आई. एम. विजयन: भारतीय फुटबॉल के 'ब्लैकबक', 12 सेकंड में गोल कर रचा था इतिहास

Click to start listening
आई. एम. विजयन: भारतीय फुटबॉल के 'ब्लैकबक', 12 सेकंड में गोल कर रचा था इतिहास

सारांश

केरल के त्रिशूर में जन्मे आई. एम. विजयन ने सोडा बेचने से लेकर भारतीय फुटबॉल टीम की कप्तानी तक का सफर तय किया। 12 सेकंड में गोल दागने वाले 'ब्लैकबक' को 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

Key Takeaways

  • आई. एम. विजयन का जन्म 25 अप्रैल 1969 को त्रिशूर, केरल में हुआ था और उनका पूरा नाम इनिवलाप्पिल मणि विजयन है।
  • 17 वर्ष की आयु में डीजीपी एम. के. जोसेफ ने उन्हें केरल पुलिस फुटबॉल टीम में शामिल कर उनके करियर की नींव रखी।
  • विजयन ने 72 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 29 गोल दागे और 2000 से 2004 तक भारतीय टीम की कप्तानी की।
  • 1999 सैफ कप में भूटान के विरुद्ध मात्र 12 सेकंड में गोल दागकर विश्व के सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय गोलों में नाम दर्ज कराया।
  • 2003 एफ्रो-एशियन गेम्स में 4 गोल दागकर शीर्ष स्कोरर बने और इसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लिया।
  • भारत सरकार ने उन्हें 2003 में अर्जुन पुरस्कार और 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय फुटबॉल के इतिहास में आई. एम. विजयन का नाम उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने न केवल मैदान पर बल्कि पूरे देश में इस खेल के प्रति एक नई चेतना जगाई। त्रिशूर, केरल में 25 अप्रैल 1969 को जन्मे विजयन ने गरीबी से उठकर भारतीय फुटबॉल का सबसे चमकदार चेहरा बनने तक का सफर तय किया। उनका पूरा नाम इनिवलाप्पिल मणि विजयन है और वे भारतीय टीम के कप्तान भी रह चुके हैं।

संघर्ष से शिखर तक का सफर

विजयन का बचपन आर्थिक तंगी के साये में बीता। परिवार की मदद के लिए उन्हें स्टेडियम में सोडा बेचने तक का काम करना पड़ा। लेकिन फुटबॉल के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उनकी प्रतिभा को पहचाना तत्कालीन डीजीपी एम. के. जोसेफ ने, जिन्होंने 17 वर्ष की आयु में उन्हें केरल पुलिस फुटबॉल टीम में शामिल किया।

यह वह मोड़ था जहाँ से विजयन के पेशेवर फुटबॉल करियर की नींव पड़ी। एक सोडा बेचने वाले बच्चे का यह रूपांतरण भारतीय खेल इतिहास की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है।

क्लब करियर और घरेलू फुटबॉल में दबदबा

क्लब फुटबॉल में विजयन ने केरल पुलिस फुटबॉल क्लब, मोहन बागान, जेसीटी मिल्स फगवाड़ा, एफसी कोचीन और ईस्ट बंगाल जैसे देश के शीर्ष क्लबों का प्रतिनिधित्व किया। अपने करियर के दौरान वे भारतीय क्लब फुटबॉल के सर्वाधिक कमाई करने वाले खिलाड़ियों में गिने जाते थे।

उनकी तेज़ रफ़्तार और गोल करने की अद्भुत क्षमता के कारण उन्हें 'ब्लैकबक' का उपनाम दिया गया — एक ऐसा नाम जो उनकी फुर्ती और शक्ति दोनों को परिभाषित करता है।

अंतरराष्ट्रीय करियर और ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

विजयन ने 1992 में भारतीय राष्ट्रीय टीम में पदार्पण किया और अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 72 मैचों में 29 गोल दागे। 2000 से 2004 तक उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी संभाली।

