क्या केरल में लेफ्ट पार्टियों के बीच तनाव बढ़ रहा है?

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क्या केरल में लेफ्ट पार्टियों के बीच तनाव बढ़ रहा है?

सारांश

पलक्कड़ में सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच बढ़ते तनाव ने राजनीतिक परिदृश्य को गंभीर बना दिया है। क्या यह झगड़ा वामपंथी एकजुटता को प्रभावित करेगा?

Key Takeaways

  • सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच तनाव बढ़ रहा है।
  • अजयकुमार ने सीपीआई पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
  • केरल विधानसभा चुनाव अप्रैल/मई में होने की संभावना है।
  • अंदरूनी विवाद लेफ्ट के एकजुटता को खतरे में डाल सकता है।
  • पलक्कड़ में राजनीतिक माहौल नाजुक है।

पलक्कड़, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल में भले ही सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार में सीपीआई दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है, लेकिन हाल के दिनों में दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच संबंध स्पष्ट रूप से तनावपूर्ण हो गए हैं।

जो नाराजगी पहले छिपी हुई थी, अब वह खुलकर सामने आने लगी है। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब सीपीआई(एम) के पलक्कड़ जिले के सचिवालय सदस्य एस. अजयकुमार ने मन्नूर, ओट्टापलम में एक सार्वजनिक सभा के दौरान सीपीआई पर तीखा हमला किया और उसकी कड़ी आलोचना की।

अजय कुमार ने सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव बिनॉय विश्वम पर 'चौथे दर्जे के राजनेता' जैसा आचरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने सीपीआई पर राजनीतिक अवसरवादिता का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी हार का ठीकरा आसानी से सीपीआई(एम) पर फोड़ दिया जाता है, जबकि जीत का श्रेय सीपीआई खुद ले लेती है।

पार्टी की चुनावी ताकत का मजाक उड़ाते हुए, उन्होंने कहा कि राज्य में सीपीआई को मुश्किल से पांच प्रतिशत वोट मिलते हैं और वह एक भी सीट जीतने की क्षमता नहीं रखती।

उन्होंने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य मंत्रियों की सीपीआई की आलोचना पर भी सवाल उठाया और पूछा कि क्या सीपीआई द्वारा संभाले जाने वाले विभाग आलोचना से परे थे?

यह नाराजगी कई घटनाओं के बाद सामने आई है जिसने सत्ताधारी गठबंधन को परेशान कर दिया है।

पहला बड़ा विवाद तब सामने आया जब केरल सरकार ने एलडीएफ या राज्य कैबिनेट में कोई चर्चा किए बिना पीएम-श्री स्कूल कार्यक्रम में शामिल होने का निर्णय लिया।

सीपीआई ने खुलकर आपत्ति जताई, सीपीआई (एम) पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया, और तब तक विरोध जारी रखा जब तक पिनाराई विजयन सरकार को इस योजना से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा। इस घटना ने गठबंधन के अंदर स्पष्ट रूप से दरार पैदा कर दी।

तब से, दोनों पार्टियों के बीच संबंध अस्थिर और नाजुक बने हुए हैं।

दिसंबर के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जहां एलडीएफ का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, जिससे अंदरूनी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए और सत्ताधारी गठबंधन के अंदर आपसी भाईचारे में कमी आई।

पलक्कड़, विशेषकर ओट्टापलम, लंबे समय से सीपीआई और सीपीआई(एम) की तीव्र प्रतिद्वंद्विता का गवाह रहा है। साथ ही अजय कुमार की टिप्पणियों को एक अलग घटना के बजाय गहरी बेचैनी की झलक के रूप में देखा जा रहा है।

बता दें कि अप्रैल/मई में केरल विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में मतभेदों का सार्वजनिक रूप से सामने आना वामपंथियों के एकजुटता और स्थिरता दिखाने के प्रयासों को जटिल बना सकता है।

Point of View

लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की एकता को चुनौती दे सकता है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए चिंता का विषय है।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच क्या विवाद है?
सीपीआई(एम) के एस. अजयकुमार ने सीपीआई पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे दोनों पार्टियों के बीच तनाव बढ़ गया है।
केरल में चुनाव कब होने हैं?
केरल विधानसभा चुनाव की संभावना अप्रैल/मई में है।
क्या इस विवाद का असर चुनाव पर पड़ेगा?
हां, बढ़ते तनाव का असर लेफ्ट की एकजुटता और चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
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