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बलराज साहनी जयंती: सूट-बूट में निर्देशक को ना भाए, 'धरती के लाल' दिखाकर जीते 'दो बीघा ज़मीन'

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बलराज साहनी जयंती: सूट-बूट में निर्देशक को ना भाए, 'धरती के लाल' दिखाकर जीते 'दो बीघा ज़मीन'

सारांश

बलराज साहनी की जयंती पर एक दिलचस्प प्रसंग: सूट-बूट में निर्देशक बिमल रॉय को रिजेक्ट कर दिया गया, लेकिन 'धरती के लाल' की फिल्म दिखाकर साहनी ने न केवल 'दो बीघा ज़मीन' जीता, बल्कि सिनेमा के इतिहास में अपनी जगह पक्की की।

मुख्य बातें

बलराज साहनी की जयंती 1 अप्रैल को मनाई जाती है।
'दो बीघा ज़मीन' की कास्टिंग में सूट-बूट पहनकर पहुंचने पर निर्देशक बिमल रॉय ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया।
साहनी ने 'धरती के लाल' फिल्म दिखाकर निर्देशक को अपनी क्षमता का प्रमाण दिया।
साहनी ने सामाजिक फिल्मों के साथ व्यावसायिक सिनेमा में भी सफलता पाई।
उनके अभिनय की विशेषता किरदार की आत्मा को समझना और जीना था।

मुंबई, 30 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। 1 अप्रैल को देश के महान अभिनेता बलराज साहनी की जयंती मनाई जाती है। आज़ादी के बाद के दौर में हिंदी सिनेमा में ऐसे कलाकार का उदय हुआ, जिन्होंने आम आदमी के संघर्ष, गरीबी और सामाजिक असमानता को न केवल परदे पर जीवंत किया, बल्कि दर्शकों के मन को झकझोर दिया। साहनी ने अपने अभिनय से सामाजिक सरोकार को एक नया आयाम दिया।

समाज और व्यावसायिकता का संतुलन

बलराज साहनी की विशेषता यह थी कि वे सामाजिक चेतना वाली फिल्मों के साथ-साथ व्यावसायिक सिनेमा में भी सफल रहे। उन्होंने 'धरती के लाल', 'दो बीघा ज़मीन', 'काबुलीवाला' और 'गर्म हवा' जैसी सामाजिक फिल्मों में गहराई से काम किया, जबीं 'अनुराधा', 'वक़्त', 'संघर्ष' और 'एक फूल दो माली' जैसी व्यावसायिक फिल्मों में भी अपनी पकड़ बनाई। गौरतलब है कि उनके अभिनय में हमेशा एक सच्चाई और आत्मीयता दिखाई देती थी।

सूट-बूट से रिजेक्शन का संकट

'दो बीघा ज़मीन' की कास्टिंग के दौरान एक दिलचस्प वाकया हुआ। निर्देशक बिमल रॉय एक गरीब रिक्शावाला शंभू महतो की भूमिका के लिए सही अभिनेता ढूंढ रहे थे। शुरुआत में इस किरदार के लिए अशोक कुमार, त्रिलोक कपूर और नाजिर हुसैन को संपर्क किया गया, लेकिन कोई भी उस समय उपलब्ध नहीं था। तब बिमल रॉय ने बलराज साहनी की फिल्म 'हम लोग' में उनके अभिनय को देखा और वे गहराई से प्रभावित हुए।

बलराज साहनी को भूमिका के लिए बुलाया गया। लेकिन जब वे सूट-बूट पहनकर निर्देशक के पास पहुंचे, तो बिमल रॉय को एक बड़ा झटका लगा। साहनी का सुंदर और तैयार-शुदा रूप-रंग उन्हें एक गरीब, पीड़ित रिक्शावाले के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं लगा। निर्देशक ने स्पष्ट कहा कि इस किरदार के लिए आप फिट नहीं बैठते।

अभिनय का आत्मविश्वास

लेकिन बलराज साहनी ने हार नहीं मानी। उन्होंने बिमल रॉय से 'धरती के लाल' फिल्म देखने के लिए कहा, जिसमें उन्होंने 'निरंजन' नामक एक दुःखी, बेबस और संघर्षरत बड़े बेटे की भूमिका निभाई थी। साहनी का तर्क था कि अगर वे उस फिल्म में एक गरीब, पीड़ित पात्र को जीवंत कर सकते हैं, तो 'दो बीघा ज़मीन' में भी ऐसा करने की क्षमता रखते हैं।

फिल्म देखने के बाद बिमल रॉय का विचार पूरी तरह बदल गया। साहनी के अभिनय की गहराई, उनकी भावनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक सरोकार को देखकर निर्देशक को अपनी गलतफहमी का एहसास हुआ। इसी तरह 'दो बीघा ज़मीन' की भूमिका बलराज साहनी के हाथ आई, जो बाद में सिनेमा का एक क्लासिक बन गई।

विरासत और प्रभाव

यह प्रसंग बलराज साहनी के अभिनय दर्शन को दर्शाता है। उनके लिए बाहरी सजावट या भौतिक उपस्थिति महत्वपूर्ण नहीं थी — महत्वपूर्ण था किरदार की आत्मा को समझना और उसे जीना। उनके इसी गुण के कारण वे हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में से एक बने रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही अभिनेता का बाहरी रूप उससे मेल न खाता हो। आज जब बॉलीवुड स्टार सिस्टम पर निर्भर है और ब्रांड वैल्यू किरदार को मात देती है, साहनी की यह विनम्रता और अभिनय के प्रति समर्पण एक सीखने योग्य पाठ है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलराज साहनी की जयंती कब मनाई जाती है?
बलराज साहनी की जयंती 1 अप्रैल को मनाई जाती है। वे आज़ादी के बाद हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक थे।
'दो बीघा ज़मीन' में बलराज साहनी को किस किरदार के लिए रिजेक्ट किया गया था?
बलराज साहनी को शंभू महतो नामक गरीब रिक्शावाले के किरदार के लिए चुना गया था, लेकिन सूट-बूट में उनकी हैंडसम सूरत देखकर निर्देशक बिमल रॉय को लगा कि वे इस किरदार के लिए फिट नहीं बैठते।
बलराज साहनी ने रिजेक्शन से कैसे बाहर निकले?
साहनी ने निर्देशक से 'धरती के लाल' फिल्म देखने के लिए कहा, जिसमें उन्होंने एक दुःखी, बेबस बड़े बेटे की भूमिका निभाई थी। फिल्म देखने के बाद बिमल रॉय का विचार बदल गया और साहनी को भूमिका मिल गई।
बलराज साहनी की किन फिल्मों को सामाजिक क्लासिक माना जाता है?
'धरती के लाल' , 'दो बीघा ज़मीन' , 'काबुलीवाला' और 'गर्म हवा' बलराज साहनी की सबसे प्रसिद्ध सामाजिक फिल्में हैं, जिनमें उन्होंने गरीबी, असमानता और मानवीय संघर्ष को दिखाया।
राष्ट्र प्रेस
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