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सोपोर में PSA के तहत बड़ी कार्रवाई: 6 उपद्रवी गिरफ्तार, भद्रवाह जेल भेजे गए

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सोपोर में PSA के तहत बड़ी कार्रवाई: 6 उपद्रवी गिरफ्तार, भद्रवाह जेल भेजे गए

सारांश

सोपोर पुलिस ने छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और अशांति फैलाने में शामिल 6 उपद्रवियों पर PSA के तहत कार्रवाई की। सभी को जिला मजिस्ट्रेट के वारंट के बाद भद्रवाह जेल भेजा गया। पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई।

मुख्य बातें

सोपोर पुलिस ने 24 अप्रैल 2025 को 6 उपद्रवियों पर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत कार्रवाई की।
आरोपियों में उमर अकबर हाजम, सलमान अहमद, अल्ताफ अहमद शेख, मुबाशिर अहमद गिलकर, मुजम्मिल मुश्ताक चंगा और माजिद फिरदौस डार शामिल हैं।
सभी पर छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और अशांति फैलाने का आरोप है।
जिला मजिस्ट्रेट के वैध हिरासत वारंट के बाद सभी को जिला जेल भद्रवाह भेजा गया।
पुलिस ने अन्य संदिग्धों की पहचान जारी रखी है और जीरो टॉलरेंस नीति की पुनः पुष्टि की।
युवाओं और अभिभावकों को उकसावे से दूर रहने और रचनात्मक गतिविधियों में संलग्न रहने की सलाह दी गई।

सोपोर पुलिस की सख्त कार्रवाई

सोपोर (जम्मू-कश्मीर), 24 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वाले छह उपद्रवियों के खिलाफ सोपोर पुलिस ने 'सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम' (PSA) के तहत कड़ी कार्रवाई की है। ये सभी आरोपी हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान अशांति फैलाने, तोड़फोड़ करने और कानून-व्यवस्था को बाधित करने में सक्रिय रूप से संलिप्त पाए गए। जिला मजिस्ट्रेट से हिरासत वारंट प्राप्त करने के बाद सभी को जिला जेल भद्रवाह भेज दिया गया है।

आरोपियों की पहचान

पुलिस ने जिन छह व्यक्तियों पर PSA के तहत मामला दर्ज किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं — उमर अकबर हाजम, सलमान अहमद, अल्ताफ अहमद शेख, मुबाशिर अहमद गिलकर, मुजम्मिल मुश्ताक चंगा और माजिद फिरदौस डार

अधिकारियों के अनुसार, इन सभी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को हिंसक मोड़ देने की कोशिश की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इनकी गतिविधियों से क्षेत्र में सुरक्षा और शांति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।

PSA के तहत हिरासत की प्रक्रिया

सोपोर पुलिस ने स्पष्ट किया कि सभी आरोपियों को सक्षम प्राधिकारी यानी जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी विधिवत हिरासत वारंट के आधार पर PSA के तहत नजरबंद किया गया है। सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम जम्मू-कश्मीर में एक कठोर निवारक हिरासत कानून है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के अधिकतम दो वर्ष तक हिरासत में रखा जा सकता है।

गौरतलब है कि PSA का उपयोग आमतौर पर उन मामलों में किया जाता है जहां सामान्य आपराधिक प्रक्रिया से राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा पर्याप्त रूप से नहीं हो पाती। इस कानून की लंबे समय से मानवाधिकार संगठनों द्वारा आलोचना भी होती रही है।

पुलिस की चेतावनी और जीरो टॉलरेंस नीति

सोपोर पुलिस ने एक कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि जिले में शांति और स्थिरता को खतरे में डालने वाली किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति लागू रहेगी। इसके साथ ही, पुलिस ने यह भी बताया कि इन घटनाओं में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ भी शीघ्र कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने आम जनता, विशेष रूप से युवाओं को सलाह दी है कि वे असामाजिक तत्वों के उकसावे में न आएं। अभिभावकों और सामुदायिक नेताओं से भी आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन दें और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें।

व्यापक संदर्भ: कश्मीर में PSA का उपयोग

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से सुरक्षा बलों और पुलिस द्वारा PSA के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सोपोर, जो ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र रहा है, में इस तरह की कार्रवाइयां प्रशासन की उस रणनीति का हिस्सा हैं जिसका उद्देश्य किसी भी अशांति को प्रारंभिक चरण में ही नियंत्रित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र आंदोलनों में बाहरी तत्वों की घुसपैठ एक चिंताजनक प्रवृत्ति है, जिसे रोकने के लिए प्रशासन को सतर्क रहना आवश्यक है। हालांकि, नागरिक अधिकार संगठन यह भी सुनिश्चित करने की मांग करते हैं कि PSA का दुरुपयोग न हो और निर्दोष व्यक्ति इसकी जद में न आएं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन गिरफ्तारियों के बाद क्षेत्र में शांति बहाल होती है और क्या पुलिस शेष संदिग्धों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी त्वरित कार्रवाई करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि वह विरोध प्रदर्शन किस कारण से हुआ था। जवाबदेही और सुरक्षा के बीच संतुलन ही लोकतंत्र की असली कसौटी है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोपोर में PSA के तहत किन 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया?
सोपोर पुलिस ने उमर अकबर हाजम, सलमान अहमद, अल्ताफ अहमद शेख, मुबाशिर अहमद गिलकर, मुजम्मिल मुश्ताक चंगा और माजिद फिरदौस डार को PSA के तहत हिरासत में लिया। इन पर छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और अशांति फैलाने का आरोप है।
PSA यानी सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम क्या होता है?
PSA जम्मू-कश्मीर का एक कठोर निवारक हिरासत कानून है जिसके तहत बिना मुकदमे के किसी व्यक्ति को अधिकतम दो वर्ष तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब सामान्य कानूनी प्रक्रिया से सार्वजनिक सुरक्षा की रक्षा पर्याप्त न हो।
सोपोर में छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था?
सोपोर में हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और तोड़फोड़ करने की कोशिश की। इन गतिविधियों से सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ, जिसके बाद पुलिस ने PSA के तहत कार्रवाई की।
गिरफ्तार उपद्रवियों को किस जेल में भेजा गया है?
सभी छह आरोपियों को जिला मजिस्ट्रेट से वैध हिरासत वारंट प्राप्त करने के बाद जिला जेल भद्रवाह में भेजा गया है। यह कार्रवाई पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
क्या सोपोर में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
हां, सोपोर पुलिस ने पुष्टि की है कि उक्त घटनाओं में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ भी शीघ्र कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई है।
राष्ट्र प्रेस
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