पंचायती राज दिवस पर गहलोत का बड़ा हमला: BJP पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप

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पंचायती राज दिवस पर गहलोत का बड़ा हमला: BJP पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप

सारांश

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर पूर्व CM अशोक गहलोत ने राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव न कराने पर BJP सरकार को घेरा। नागौर की ऐतिहासिक विरासत का हवाला देते हुए कहा — गांधी के ग्राम स्वराज का सपना खतरे में है। राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन ने सभी जिलों में प्रदर्शन किया।

Key Takeaways

  • 24 अप्रैल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर पूर्व CM अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
  • गहलोत ने कहा कि राजस्थान में पंचायत चुनाव न कराना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने के विरुद्ध है।
  • नागौर से पंडित नेहरू द्वारा लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की नींव रखी गई थी, जिसे गहलोत ने ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में उद्धृत किया।
  • राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन ने राजस्थान के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान और पदयात्राएं निकालीं।
  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पंचायतों को डिजिटल और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लेने की अपील की, लेकिन चुनाव की तारीख पर चुप्पी बनाए रखी।
  • यह मामला 73वें संविधान संशोधन के तहत अनिवार्य पंचायत चुनावों की संवैधानिक बाध्यता से भी जुड़ा है।

जयपुर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने में हो रही अनावश्यक देरी को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने के विरुद्ध है और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।

गहलोत ने राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत का किया उल्लेख

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "राष्ट्रीय पंचायतीराज दिवस पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।" उन्होंने राजस्थान की गौरवशाली परंपरा को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब राजस्थान, पंचायतीराज व्यवस्था में पूरे देश के लिए एक आदर्श उदाहरण था।

उन्होंने उल्लेख किया कि नागौर से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की ऐतिहासिक नींव रखी थी, जो आज भी भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ मानी जाती है। गौरतलब है कि 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में पंचायती राज व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत की गई थी, जो भारत में विकेंद्रीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर था।

BJP पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप

गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पंचायतीराज चुनाव न कराकर लोकतंत्र की इस महत्वपूर्ण कड़ी को जानबूझकर कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने ग्रामीण नागरिकों का विकास प्रक्रिया में भागीदारी का संवैधानिक अधिकार व्यावहारिक रूप से छीन लिया है।

यह विरोधाभास उल्लेखनीय है कि भाजपा एक ओर ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में पंचायत चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाले जा रहे हैं। बिना निर्वाचित प्रतिनिधियों के, ग्राम पंचायतें प्रशासनिक रूप से कमजोर हो जाती हैं और केंद्र व राज्य की योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाने में बाधा उत्पन्न होती है।

राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन का आंदोलन

गहलोत ने बताया कि राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन ने पंचायत एवं निकाय चुनावों की मांग को लेकर 24 अप्रैल को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, स्वराज संवाद, हस्ताक्षर अभियान और पदयात्राएं आयोजित कीं। उन्होंने नागरिकों से इस जन आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।

उन्होंने कहा, "हम सभी से अपील करते हैं कि वे आगे आएं और लोकतंत्र को मजबूत करें। यह सामूहिक आवाज, लोकतंत्र-विरोधी भाजपा सरकार को इन महत्वपूर्ण चुनावों को कराने के लिए विवश कर देगी।"

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी शुभकामनाएं

दूसरी ओर, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक्स पर लिखा, "समस्त प्रदेशवासियों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! आइए, इस अवसर पर हम अपनी पंचायतों को अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और डिजिटल बनाने का संकल्प लें, ताकि ग्रामीण भारत के विकास से स्वर्णिम राष्ट्र का निर्माण हो सके।"

हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान और चुनाव न कराने की वास्तविकता के बीच का अंतर विपक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में और गर्माने की संभावना है, खासकर तब जब राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन का आंदोलन जिला स्तर से आगे बढ़ने की तैयारी में है।

Point of View

73वें संशोधन के तहत, पंचायत चुनावों को अनिवार्य बनाता है, और देरी स्पष्ट रूप से लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध है। विडंबना यह है कि भजनलाल सरकार 'आत्मनिर्भर पंचायत' और 'डिजिटल ग्राम' की बात करती है, लेकिन जब तक निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं होंगे, ये नारे खोखले हैं। यह मुद्दा केवल राजस्थान तक सीमित नहीं — देश के कई राज्यों में पंचायत चुनावों में देरी एक राष्ट्रीय पैटर्न बनता जा रहा है, जिसे मुख्यधारा की मीडिया पर्याप्त गंभीरता से नहीं उठा रही।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस हर साल 24 अप्रैल को मनाया जाता है। इसी दिन 1993 में 73वां संविधान संशोधन लागू हुआ था, जिसने पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया।
गहलोत ने राजस्थान सरकार पर क्या आरोप लगाए?
पूर्व CM अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव न कराकर ग्रामीणों का लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिया है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने के विपरीत बताया।
राजस्थान में पंचायत चुनाव क्यों नहीं हो रहे?
राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में देरी का मुद्दा विवादास्पद है। विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है, जबकि सरकार की ओर से इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है।
राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन ने 24 अप्रैल को क्या किया?
राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन ने 24 अप्रैल को राजस्थान के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, स्वराज संवाद, हस्ताक्षर अभियान और पदयात्राएं आयोजित कीं। यह आंदोलन पंचायत एवं निकाय चुनावों की मांग को लेकर था।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पंचायती राज दिवस पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पंचायती राज दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और पंचायतों को सशक्त, आत्मनिर्भर और डिजिटल बनाने का संकल्प लेने की अपील की। हालांकि, उन्होंने लंबित चुनावों के बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं कही।
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