एनआईए की बड़ी कार्रवाई: बडगाम में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आरोपी की 11.5 मरला संपत्ति जब्त

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एनआईए की बड़ी कार्रवाई: बडगाम में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आरोपी की 11.5 मरला संपत्ति जब्त

सारांश

एनआईए ने बडगाम के एसके बाग में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े तफाजुल हुसैन परिमू की 11.5 मरला संपत्ति जब्त की। डीएसपी दविंदर सिंह कनेक्शन वाले इस मामले में अक्टूबर 2020 से हिरासत में बंद आरोपी पर हथियार तस्करी और आतंकी फंडिंग के आरोप हैं। एनआईए आतंकी नेटवर्क की आर्थिक जड़ें काट रही है।

Key Takeaways

  • एनआईए ने बडगाम के एसके बाग में तफाजुल हुसैन परिमू की 11.5 मरला संपत्ति जब्त की।
  • तफाजुल हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हथियार तस्करी नेटवर्क का मुख्य आरोपी है और 12 अक्टूबर 2020 से हिरासत में है।
  • यह मामला डीएसपी दविंदर सिंह के उस प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें उन्हें 11 जनवरी 2020 को आतंकियों को ले जाते पकड़ा गया था।
  • 22 अप्रैल 2026 को एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद के आरोपी फैयाज अहमद मगरे की पुलवामा में संपत्तियां भी जब्त कीं।
  • 30 दिसंबर 2017 के लेथपोरा सीआरपीएफ हमले में 5 जवान शहीद और 3 घायल हुए थे।
  • एनआईए ने नवंबर 2025 और अप्रैल 2026 में दो चरणों में तफाजुल की संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया पूरी की।

श्रीनगर, 24 अप्रैल। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकी वित्तपोषण और हथियार तस्करी मामले की जांच के तहत जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के एसके बाग इलाके में एक प्रमुख आरोपी की अचल संपत्ति जब्त की है। यह संपत्ति हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी नेटवर्क से जुड़े तफाजुल हुसैन परिमू की बताई जा रही है, जो फिलहाल एनआईए की हिरासत में है। एजेंसी की यह कार्रवाई आतंकी संगठनों की आर्थिक जड़ें काटने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

जब्त संपत्ति और आरोपी का विवरण

एनआईए द्वारा जब्त की गई यह संपत्ति 11.5 मरला भूमि है, जो बडगाम के एसके बाग क्षेत्र में स्थित है। यह संपत्ति तफाजुल हुसैन परिमू के नाम पर दर्ज है। तफाजुल पर अवैध शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और अवैध गतिविधियों की कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।

एनआईए ने तफाजुल को 12 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया था। उसे हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हथियार तस्करी और आतंकी फंडिंग नेटवर्क का एक मुख्य सूत्रधार माना जाता है। उल्लेखनीय है कि एनआईए ने नवंबर 2025 और अप्रैल 2026 में दो चरणों में इस संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई पूरी की।

डीएसपी दविंदर सिंह कनेक्शन

तफाजुल हुसैन परिमू का नाम उस बहुचर्चित मामले से जुड़ा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के तत्कालीन उपाधीक्षक (डीएसपी) दविंदर सिंह को 11 जनवरी 2020 को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को अपनी गाड़ी में ले जाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। यह मामला देशभर में सुर्खियों में आया था क्योंकि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर आतंकियों की मदद करने का आरोप था।

तफाजुल को उसी प्रकरण की विस्तारित जांच के दौरान एनआईए ने संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया और बाद में गिरफ्तार किया। एनआईए के अनुसार, वह इस नेटवर्क में हथियारों की आपूर्ति और धन के प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

जैश-ए-मोहम्मद आरोपी की संपत्ति पर भी कार्रवाई

इससे पहले 22 अप्रैल को एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के एक आतंकी की अचल संपत्तियां जब्त की थीं। यह कार्रवाई 30 दिसंबर 2017 की रात लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ शिविर पर हुए फिदायीन हमले से संबंधित है, जिसमें पांच अर्धसैनिक जवान शहीद हो गए थे और तीन गंभीर रूप से घायल हुए थे।