1999 के सैफ कप में भूटान के विरुद्ध उन्होंने मात्र 12 सेकंड में गोल दागकर विश्व के सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय गोलों में अपना नाम दर्ज कराया। यह उपलब्धि आज भी भारतीय फुटबॉल की सबसे गौरवशाली स्मृतियों में शामिल है।

2003 के एफ्रो-एशियन गेम्स में विजयन ने चार गोल दागकर शीर्ष स्कोरर का खिताब जीता। इसी वर्ष उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा की।

कप्तान के रूप में उनकी और बाइचुंग भूटिया की जोड़ी को भारतीय फुटबॉल की सबसे धारदार और आक्रामक जोड़ियों में माना जाता है। दोनों की केमिस्ट्री ने भारतीय फुटबॉल को एशियाई स्तर पर एक नई पहचान दिलाई।

सम्मान और राष्ट्रीय पहचान

फुटबॉल में उनके असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2003 में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से नवाज़ा। इसके बाद 2025 में उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी अलंकृत किया गया।

गौरतलब है कि विजयन उस दौर में खेले जब भारतीय फुटबॉल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर संघर्ष करना पड़ता था। ऐसे में उनकी उपलब्धियाँ और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। आज जब भारतीय फुटबॉल एआईएफएफ के नेतृत्व में नई ऊँचाइयाँ छूने की कोशिश कर रहा है, तब विजयन जैसे दिग्गजों की विरासत नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का काम करती है।

आने वाले समय में भारतीय फुटबॉल को उम्मीद है कि विजयन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन युवा प्रतिभाओं को तराशने में मदद करेगा और भारत एक बार फिर एशियाई फुटबॉल में अपनी धाक जमाएगा।

Point of View

बल्कि उस व्यवस्था की भी है जहाँ प्रतिभा को पहचानने के लिए एक पुलिस अधिकारी की नज़र की ज़रूरत पड़ी — न कि किसी संस्थागत खेल ढाँचे की। यह विडंबना है कि भारत में क्रिकेट के लिए करोड़ों की अकादमियाँ हैं, लेकिन विजयन जैसी प्रतिभाएँ आज भी संयोग से खोजी जाती हैं। 2025 में पद्मश्री मिलना उनके योगदान की देर से लेकिन सार्थक स्वीकृति है। असली सवाल यह है कि क्या भारतीय फुटबॉल का तंत्र अगला विजयन तैयार करने में सक्षम है?
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

आई. एम. विजयन कौन हैं और वे क्यों प्रसिद्ध हैं?
आई. एम. विजयन भारतीय फुटबॉल के महान स्ट्राइकर और पूर्व राष्ट्रीय कप्तान हैं। उन्होंने 72 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 29 गोल दागे और 1999 सैफ कप में 12 सेकंड में गोल दागकर इतिहास रचा।
विजयन को 'ब्लैकबक' क्यों कहा जाता था?
विजयन की असाधारण तेज़ रफ़्तार और मैदान पर फुर्ती के कारण उन्हें 'ब्लैकबक' उपनाम दिया गया था। यह नाम उनकी शक्ति और गति दोनों का प्रतीक बन गया।
आई. एम. विजयन को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
भारत सरकार ने विजयन को 2003 में अर्जुन पुरस्कार और 2025 में पद्मश्री से सम्मानित किया। ये दोनों पुरस्कार भारतीय खेल जगत के सर्वोच्च सम्मानों में गिने जाते हैं।
विजयन और बाइचुंग भूटिया की जोड़ी क्यों खास थी?
आई. एम. विजयन और बाइचुंग भूटिया की जोड़ी को भारतीय फुटबॉल इतिहास की सबसे आक्रामक और प्रभावशाली जोड़ियों में माना जाता है। दोनों ने मिलकर 2000 से 2004 के बीच भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाईं।
विजयन ने किन क्लबों के लिए फुटबॉल खेला?
विजयन ने अपने करियर में केरल पुलिस, मोहन बागान, जेसीटी मिल्स फगवाड़ा, एफसी कोचीन और ईस्ट बंगाल जैसे प्रमुख भारतीय क्लबों का प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय क्लब फुटबॉल के सर्वाधिक कमाई करने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे।
Nation Press