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बिहार में धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की मांग, विधानसभा में 18 विधायकों ने उठाया मुद्दा

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बिहार में धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की मांग, विधानसभा में 18 विधायकों ने उठाया मुद्दा

सारांश

बिहार के विधानसभा सत्र में धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। सत्ताधारी विधायकों ने अन्य राज्यों की तर्ज पर कानून की आवश्यकता पर बल दिया। क्या बिहार में भी इस पर ठोस कदम उठाए जाएंगे?

मुख्य बातें

धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की मांग उठी है।
18 विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया।
अन्य राज्यों की तर्ज पर कानून की आवश्यकता पर जोर।
जनसंख्या के स्वरूप में बदलाव को लेकर चिंता।
सरकार ने अभी कोई प्रस्ताव नहीं रखा है।

पटना, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग एक बार फिर उठी है। इस संदर्भ में बजट सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विधानसभा में सत्ताधारी दल के अनेक सदस्यों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया।

इस मुद्दे को उठाने वाले विधायकों में मैथिली ठाकुर, मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार, जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार, तार किशोर प्रसाद और बैद्यनाथ प्रसाद शामिल हैं। उन्होंने बिहार में भी धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने की आवश्यकता जताई, जैसा कि अन्य राज्यों में किया गया है।

विधायकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों ने धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून लागू किए हैं। इन कानूनों में धोखाधड़ी से धर्मांतरण, बाल विवाह या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामलों के लिए 1 से 10 वर्ष या कुछ विशेष मामलों में 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

सत्ताधारी विधायकों ने यह भी दावा किया कि बिहार के कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या का स्वरूप बदल गया है, जिससे कानूनी दखल की आवश्यकता है। उन्होंने सीमावर्ती जिलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है।

भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा, "उत्तर प्रदेश में सख्त कानून हैं और बिहार में भी ऐसा ही कानून बनना चाहिए। अकेले बक्सर में 1,000 दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है। इसलिए, इस धर्मांतरण विरोधी कानून की आवश्यकता है। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।"

कुछ विधायकों ने बिहार में बढ़ती जनसंख्या और चर्चों के निर्माण के आंकड़ों का हवाला दिया। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। कुछ सदस्यों ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण के लाभों पर भी सवाल उठाए और अपनी दलीलों में संवैधानिक नियमों का जिक्र किया।

पर्यटन और कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विधानसभा में जवाब देते हुए कहा कि बिहार सरकार के पास अभी धर्म परिवर्तन से संबंधित कोई कानून लाने का प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने सदन में कहा, "इस समय इससे संबंधित कोई कानून बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।"

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है और आवश्यकता पड़ने पर सरकार इस मामले की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आगे कोई चर्चा नहीं होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें धर्मांतरण को लेकर बढ़ती चिंताएं और विधायकों की सक्रियता शामिल है। यह मुद्दा न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में धर्मांतरण के खिलाफ कानून क्यों जरूरी है?
विधायकों का मानना है कि कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या का स्वरूप बदल गया है, जिससे कानूनी दखल की आवश्यकता है।
अन्य राज्यों में ऐसी कानूनों का क्या प्रभाव है?
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात ने इस तरह के कानून लागू किए हैं, जिसमें सजा का प्रावधान है।
क्या बिहार सरकार इस कानून पर विचार कर रही है?
वर्तमान में, बिहार सरकार के पास धर्म परिवर्तन से संबंधित कोई कानून लाने का प्रस्ताव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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