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बड़ा फैसला: धुबरी कांग्रेस ने निलंबन विवाद के बाद अनुशासनात्मक समिति में किया बड़ा बदलाव

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बड़ा फैसला: धुबरी कांग्रेस ने निलंबन विवाद के बाद अनुशासनात्मक समिति में किया बड़ा बदलाव

सारांश

धुबरी जिला कांग्रेस ने 45 सदस्यों के निलंबन के ठीक बाद 7 सदस्यीय नई अनुशासनात्मक समिति बनाई। हारुन-अल-रशीद अध्यक्ष बने। 4 मई मतगणना से पहले यह आंतरिक कलह पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर सवाल खड़े कर रही है।

मुख्य बातें

धुबरी जिला कांग्रेस कमेटी ने 23 अप्रैल 2026 को 7 सदस्यीय नई अनुशासनात्मक समिति का गठन किया।
हारुन-अल-रशीद को नई समिति का अध्यक्ष और रोसुल हक को संयोजक नियुक्त किया गया।
यह पुनर्गठन 45 कांग्रेस सदस्यों को छह साल के लिए निलंबित करने के कुछ ही दिनों बाद हुआ।
4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से पहले धुबरी में पार्टी की आंतरिक कलह चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
एपीसीसी ने मतगणना निगरानी के लिए 7 विशेष टीमें गठित की हैं जो ऊपरी असम, उत्तरी तट, बराक घाटी और बीटीआर क्षेत्रों में तैनात होंगी।
गौरव गोगोई और जितेंद्र सिंह की अगुवाई में एपीसीसी ने स्ट्रॉन्गरूम निगरानी और उम्मीदवार समन्वय की व्यापक व्यवस्था की है।

धुबरी, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। असम के धुबरी जिला कांग्रेस कमेटी ने 4 मई 2026 को प्रस्तावित मतगणना से महज कुछ दिन पहले अपनी अनुशासनात्मक समिति का पुनर्गठन कर दिया है। यह निर्णय उस वक्त आया जब पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 45 सदस्यों को छह वर्षों के लिए निलंबित किए जाने का विवाद अभी थमा भी नहीं था। इस दोहरे घटनाक्रम ने जिले में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को एक नए संकट की ओर धकेल दिया है।

नई अनुशासनात्मक समिति का गठन

23 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, सात सदस्यीय नई अनुशासनात्मक समिति का गठन किया गया है। हारुन-अल-रशीद को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कमाल हुसैन, अबेदुर रहमान, सहनूर इस्लाम, एसके सोफीकुल अहमद और नारायण देवनाथ को समिति का सदस्य बनाया गया है, जबकि रोसुल हक को संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह पुनर्गठन उस समय किया गया जब 45 कांग्रेस सदस्यों का सामूहिक निलंबन पहले से ही पार्टी के भीतर तीखे विरोध का कारण बना हुआ था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर निलंबन और उसके तुरंत बाद समिति का फेरबदल महज संयोग नहीं है — यह पार्टी नेतृत्व द्वारा अनुशासन की कमान अपने भरोसेमंद लोगों के हाथ में सौंपने की रणनीतिक कोशिश है।

आंतरिक कलह और चुनावी संभावनाओं पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि धुबरी में इस समय जो आंतरिक टकराव चल रहा है, वह मतगणना के नतीजों पर सीधा असर डाल सकता है। धुबरी जिले की कई विधानसभा सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत-हार इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी कार्यकर्ता पार्टी के साथ खड़े रहते हैं या नाराजगी में घर बैठ जाते हैं।

गौरतलब है कि 45 सदस्यों का एक साथ निलंबन असम कांग्रेस के हालिया इतिहास में एक असामान्य घटना है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या पार्टी नेतृत्व ने चुनाव से ठीक पहले इतना कठोर कदम उठाकर रणनीतिक भूल की है? विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव के बाद यदि पार्टी को नुकसान होता है, तो इस निर्णय की जवाबदेही तय करना मुश्किल होगा।

एपीसीसी की मतगणना निगरानी टीमें

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने राज्यभर में मतगणना की निगरानी के लिए सात विशेष टीमें गठित की हैं। एपीसीसी के महासचिव जितेंद्र सिंह और अध्यक्ष गौरव गोगोई के संयुक्त बयान के अनुसार, ये टीमें उन जिलों में तैनात होंगी जहां 9 अप्रैल को मतदान हुआ था।

