केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का हमला: मार्क्सवादी विचारधारा पुरानी, CPM के पास आर्थिक दृष्टि नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीएम नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की करारी हार के ठीक एक दिन बाद, केरल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार, 6 मई को सीपीएम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मार्क्सवादी विचारधारा अब पूरी तरह पुरानी हो चुकी है और वामपंथी गठबंधन के पास केरल के लिए कोई ठोस आर्थिक दृष्टिकोण नहीं था। तिरुवनंतपुरम में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में चंद्रशेखर ने यह भी बताया कि BJP ने इस चुनाव में 140 में से 3 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है।
सीपीएम की हार के कारण
चंद्रशेखर ने सीपीएम की पराजय को वैचारिक दिवालियेपन से जोड़ा। उन्होंने कहा, ''केरल में जो सीपीएम का हाल है, वही त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भी हुआ है। मार्क्सवादी विचारधारा अब पुरानी हो चुकी है और इसके पास आर्थिक विकास की कोई योजना नहीं है।'' उनके अनुसार, पिछले 10 वर्षों में केरल की जनता को केवल भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और मंदिरों के शोषण का सामना करना पड़ा, जिसके चलते मतदाताओं ने वामपंथी सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया।
वैश्विक संदर्भ में मार्क्सवाद की विफलता
BJP अध्यक्ष ने अपनी बात को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि मार्क्सवादी विचारधारा रोजगार पैदा करने में असफल रही है। उन्होंने तर्क दिया कि रूस, चीन और वियतनाम जैसे देश, जो शुरुआत में कट्टर मार्क्सवादी थे, अब मुक्त बाजार, पूंजीवाद, निजी निवेश और उद्यमिता को अपना चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वामपंथी दल देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक ज़मीन खो रहे हैं।
BJP का ऐतिहासिक प्रदर्शन
चंद्रशेखर ने बताया कि यह चुनाव BJP के लिए ऐतिहासिक रहा है क्योंकि पार्टी ने केरल में पहली बार 3 विधानसभा सीटें जीती हैं। पार्टी अध्यक्ष स्वयं नेमोम सीट से विजयी रहे। उन्होंने कहा, ''हमारे 3 विधायक विधानसभा में जाएंगे, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण हमारे कार्यकर्ता हैं जिन्होंने यह जीत संभव बनाई है। यह जीत हजारों कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है।''
यूडीएफ की बड़ी जीत और आगे की राजनीति
इस चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 102 सीटें जीतकर शानदार बहुमत हासिल किया। चंद्रशेखर ने माना कि राज्य में सीपीएम के खिलाफ मज़बूत एंटी-सीपीएम लहर थी, जिसका सबसे अधिक फायदा कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को मिला। गौरतलब है कि केरल में BJP की यह बढ़ती उपस्थिति पार्टी के लिए दक्षिण भारत में पैर जमाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP के तीन विधायक विधानसभा में विपक्ष की भूमिका कैसे निभाते हैं।