केरल चुनाव: क्या पिनाराई विजयन की जीत बनेगी उनकी राजनीतिक विरासत?
सारांश
Key Takeaways
- पिनाराई विजयन के नेतृत्व में सीपीआई(एम) का चुनावी प्रचार।
- स्थिरता और विकास का संदेश।
- महिलाओं की भागीदारी 81 प्रतिशत।
- कांग्रेस-नेतृत्व वाला यूडीएफ आत्मविश्वास से भरा।
- पार्टी की रणनीति में बदलाव।
तिरुवनंतपुरम, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल में चुनाव संपन्न हो चुका है और अब नतीजों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। राज्य की राजनीति में इस समय मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम सबसे प्रमुख है। 80 वर्षीय सीपीआई(एम) नेता लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने का प्रयास कर रहे हैं, जो राज्य के इतिहास में एक अद्वितीय उपलब्धि होगी।
पिनाराई विजयन की राजनीतिक शैली को सख्त और स्पष्ट माना जाता है, जो उन्हें कांग्रेस के नेताओं से अलग बनाती है। पूर्व मुख्यमंत्री के. करुणाकरण, ए. के. एंटनी और ओम्मन चांडी अपने सहज स्वभाव और लोगों से जुड़ाव के लिए जाने जाते थे।
सीपीआई(एम) में ई. के. नयनार अपनी हाजिरजवाबी और जनता के बीच लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे, जबकि वी. एस. अच्युतानंदन गंभीर छवि के होते हुए भी आम लोगों से मजबूत भावनात्मक जुड़ाव रखते थे।
इसके विपरीत, पिनाराई विजयन ने एक सख्त और मजबूत नेता की छवि बनाई है। मीडिया में उनके तीखे उत्तर, पार्टी और प्रशासन पर उनकी कड़ी पकड़ ने उनके इस व्यक्तित्व को और भी मजबूत किया है।
दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में सीपीआई(एम) को झटका मिलने के बाद, पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। इस साल की शुरुआत से ही सरकार ने बड़े पैमाने पर जनसंपर्क और विज्ञापन अभियान चलाया, जिसमें पिनाराई विजयन को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य स्थिरता, विकास और निरंतरता का संदेश देना था।
रिकॉर्ड मतदान के साथ, विशेष रूप से महिलाओं में 81 प्रतिशत भागीदारी के बीच, कांग्रेस-नेतृत्व वाला यूडीएफ 140 सदस्यीय विधानसभा में 100 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहा है। वहीं, वामपंथी नेतृत्व का कहना है कि सरकार के 10 वर्षों के कामकाज के लिए “शांत समर्थन” मौजूद है और वे सत्ता में वापसी की संभावना को लेकर आश्वस्त हैं।
हालांकि, कुछ वामपंथी नेता मानते हैं कि मुकाबला उम्मीद से कहीं अधिक कड़ा है, लेकिन उन्हें अब भी करीब 80 सीटें मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिनाराई विजयन पर चुनाव प्रचार में अत्यधिक निर्भरता पार्टी के लिए फायदेमंद और नुकसानदायक दोनों हो सकती है। कुछ का मानना है कि यदि के. के. शैलजा जैसे लोकप्रिय चेहरे को आगे लाया जाता, तो तीसरी बार सत्ता में वापसी संभवतः सरल होती।
जैसे-जैसे नतीजों का समय नजदीक आ रहा है, यह स्पष्ट है कि जीत पिनाराई विजयन की राजनीतिक विरासत को और मजबूत करेगी, जबकि हार उनकी रणनीति और नेतृत्व पर बड़े सवाल खड़े करेगी।
इस चुनाव में पिनाराई विजयन केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक पूर्ण जनादेश का प्रतीक बन गए हैं।