिम्मेदारी सीधे पिनाराई विजयन के काम करने के तरीके और उनकी शासन-शैली पर डाली है। किसी गठबंधन सहयोगी की ओर से यह असामान्य रूप से तीखा हमला माना जा रहा है। सीपीआई का तर्क है कि भविष्य में वापसी के लिए गठबंधन में सुधार और बेहतर तालमेल जरूरी है।

आगे क्या होगा

फिलहाल विपक्ष के उपनेता पद का मामला अनसुलझा है और दोनों दलों के बीच औपचारिक बैठक की प्रतीक्षा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो एलडीएफ को विपक्ष में प्रभावी भूमिका निभाने में कठिनाई होगी। यह संघर्ष केरल की वाम राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो केरल में वाम एकता की कहानी अगले चुनाव से पहले ही दरकने लगेगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलडीएफ में विपक्ष उपनेता पद को लेकर विवाद क्यों हो रहा है?
सीपीआई के राज्य सेक्रेटरी बिनॉय विश्वम ने सार्वजनिक रूप से माँग की कि विधानसभा में विपक्ष का डिप्टी लीडर पद सीपीआई को दिया जाए। इस खुली माँग से सीपीआई(एम) नाराज हो गई और एलडीएफ संयोजक ने इसे गठबंधन की बैठक में उठाने की बात कही।
सीपीआई ने चुनावी हार के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया है?
सीपीआई ने हार की जिम्मेदारी सीधे पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की शासन-शैली और काम करने के तरीके पर डाली है। यह किसी गठबंधन सहयोगी की ओर से असामान्य रूप से तीखा सार्वजनिक हमला माना जा रहा है।
एलडीएफ में सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच तनाव कब से है?
पिनाराई विजयन के एक दशक लंबे शासन के दौरान भी सीपीआई ने कम से कम दो बड़े मौकों पर दबाव बनाकर मुख्यमंत्री का रुख बदलवाया था। हालाँकि सीपीआई अधिकतर जूनियर सहयोगी की भूमिका में रही, लेकिन उसने सीपीआई(एम) के वर्चस्व को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।
इस विवाद का एलडीएफ की विपक्षी भूमिका पर क्या असर पड़ेगा?
विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह आंतरिक विवाद जल्द नहीं सुलझा तो एलडीएफ को विधानसभा में प्रभावी विपक्षी भूमिका निभाने में कठिनाई होगी। गठबंधन की एकजुटता के बिना सत्तारूढ़ दल पर दबाव बनाना मुश्किल होगा।
टी.पी. रामकृष्णन कौन हैं और इस विवाद में उनकी क्या भूमिका है?
टी.पी. रामकृष्णन एलडीएफ के संयोजक हैं। उन्होंने सीपीआई की सार्वजनिक माँग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे मामले मीडिया में नहीं, गठबंधन की आंतरिक बैठक में उठाए जाने चाहिए।
राष्ट्र प्रेस