जब्त संपत्तियों में पुलवामा जिले के अवंतीपोरा पुलिस थाना क्षेत्र के लेथपोरा में कई भूखंड और एक आवासीय परिसर शामिल हैं। ये संपत्तियां फैयाज अहमद मगरे की थीं, जिन्हें फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने अगस्त 2019 में उनके विरुद्ध आरपीसी और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।

उस हमले में तीन अज्ञात आतंकवादी अत्याधुनिक हथियारों, विस्फोटकों और गोला-बारूद से लैस होकर शिविर में जबरन घुस आए थे और जवाबी कार्रवाई में तीनों मारे गए थे।

एनआईए की रणनीति और व्यापक संदर्भ

एनआईए की यह कार्रवाई केवल एक संपत्ति जब्ती नहीं है — यह आतंकी संगठनों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की उस राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है जिसे केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लागू किया है। यूएपीए और पीएमएलए के प्रावधानों के तहत संपत्ति जब्ती को आतंकवाद-रोधी अभियानों में एक प्रभावी हथियार माना जा रहा है।

गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले (अप्रैल 2025) के बाद से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता कई गुना बढ़ गई है। ऐसे में एनआईए की यह दोहरी कार्रवाई — एक ही सप्ताह में दो अलग-अलग आतंकी मामलों में संपत्ति जब्ती — स्पष्ट संदेश देती है कि आतंकी नेटवर्क को किसी भी रूप में आर्थिक संसाधन जुटाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आने वाले दिनों में एनआईए द्वारा इसी मामले से जुड़े अन्य संदिग्धों की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Point of View

बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की बदलती रणनीति का प्रतीक है — जो अब बंदूक से नहीं, बैंक खाते और जमीन से आतंकियों को कमजोर करती है। डीएसपी दविंदर सिंह प्रकरण यह भी उजागर करता है कि आतंकी नेटवर्क सुरक्षा तंत्र के भीतर तक अपनी पैठ बना चुके थे — और इसीलिए ऐसे मामलों में संपत्ति जब्ती जैसी आर्थिक कार्रवाई और भी जरूरी हो जाती है। पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों की यह तेज सक्रियता दर्शाती है कि सरकार आतंकी इकोसिस्टम को उसकी जड़ से उखाड़ने के मूड में है। मुख्यधारा मीडिया जहां सिर्फ जब्ती की खबर देती है, असली सवाल यह है — क्या इन संपत्तियों की आय का स्रोत पूरी तरह उजागर हो पाएगा?
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

एनआईए ने बडगाम में किसकी संपत्ति जब्त की और क्यों?
एनआईए ने बडगाम के एसके बाग में तफाजुल हुसैन परिमू की 11.5 मरला संपत्ति जब्त की। तफाजुल हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हथियार तस्करी और आतंकी वित्तपोषण मामले में मुख्य आरोपी है और अक्टूबर 2020 से एनआईए हिरासत में है।
तफाजुल हुसैन परिमू का डीएसपी दविंदर सिंह से क्या संबंध है?
तफाजुल उस मामले में आरोपी है जिसमें डीएसपी दविंदर सिंह को 11 जनवरी 2020 को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को अपनी गाड़ी में ले जाते हुए पकड़ा गया था। एनआईए ने इसी मामले की विस्तारित जांच के तहत तफाजुल को गिरफ्तार किया था।
लेथपोरा सीआरपीएफ हमला क्या था और उससे जुड़ी संपत्ति जब्ती कब हुई?
30 दिसंबर 2017 की रात लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ शिविर पर तीन आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें पांच जवान शहीद हुए थे। 22 अप्रैल 2026 को एनआईए ने इस मामले के आरोपी फैयाज अहमद मगरे की पुलवामा में संपत्तियां जब्त कीं।
एनआईए आतंकियों की संपत्ति क्यों जब्त करती है?
एनआईए यूएपीए और अन्य कानूनों के तहत आतंकी गतिविधियों से अर्जित संपत्तियां जब्त करती है ताकि आतंकी नेटवर्क की आर्थिक आपूर्ति श्रृंखला तोड़ी जा सके। यह आतंकवाद-रोधी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फैयाज अहमद मगरे कौन है और उसे कब गिरफ्तार किया गया?
फैयाज अहमद मगरे पुलवामा के लेथपोरा का निवासी है और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 2017 के सीआरपीएफ हमले का आरोपी है। उसे फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था और अगस्त 2019 में एनआईए ने उस पर आरपीसी व यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया।
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