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केरल नतीजों से पहले कांग्रेस में सीएम पद की जंग, यूडीएफ खेमे में बड़ी दरार

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केरल नतीजों से पहले कांग्रेस में सीएम पद की जंग, यूडीएफ खेमे में बड़ी दरार

सारांश

केरल चुनाव नतीजों से पहले कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ में सीएम पद को लेकर रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के समर्थकों में खुली जंग छिड़ गई है। सहयोगी IUML ने भी नाराजगी जताई। 4 मई को नतीजे आने हैं।

मुख्य बातें

9 अप्रैल को केरल में मतदान संपन्न, नतीजे 4 मई 2026 को आएंगे।
कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ में रमेश चेन्निथला , वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के समर्थकों के बीच सीएम पद को लेकर खुली दावेदारी शुरू।
सहयोगी दल आईयूएमएल के विधायक पी.
अब्दुल हमीद ने कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मतदाताओं के लिए निराशाजनक बताया।
वरिष्ठ मीडिया विश्लेषक एमएन करास्सेरी ने इस खुली महत्वाकांक्षा को सार्वजनिक रूप से शर्मनाक करार दिया।
2001 में भी कांग्रेस में एके एंटनी बनाम के.
करुणाकरण गुट के बीच ऐसा ही टकराव हुआ था — इतिहास दोहराने का खतरा।
राहुल गांधी और पार्टी हाईकमान पर निगाहें, उनका फैसला ही यूडीएफ की एकजुटता तय करेगा।

तिरुवनंतपुरम, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) में मुख्यमंत्री पद को लेकर खुला संग्राम शुरू हो गया है। 9 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ और 4 मई को परिणाम घोषित होने हैं, लेकिन उससे पहले ही पार्टी के भीतर गुटबाजी सतह पर आ गई है, जिससे सहयोगी दल और जमीनी कार्यकर्ता दोनों असहज हो गए हैं।

कांग्रेस में सीएम पद की खुली दावेदारी

यूडीएफ खेमे में तीन वरिष्ठ नेताओं के समर्थक सार्वजनिक मंचों पर अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठा रहे हैं। रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल — तीनों के समर्थक खुलकर मैदान में उतर आए हैं।

यह स्थिति तब और भी विचित्र हो जाती है जब यह याद किया जाए कि 2021 में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने केरल की दशकों पुरानी सत्ता-परिवर्तन की परंपरा तोड़कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। उस हार से सबक लेने की बजाय कांग्रेस एक बार फिर आंतरिक कलह में उलझती दिख रही है।

मीडिया और सहयोगी दलों की तीखी प्रतिक्रिया

वरिष्ठ मीडिया विश्लेषक एमएन करास्सेरी ने इस घटनाक्रम को सार्वजनिक रूप से शर्मनाक करार दिया। उनका कहना है कि नतीजों से पहले इस तरह की खुली महत्वाकांक्षा मतदाताओं के भरोसे को गंभीर रूप से कमजोर कर सकती है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के विधायक पी. अब्दुल हमीद ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर इस तरह की बहस सार्वजनिक रूप से बिल्कुल नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यह विवाद उन मतदाताओं को निराश कर सकता है जिन्होंने यूडीएफ पर भरोसा जताया है।

अब्दुल हमीद ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि जो नेता इस तरह की चर्चाओं पर लगाम लगाने के लिए जिम्मेदार थे, वही इसे हवा दे रहे हैं। इससे उन जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट सकता है जो वर्षों से विपक्ष में रहकर पार्टी के लिए संघर्ष करते रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ: कांग्रेस की पुरानी आदत

यह पहली बार नहीं है जब केरल में जीत की उम्मीद के साथ कांग्रेस में नेतृत्व विवाद उभरा हो। 2001 में यूडीएफ की बड़ी जीत के बाद एके एंटनी के मुख्यमंत्री बनने पर के. करुणाकरण गुट के साथ तीखा टकराव हुआ था, जो केरल की राजनीति में एक दर्दनाक अध्याय बनकर रह गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस में यह प्रवृत्ति चुनावी जीत की संभावना बनते ही सक्रिय हो जाती है — जो पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करती है। जबकि दूसरी ओर वाम दल इस मुद्दे पर अनुशासित एकता का प्रदर्शन करते दिख रहे हैं।

हाईकमान पर टिकी निगाहें

अब्दुल हमीद ने भरोसा जताया कि पार्टी हाईकमान जो भी निर्णय लेगा, वह सभी को स्वीकार्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी केरल की राजनीतिक जमीन को गहराई से समझते हैं और वे सही फैसला करेंगे।

हालांकि, इस विवाद ने यूडीएफ की छवि को उस समय नुकसान पहुंचाया है जब पार्टी करीब एक दशक बाद सत्ता में वापसी की दहलीज पर खड़ी है। 4 मई के नतीजों के बाद यदि यूडीएफ को बहुमत मिलता है, तो कांग्रेस हाईकमान के सामने सीएम चेहरे के चयन की सबसे बड़ी परीक्षा होगी — और उस फैसले पर ही केरल में पार्टी का भविष्य टिका होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पार्टी की उस संरचनात्मक कमजोरी का आईना है जो हर जीत की संभावना के साथ उभरती है। विडंबना यह है कि जो दल 2021 में अनुशासनहीनता के कारण हारा, वह 2026 में भी उसी रास्ते पर चल रहा है। जबकि वाम मोर्चा एकजुटता का संदेश दे रहा है, कांग्रेस के नेता मतदाताओं के फैसले से पहले ही कुर्सी बांट रहे हैं — यह लोकतांत्रिक जवाबदेही का नहीं, बल्कि राजनीतिक अहंकार का प्रदर्शन है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार कौन हैं?
कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक रूप से कोई सीएम चेहरा घोषित नहीं किया है। रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल के समर्थक अपने-अपने नेता के लिए दावेदारी कर रहे हैं।
केरल चुनाव 2026 के नतीजे कब आएंगे?
केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित होने हैं। मतदान 9 अप्रैल को संपन्न हो चुका है।
IUML ने कांग्रेस की आलोचना क्यों की?
आईयूएमएल विधायक पी. अब्दुल हमीद ने कहा कि नतीजों से पहले सीएम पद की खुली बहस मतदाताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जो नेता इसे रोकने के लिए जिम्मेदार थे, वही इसे बढ़ावा दे रहे हैं।
केरल में यूडीएफ और एलडीएफ में से कौन जीतेगा?
यह 4 मई को नतीजों के बाद स्पष्ट होगा। यूडीएफ करीब एक दशक बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है, जबकि एलडीएफ ने 2021 में परंपरा तोड़कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी।
केरल कांग्रेस में गुटबाजी का इतिहास क्या है?
2001 में यूडीएफ की बड़ी जीत के बाद एके एंटनी के मुख्यमंत्री बनने पर के. करुणाकरण गुट के साथ बड़ा टकराव हुआ था। यह कांग्रेस की उस पुरानी प्रवृत्ति का हिस्सा है जो जीत की संभावना बनते ही सक्रिय हो जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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