NIA का जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी के आतंकी फंडिंग नेटवर्क पर छापा, श्रीनगर-शोपियां में 3 ठिकाने खंगाले
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार, 25 मई को प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़े आतंकी वित्तपोषण मामले में जम्मू-कश्मीर के तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। श्रीनगर और शोपियां जिलों में चलाए गए इस अभियान में जांच एजेंसी ने कई आपत्तिजनक वित्तीय दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त किए हैं।
तलाशी में क्या मिला
बरामद किए गए दस्तावेज़ों और डिजिटल उपकरणों पर JeI तथा जम्मू-कश्मीर में उसके विभिन्न ट्रस्टों और संगठनों की गतिविधियों से संबंधित होने का संदेह है। एजेंसी के अनुसार इन साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। यह तलाशी अभियान गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम — UAPA के तहत दर्ज मामले के सिलसिले में चलाया गया।
जांच में सामने आया फंडिंग का तरीका
NIA की अब तक की जांच से पता चला है कि जमात-ए-इस्लामी स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी कल्याणकारी गतिविधियों के नाम पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन जुटाता था। जांचकर्ताओं के अनुसार यह धन वास्तव में हिंसक और अलगाववादी गतिविधियों में लगाया जाता था और संगठित नेटवर्क के ज़रिए हिज़बुल मुजाहिदीन (HM) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों तक पहुँचाया जाता था।
यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ घाटी में आतंकी वित्तपोषण के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। गौरतलब है कि JeI पर 2019 में प्रतिबंध लगाया गया था।
युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की साज़िश
जांच में यह भी सामने आया है कि संगठन कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर उन्हें नए सदस्य — जिन्हें 'रुकुन' कहा जाता है — के रूप में भर्ती करता था। इन युवाओं को अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए तैयार किया जाता था। अधिकारियों के अनुसार यह भर्ती प्रक्रिया सुनियोजित और संगठित थी।
आगे क्या होगा
NIA ने स्पष्ट किया है कि जमात-ए-इस्लामी की अलगाववादी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को नष्ट करने के लिए जांच जारी रहेगी। बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता।