नीति आयोग को मिली नई ताकत: डॉ. अशोक लाहिड़ी उपाध्यक्ष, डॉ. गोबर्धन दास सदस्य नियुक्त

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नीति आयोग को मिली नई ताकत: डॉ. अशोक लाहिड़ी उपाध्यक्ष, डॉ. गोबर्धन दास सदस्य नियुक्त

सारांश

नीति आयोग की पुनर्गठित टीम में दो प्रतिष्ठित बंगाली विद्वानों को जगह मिली है। वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. अशोक लाहिड़ी उपाध्यक्ष और वैज्ञानिक डॉ. गोबर्धन दास सदस्य बने हैं। डॉ. दास की जीवन-यात्रा — दंगों में 17 परिजनों की मौत, स्ट्रीट लाइट में पढ़ाई — किसी फिल्म से कम नहीं।

Key Takeaways

  • डॉ. अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो कोलकाता के वरिष्ठ अर्थशास्त्री हैं।
  • डॉ. गोबर्धन दास, आणविक वैज्ञानिक और IISER भोपाल के निदेशक, नीति आयोग के सदस्य मनोनीत हुए हैं।
  • डॉ. लाहिड़ी का चार दशकों से अधिक का करियर IMF, विश्व बैंक, ADB और वित्त आयोग में रहा है।
  • डॉ. दास बांग्लादेश से विस्थापित दलित शरणार्थी परिवार से हैं और उन्होंने दंगों में 17 परिजन खोए।
  • दोनों नियुक्तियाँ बंगाल से हैं, जो विद्वत्ता और राष्ट्र निर्माण में बंगाल की विरासत को रेखांकित करती हैं।
  • यह नियुक्ति प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 के एजेंडे को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल। नीति आयोग की पुनर्गठित टीम में दो प्रतिष्ठित बंगाली विद्वानों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. गोबर्धन दास को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। यह नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

डॉ. अशोक लाहिड़ी: चार दशकों का आर्थिक अनुभव

भारत के सर्वाधिक अनुभवी अर्थशास्त्रियों में गिने जाने वाले डॉ. अशोक लाहिड़ी का नीतिगत क्षेत्र में चार दशकों से अधिक का करियर रहा है। वे मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद पर कार्य कर चुके हैं और वित्त आयोग के सदस्य भी रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी वैश्विक संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं।

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय, कोलकाता के पूर्व छात्र डॉ. लाहिड़ी कोलकाता से हैं और बंगाल के आर्थिक विकास एवं प्रगति के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहे हैं। उनकी नियुक्ति से नीति आयोग को वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण और घरेलू नीति-निर्माण का एक दुर्लभ संयोजन प्राप्त होगा।

डॉ. गोबर्धन दास: संघर्ष से शिखर तक की प्रेरक यात्रा

नीति आयोग के नवनियुक्त सदस्य डॉ. गोबर्धन दास आणविक विज्ञान के एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रोफेसर हैं। लगभग तीन दशकों के वैज्ञानिक करियर में उन्होंने प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology), संक्रामक रोगों और कोशिका जीव विज्ञान (Cell Biology) में विशेषज्ञता अर्जित की है। तपेदिक (TB) के रोगजनन पर उनके शोध को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में विशेष सम्मान प्राप्त है।

डॉ. दास ने अमेरिका के येल विश्वविद्यालय, ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल, दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन में अत्याधुनिक शोध का नेतृत्व किया। इतनी वैश्विक उपलब्धियों के बावजूद उन्होंने मातृभूमि की सेवा के लिए स्वदेश लौटने का निर्णय लिया — एक ऐसा फैसला जो उन्हें लाखों युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणापुंज बनाता है।

विश्वभारती विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. दास ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएँ दीं और वर्तमान में IISER भोपाल के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।

बाधाओं को पार कर बनी असाधारण शख्सियत

डॉ. गोबर्धन दास की व्यक्तिगत जीवन-गाथा उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों से कहीं अधिक प्रेरक है। वे बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू दलित शरणार्थी परिवार में जन्मे थे, जिन्हें उत्पीड़न से बचने के लिए अपना सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा था। पश्चिम बंगाल में अत्यंत विकट परिस्थितियों में पले-बढ़े डॉ. दास के पिता एक गरीब किसान थे।

