धर्मेश्वर महादेव: मृत्यु के बाद यहां होती है कर्मों का हिसाब, यमराज की अदालत का रहस्य
सारांश
Key Takeaways
- धर्मेश्वर महादेव मंदिर में यमराज की अदालत लगती है।
- मंदिर में मटके के आकार का शिवलिंग है, जो यमराज का रूप है।
- जीते-जी दर्शन करने से कर्मों का हिसाब मिल सकता है।
- भाई-दूज पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
- ढाई पौड़ी में अकाल मृत्यु के शिकार लोगों का समय बीतता है।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। यह कहा जाता है कि मृत्यु के पश्चात प्रत्येक व्यक्ति को अपने किए गए कर्मों का हिसाब देना पड़ता है। जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर ही उन्हें अगला जन्म मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मृत्यु के बाद कर्मों का हिसाब-किताब कहां होता है?
उत्तराखंड में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का हिसाब देना पड़ता है। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति जीते-जी इस मंदिर के दर्शन कर लेता है, तो उसे कर्मों के हिसाब से मुक्ति मिलती है। हम बात कर रहे हैं धर्मेश्वर महादेव की।
धर्मेश्वर महादेव उत्तराखंड के चौरासी मंदिर परिसर में स्थित एक चमत्कारी मंदिर है। कहा जाता है कि यहां यमराज की अदालत लगती है, जहां मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा होता है। मंदिर के गर्भगृह में मटके के आकार का शिवलिंग है, जिसे यमराज का स्वरूप माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जो भी व्यक्ति मंदिर में जीते-जी दर्शन नहीं करता, उसे मृत्यु के बाद यहां आकर भगवान धर्मेश्वर महादेव का सामना करना पड़ता है। विशेषकर भाई-दूज पर मंदिर में भारी भीड़ होती है, जहां बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
भगवान शिव, जो यमराज के रूप में उपस्थित हैं, चित्रगुप्त की सहायता से मनुष्यों के कर्मों का लेखा रखते हैं। मंदिर के पीछे एक स्थान चित्रगुप्त के लिए निर्धारित है। वहां एक काली शिला और पट्टी दिखाई देती है, जिस पर पत्थर से लकीरें खींची गई हैं। यह संकेत देता है कि मनुष्य स्वर्ग जाएगा या नर्क।
इसके अलावा, मंदिर के निकट स्थित ढाई पौड़ी नामक स्थान है, जहां अकाल मृत्यु के शिकार लोग अपना समय बिताते हैं। जो भी भक्त मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं, उन्हें इन तीनों स्थानों का दर्शन करना आवश्यक होता है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, इस स्थल पर महाराज कृष्ण गिरि ने साधना की थी और इसे पवित्रस्थली बनाया था।