केरल CPI-M में दरार: विधानसभा हार के बाद विजयन के खिलाफ असंतोष, जयराजन ने संभाला मोर्चा
केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI-M] के भीतर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की दशकों पुरानी निर्विवाद पकड़ को अब पार्टी के अंदर से ही खुली चुनौती मिलने लगी है — और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पिछले तीन दशकों में ऐसा शायद पहली बार हो रहा है। 7 मई को यह असंतोष उस समय और गहरा गया, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता पी. जयराजन ने सोशल मीडिया पर अपनी चुप्पी तोड़ी।
चुनावी हार का संदर्भ
हाल के केरल विधानसभा चुनाव में CPI-M के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा — मोर्चा महज 35 सीटों तक सिमट गया, जिसे वामपंथ की केरल में अब तक की सबसे बुरी चुनावी हार बताया जा रहा है। इस हार के बाद विजयन और राज्य CPI-M सचिव एमवी गोविंदन दोनों को ही पार्टी के भीतर से अभूतपूर्व आलोचना झेलनी पड़ रही है।
जयराजन का दखल और फेसबुक पोस्ट
विधानसभा चुनाव में हार के कुछ ही दिनों बाद, जयराजन ने एक फेसबुक पोस्ट के ज़रिए पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर ऐसे अभियान बंद करें, जिनमें उनका (जयराजन का) महिमामंडन किया जा रहा हो और साथ ही पार्टी नेतृत्व के कुछ हिस्सों पर हमला हो रहा हो। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि कम्युनिस्ट सांगठनिक अनुशासन, कांग्रेस की उस संस्कृति से मौलिक रूप से अलग है जिसमें 'इंदिरा को बुलाओ, सोनिया को बुलाओ, कांग्रेस को बचाओ' जैसे नारे लगाए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतभेदों को पार्टी के आंतरिक मंचों पर उठाया जाए, न कि सोशल मीडिया पर।
कन्नूर में उठती आवाज़ें
लंबे समय से CPI-M का वैचारिक किला माने जाने वाले कन्नूर में ऐसे पोस्टर सामने आए हैं, जिनमें जयराजन की नेतृत्व में वापसी की माँग की गई है। एक प्रमुखता से प्रदर्शित नारे में लिखा था —