आर्थिक तंगी इतनी थी कि उन्हें स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करनी पड़ती थी। इससे भी बड़ा दर्द यह था कि पश्चिम बंगाल में हुए दंगों में उनके परिवार के 17 सदस्य काल-कवलित हो गए। इन तमाम त्रासदियों और संघर्षों के बावजूद उन्होंने न केवल विश्वस्तरीय वैज्ञानिक बनने का सफर तय किया, बल्कि देश की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था में स्थान भी पाया।

नीति आयोग और विकसित भारत का विजन

गौरतलब है कि नीति आयोग की स्थापना जनवरी 2015 में योजना आयोग के स्थान पर की गई थी। यह संस्था केंद्र और राज्य सरकारों को नीतिगत दिशा-निर्देश देती है और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की निगरानी करती है। डॉ. लाहिड़ी की आर्थिक विशेषज्ञता और डॉ. दास का वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिलकर नीति आयोग को एक बहुआयामी नेतृत्व प्रदान करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों नियुक्तियों से स्वास्थ्य नीति, वैज्ञानिक अनुसंधान, आर्थिक सुधार और सामाजिक न्याय के क्षेत्रों में नीति आयोग की भूमिका और अधिक प्रभावी होगी। आने वाले महीनों में नीति आयोग की नई टीम किन प्राथमिकताओं पर काम करती है, यह देश की नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक होगा।

Point of View

बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है — जहाँ अर्थशास्त्र और विज्ञान का संगम 'विकसित भारत' के एजेंडे को वैश्विक विश्वसनीयता देगा। उल्लेखनीय यह है कि दोनों नियुक्तियाँ बंगाल से हैं — एक ऐसे राज्य से जहाँ केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। डॉ. दास की कहानी — दलित शरणार्थी परिवार से IISER निदेशक तक — वह कथा है जिसे मुख्यधारा की मीडिया अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है, लेकिन यही कहानी असली भारत को दर्शाती है। सवाल यह है कि क्या नीति आयोग की यह नई टीम जमीनी नीतियों में वह बदलाव ला पाएगी जो करोड़ों वंचितों तक पहुँचे?
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

डॉ. अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष क्यों बनाया गया?
डॉ. अशोक लाहिड़ी को उनके चार दशकों के व्यापक आर्थिक अनुभव के कारण नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे IMF, विश्व बैंक, ADB और वित्त आयोग जैसी संस्थाओं में काम कर चुके हैं, जो उन्हें इस पद के लिए सर्वथा उपयुक्त बनाता है।
डॉ. गोबर्धन दास कौन हैं और उनकी विशेषज्ञता क्या है?
डॉ. गोबर्धन दास एक प्रख्यात आणविक वैज्ञानिक हैं जो वर्तमान में IISER भोपाल के निदेशक हैं। वे तपेदिक के रोगजनन, प्रतिरक्षा विज्ञान और संक्रामक रोगों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शोधकर्ता हैं।
डॉ. गोबर्धन दास का व्यक्तिगत संघर्ष क्या रहा है?
डॉ. दास बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू दलित शरणार्थी परिवार में जन्मे थे और पश्चिम बंगाल में अत्यंत गरीबी में पले-बढ़े। उन्होंने स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई की और पश्चिम बंगाल के दंगों में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खोया।
नीति आयोग में यह नियुक्ति किस संदर्भ में हुई है?
यह नियुक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' विजन को मजबूती देने के उद्देश्य से की गई है। नीति आयोग की पुनर्गठित टीम आर्थिक सुधार, वैज्ञानिक नवाचार और सामाजिक विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी।
डॉ. अशोक लाहिड़ी और डॉ. गोबर्धन दास की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है?
डॉ. लाहिड़ी दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं, जबकि डॉ. दास विश्वभारती विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। डॉ. दास ने येल विश्वविद्यालय और क्वाज़ुलु-नताल विश्वविद्यालय में भी शोध कार्य किया है।
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