प्रत्येक टीम को स्ट्रॉन्गरूम की निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा जांच, उम्मीदवारों से समन्वय और जिला कांग्रेस समितियों के साथ नियमित संवाद की जिम्मेदारी दी गई है।

क्षेत्रवार टीमों का विवरण

ऊपरी असम में देबब्रत सैकिया, राजू साहू, उत्पल गोगोई, राजकुमार नलातिरा नियोग, डेविड फुकन और मृत्युंजय दुवाराह की टीम तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों की निगरानी करेगी।

उत्तरी तट क्षेत्र की जिम्मेदारी रिपुन बोरा, घाना बुरहागोहेन, जे.पी. दास, शैलेन सोनोवाल, कार्तिक कुर्मी, शंकर कुतुम और मेघनाथ छेत्री को सौंपी गई है। इसी तरह निचले असम, बराक घाटी और बोडोलैंड क्षेत्रीय क्षेत्र (बीटीआर) के लिए भी अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं की टीमें तैनात की गई हैं।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब असम में कांग्रेस पहले से ही भाजपा के मजबूत संगठन से मुकाबले की कोशिश में जुटी है। 2021 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी लगातार संगठनात्मक पुनर्निर्माण की कोशिश कर रही है। ऐसे में धुबरी जैसे मुस्लिम बहुल जिले में — जहां कांग्रेस की पारंपरिक पकड़ रही है — इस तरह का आंतरिक विवाद पार्टी के लिए गंभीर चेतावनी है।

4 मई की मतगणना के नतीजे तय करेंगे कि धुबरी में यह आंतरिक उथल-पुथल कांग्रेस को कितनी महंगी पड़ी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजरें अब इस जिले पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ठीक उसी वक्त 45 सदस्यों का सामूहिक निलंबन किया गया — और फिर तुरंत समिति बदल दी गई। यह दर्शाता है कि नेतृत्व अनुशासन और लोकतंत्र के बीच संतुलन नहीं बना पा रहा। मुस्लिम बहुल धुबरी में कांग्रेस की पारंपरिक जड़ें हैं, लेकिन अगर नाराज कार्यकर्ता मतगणना के दिन सक्रिय नहीं रहे, तो नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धुबरी कांग्रेस ने नई अनुशासनात्मक समिति क्यों बनाई?
धुबरी जिला कांग्रेस कमेटी ने 45 सदस्यों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निलंबित करने के बाद 23 अप्रैल 2026 को नई 7 सदस्यीय अनुशासनात्मक समिति गठित की। यह कदम 4 मई की मतगणना से पहले पार्टी के भीतर अनुशासन बहाल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नई धुबरी कांग्रेस अनुशासनात्मक समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
हारुन-अल-रशीद को अध्यक्ष, रोसुल हक को संयोजक और कमाल हुसैन, अबेदुर रहमान, सहनूर इस्लाम, एसके सोफीकुल अहमद तथा नारायण देवनाथ को सदस्य बनाया गया है। यह घोषणा 23 अप्रैल 2026 के आधिकारिक आदेश में की गई।
असम कांग्रेस ने मतगणना के लिए कितनी टीमें बनाई हैं?
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) ने 4 मई 2026 की मतगणना की निगरानी के लिए सात विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें स्ट्रॉन्गरूम निरीक्षण, ईवीएम सुरक्षा जांच और उम्मीदवारों से समन्वय का काम करेंगी।
धुबरी में 45 कांग्रेस सदस्यों को क्यों निलंबित किया गया?
धुबरी जिला कांग्रेस कमेटी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 45 सदस्यों को छह वर्षों के लिए निलंबित किया। यह निलंबन 4 मई की मतगणना से ठीक पहले हुआ, जिससे पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल उठ रहे हैं।
असम में मतगणना कब होगी और कहां?
असम विधानसभा चुनावों की मतगणना 4 मई 2026 को होगी। 9 अप्रैल को हुए मतदान के बाद ईवीएम स्ट्रॉन्गरूम में सुरक्षित हैं और एपीसीसी ने विशेष निगरानी टीमें तैनात की हैं।
राष्ट्र प्रेस
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