सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार की जमानत याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार की जमानत याचिका खारिज

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 सिख दंगों के दोषी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी। 7 साल से अधिक जेल में रहने और पत्नी की बीमारी की दलील भी काम नहीं आई। अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल 2025 को 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी।
  • सज्जन कुमार पिछले 7 साल 4 महीने से जेल में बंद हैं और पत्नी की बीमारी का हवाला देकर जमानत मांगी थी।
  • अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2025 के लिए निर्धारित की है।
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने 2013 में निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटा था और दिल्ली कैंट व पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
  • एसआईटी ने फरवरी 2015 में जनकपुरी हिंसा के संबंध में सज्जन कुमार के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं।
  • 1984 के सिख विरोधी दंगों में देशभर में 3,000 से अधिक सिखों की जान गई थी और न्याय की यह लड़ाई चार दशकों से जारी है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी करार दिए गए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को जमानत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने यह फैसला सुनाते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2025 के लिए निर्धारित की है। यह निर्णय उन लाखों सिख परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद को जीवित रखता है जिन्होंने नवंबर 1984 की भयावह हिंसा में अपने प्रियजनों को खोया था।

कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

सज्जन कुमार की ओर से अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि वह पिछले 7 साल 4 महीने से जेल में बंद हैं। उनका कहना था कि उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं, जिसके चलते वह एक बार भी उनसे मिल नहीं पाए हैं।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन व्यक्तिगत आधारों को जमानत के लिए पर्याप्त नहीं माना और याचिका को फिलहाल खारिज करते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी।

सज्जन कुमार पर क्या-क्या आरोप हैं?

सज्जन कुमार पहले से ही 1984 दंगों के एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी क्षेत्र में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में दोषी ठहराया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2013 में निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया था। इसके अलावा जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें बरी किया था, लेकिन उस फैसले को भी चुनौती दी जा रही है।

एसआईटी जांच और दर्ज एफआईआर का विवरण

इस मामले के पुनः उजागर होने के बाद एसआईटी ने फरवरी 2015 में सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के विरुद्ध दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं।

पहली एफआईआर जनकपुरी में 1 नवंबर 1984 को सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी। दूसरी एफआईआर जनकपुरी में ही 2 नवंबर 1984 को सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाकर मार डालने की वारदात के लिए दर्ज की गई थी।

सज्जन कुमार का बयान और इनकार

7 जुलाई 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार ने अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने कहा था कि वह कभी भी 1984 के सिख विरोधी दंगों में शामिल नहीं थे और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।

उन्होंने जांच एजेंसी पर निष्पक्ष जांच न करने का आरोप भी लगाया था। हालांकि अदालतें अब तक उनके इस तर्क से सहमत नहीं हुई हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और न्याय की लंबी लड़ाई

गौरतलब है कि 1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे, जिनमें 3,000 से अधिक सिखों की जान गई थी। इस नरसंहार के लिए न्याय की मांग दशकों तक अनसुनी रही।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 1984 दंगा पीड़ित परिवार अभी भी न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं और हर सुनवाई उनके लिए एक नई उम्मीद लेकर आती है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख स्पष्ट करता है कि उच्चतम न्यायालय इस मामले में किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

अब सभी की निगाहें जुलाई 2025 में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Point of View

उस पार्टी ने पीड़ितों के प्रति कभी कोई ठोस जवाबदेही नहीं दिखाई। सुप्रीम कोर्ट का जमानत नामंजूर करना न केवल एक कानूनी फैसला है, बल्कि यह संदेश भी है कि राजनीतिक रसूख न्याय के रास्ते में हमेशा नहीं आ सकता। पीड़ित परिवारों के लिए यह आंशिक संतोष है, लेकिन असली न्याय तभी पूरा होगा जब सभी दोषियों को सजा मिले।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने सज्जन कुमार की जमानत क्यों खारिज की?
सुप्रीम कोर्ट ने 1984 सिख दंगों के दोषी सज्जन कुमार की जमानत याचिका को खारिज कर दिया क्योंकि अदालत ने उनके व्यक्तिगत आधारों को जमानत के लिए पर्याप्त नहीं माना। अगली सुनवाई जुलाई 2025 के लिए निर्धारित की गई है।
सज्जन कुमार को किस मामले में उम्रकैद की सजा मिली है?
दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी क्षेत्र में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह फैसला 2018 में आया था।
1984 सिख दंगों में सज्जन कुमार पर क्या-क्या आरोप हैं?
सज्जन कुमार पर जनकपुरी में 1 नवंबर 1984 को सरदार सोहन सिंह व उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या और 2 नवंबर 1984 को सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने के आरोप हैं। इन मामलों में एसआईटी ने फरवरी 2015 में एफआईआर दर्ज की थी।
1984 सिख दंगे कब और क्यों हुए थे?
1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद नवंबर 1984 में भड़के थे। इन दंगों में देशभर में 3,000 से अधिक सिखों की हत्या हुई थी, जिनमें दिल्ली सबसे अधिक प्रभावित रही थी।
सज्जन कुमार की अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने सज्जन कुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2025 के लिए तय की है। इस सुनवाई में मामले की आगे की दिशा तय होगी।
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