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केरल चुनाव: एलडीएफ की तीसरी बार जीत की उम्मीद, यूडीएफ ने कहा- बदलाव निश्चित है

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केरल चुनाव: एलडीएफ की तीसरी बार जीत की उम्मीद, यूडीएफ ने कहा- बदलाव निश्चित है

सारांश

केरल में मतदान प्रक्रिया के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सभी की निगाहें 4 मई पर हैं, जब चुनाव परिणाम सामने आएंगे। क्या एलडीएफ तीसरी बार सत्ता में लौटेगी या यूडीएफ को मिलेगा मौका? जानें पूरी रिपोर्ट।

मुख्य बातें

4 मई को चुनाव परिणाम आएंगे।
एलडीएफ तीसरी बार सत्ता में लौटने की उम्मीद कर रही है।
यूडीएफ परिवर्तन की मांग कर रहा है।
महिलाओं का मतदान प्रतिशत 80 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
राजनीतिक दलों की निगाहें बूथ स्तर के आंकड़ों पर हैं।

तिरुवनंतपुरम, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल में मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ आ गया है। चुनावी गतिविधियां खत्म हो चुकी हैं, लेकिन सभी की निगाहें 4 मई पर हैं, जब जनता अपना निर्णय सुनाएगी। भले ही मतदान के बाद राजनीतिक दलों के बीच सन्नाटा छा गया हो, लेकिन अंदरखाने में रणनीतियों का सिलसिला तेज हो गया है।

राज्य में सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कर रहे हैं, आत्मविश्वास से भरा हुआ है। पार्टी को उम्मीद है कि अपनी कार्यशैली और स्थिर प्रशासन के आधार पर वह लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटेगी।

वहीं, कांग्रेस की अगुवाई वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) भी अपनी स्थिति मजबूत करने में लगा है। विपक्ष का कहना है कि इस बार लोग बदलाव की ओर अग्रसर हैं और यह चुनाव सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह साबित हो सकता है।

इस चुनावी परिदृश्य में एक नया और रोचक पहलू भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के बयान से सामने आया है। उन्होंने कहा है कि इस बार केरल में एक त्रिशंकु विधानसभा बन सकती है, जिसमें उनकी पार्टी की भूमिका 'किंगमेकर' की हो सकती है। नेमोम सीट पर उनकी हाई-प्रोफाइल लड़ाई को इस चुनाव का प्रतीकात्मक मुकाबला माना जा रहा है।

गुरुवार रात तक राज्य में मतदान प्रतिशत 78.02 प्रतिशत दर्ज किया गया, और अंतिम आंकड़े अभी आना बाकी हैं। उम्मीद है कि यह आंकड़ा 80 प्रतिशत के करीब पहुंच सकता है। उल्लेखनीय है कि पिछली बार 1980 में ही मतदान 80 प्रतिशत के पार गया था।

राजनीतिक दल पुराने चुनावी रुझानों का भी सहारा ले रहे हैं। वामपंथी खेमे का मानना है कि ज्यादा मतदान उनके पक्ष में जाता है, जबकि यूडीएफ महिला मतदाताओं की भारी भागीदारी से उत्साहित है। इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

वर्तमान में राजनीतिक बयानबाजी कम हो गई है और रणनीतिकार अब बूथ स्तर के आंकड़ों में जुट गए हैं। हर सीट पर समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। भले ही मंच शांत लग रहा हो, लेकिन अंदर हलचल जारी है। सभी दलों की निगाहें 4 मई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि यूडीएफ परिवर्तन की उम्मीद जता रही है। यह चुनाव न केवल केरल के लिए, बल्कि देश के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे आगामी राजनीतिक परिदृश्य प्रभावित हो सकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल चुनाव का मतदान प्रतिशत क्या रहा?
गुरुवार रात तक राज्य में मतदान प्रतिशत 78.02 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
एलडीएफ के मुख्यमंत्री कौन हैं?
एलडीएफ के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन हैं।
यूडीएफ का क्या दावा है?
यूडीएफ का कहना है कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है।
नेमोम सीट की विशेषता क्या है?
नेमोम सीट पर भारतीय जनता पार्टी की हाई-प्रोफाइल लड़ाई को चुनाव का प्रतीकात्मक मुकाबला माना जा रहा है।
महिलाओं का मतदान प्रतिशत कितना हो सकता है?
इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत लगभग 80 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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