सीपीआई का विरोध: पिनाराई विजयन को केरल विपक्ष नेता बनाने पर गठबंधन में दरार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने 6 मई 2026 को खुले तौर पर यह स्पष्ट किया कि वह पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किए जाने के प्रस्ताव के विरुद्ध है। तिरुवनंतपुरम में हुई सीपीआई नेतृत्व की बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने तर्क दिया कि यह पद किसी नए चेहरे को सौंपा जाना चाहिए और वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की चुनावी पराजय के लिए विजयन की नेतृत्व शैली को आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।
चुनावी हार का संदर्भ
हालिया केरल विधानसभा चुनावों में एलडीएफ को करारी हार का सामना करना पड़ा। वामपंथी दलों को कुल मिलाकर केवल 35 सीटें हासिल हुईं — जिनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआईएम को 26 सीटें, सीपीआई को 8 सीटें और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को 1 सीट मिली। इसके विपरीत, कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने 102 सीटें जीतकर सत्ता में जोरदार वापसी की। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी 3 सीटें जीतकर केरल विधानसभा में पहली बार अपना खाता खोला।
विजयन की चुप्पी और अटकलें
इस व्यापक पराजय के बावजूद पिनाराई विजयन अब तक मौन हैं। उन्होंने न तो मीडिया से कोई बातचीत की है और न ही सोशल मीडिया पर कोई बयान जारी किया है। उनकी यह चुप्पी इस सवाल को और गहरा कर रही है कि क्या वे एक दशक तक मुख्यमंत्री रहने के बाद विपक्ष के नेता की भूमिका स्वीकार करने के इच्छुक हैं।
गठबंधन के भीतर दबाव और वैकल्पिक दावेदार
पूर्व वामपंथी विधायक सेबेस्टियन पॉल ने सार्वजनिक रूप से विजयन के कार्यकाल की आलोचना करते हुए उन्हें चुनावी हार का जिम्मेदार ठहराया। सीपीआई नेताओं ने संकेत दिया है कि जब तक विजयन स्वयं यह पद लेने से इनकार नहीं करते, किसी वैकल्पिक व्यवस्था की संभावना सीमित रहेगी। यदि विजयन पद स्वीकार नहीं करते, तो पूर्व वित्त मंत्री और सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता के.एन. बालागोपाल एक प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहे हैं।
सीपीआईएम का रुख और आत्मनिरीक्षण
वामपंथी खेमे के एक वर्ग का मानना है कि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास भारी बहुमत होने के कारण, केवल एक राजनीतिक रूप से अनुभवी और कुशल नेता ही सरकार को प्रभावी ढंग से चुनौती दे सकता है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार यह तर्क विजयन की दावेदारी को जीवित रखे हुए है। इस बीच सीपीआईएम के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने मीडिया से कहा कि पार्टी चुनावी हार के बाद सभी संगठनात्मक स्तरों पर गहन आत्मनिरीक्षण करेगी। सीपीआई राज्य सचिवालय की बैठक के बाद इस मुद्दे पर आधिकारिक निर्णय आने की उम्मीद है।