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एनआईए की बड़ी कार्रवाई: बडगाम में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आरोपी की 11.5 मरला संपत्ति जब्त

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एनआईए की बड़ी कार्रवाई: बडगाम में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े आरोपी की 11.5 मरला संपत्ति जब्त

सारांश

एनआईए ने बडगाम के एसके बाग में हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े तफाजुल हुसैन परिमू की 11.5 मरला संपत्ति जब्त की। इससे पहले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी फैयाज अहमद मगरे की पुलवामा स्थित संपत्तियां भी जब्त हुईं। एनआईए आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क तोड़ने की मुहिम में जुटी है।

मुख्य बातें

एनआईए ने बडगाम के एसके बाग में आतंकी आरोपी तफाजुल हुसैन परिमू की 11.5 मरला संपत्ति जब्त की।
तफाजुल हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हथियार तस्करी मामले में मुख्य आरोपी है और 12 अक्टूबर 2020 से एनआईए हिरासत में है।
तफाजुल का नाम पूर्व डीएसपी दविंदर सिंह से जुड़ा है, जिन्हें 11 जनवरी 2020 को आतंकवादियों को ले जाते पकड़ा गया था।
22 अप्रैल को एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद के आरोपी फैयाज अहमद मगरे की पुलवामा स्थित संपत्तियां भी जब्त की थीं।
30 दिसंबर 2017 के लेथपोरा सीआरपीएफ हमले में 5 जवान शहीद और 3 घायल हुए थे।
एनआईए आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क को नष्ट करने के लिए दोनों मामलों में संपत्ति जब्ती की मुहिम जारी रखे हुए है।

एनआईए की बड़ी कार्रवाई: बडगाम में आतंकी संपत्ति जब्त

श्रीनगर, 24 अप्रैल: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकवाद से जुड़े वित्तपोषण मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के एसके बाग इलाके में 11.5 मरला की एक संपत्ति जब्त की है। यह संपत्ति हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी नेटवर्क से कथित रूप से जुड़े तफाजुल हुसैन परिमू की बताई जा रही है, जो अक्टूबर 2020 से एनआईए की हिरासत में है। एजेंसी ने यह कदम आतंकी गतिविधियों से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की अपनी व्यापक मुहिम के तहत उठाया है।

तफाजुल हुसैन परिमू: कौन है यह आरोपी?

तफाजुल हुसैन परिमू पर अवैध शराब निर्माण, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज हैं। एनआईए ने उसे हथियार तस्करी और आतंकी वित्तपोषण के एक बड़े मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल किया है।

तफाजुल का नाम जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीएसपी दविंदर सिंह से भी जुड़ा है। दविंदर सिंह को 11 जनवरी 2020 को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को वाहन में ले जाते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया था — यह घटना देशभर में सुर्खियां बनी थी। तफाजुल को उसी विस्तारित जांच के तहत 12 अक्टूबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था।

संपत्ति जब्ती का विवरण

एनआईए ने नवंबर 2025 में पहली बार और फिर अप्रैल 2026 में दोबारा बडगाम के एसके बाग में स्थित 11.5 मरला भूमि को जब्त करने की कार्रवाई की। यह संपत्ति आतंकवाद से अर्जित आय मानी जा रही है। एजेंसी आरोपी की अन्य संपत्तियों पर भी सक्रिय रूप से नजर बनाए हुए है।

जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी की भी संपत्ति जब्त

इससे पहले 22 अप्रैल को एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के एक आतंकी फैयाज अहमद मगरे की अचल संपत्तियां जब्त की थीं। यह कार्रवाई 30 दिसंबर 2017 की रात लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ शिविर पर हुए फिदायीन हमले से जुड़े मामले में की गई।

उस हमले में तीन सशस्त्र आतंकवादी अत्याधुनिक हथियारों, विस्फोटकों और गोला-बारूद के साथ शिविर में जबरन घुसे थे। इस हमले में पांच अर्धसैनिक जवान शहीद हुए थे और तीन गंभीर रूप से घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी मारे गए थे।

जब्त की गई संपत्तियों में पुलवामा जिले के अवंतीपोरा पुलिस थाना क्षेत्र के लेथपोरा में कई भूखंड और आवासीय परिसर शामिल हैं। फैयाज अहमद मगरे को फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था और एनआईए ने अगस्त 2019 में उस पर आरपीसी और यूए(पी) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

व्यापक संदर्भ: एनआईए की रणनीतिक मुहिम

एनआईए की यह कार्रवाई केवल एक व्यक्ति की संपत्ति जब्त करने तक सीमित नहीं है — यह उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत आतंकी संगठनों की वित्तीय नसें काटने की कोशिश की जा रही है। हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन दशकों से कश्मीर में सक्रिय हैं और इनके वित्तपोषण नेटवर्क को तोड़ना सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता रही है।

गौरतलब है कि दविंदर सिंह प्रकरण ने यह उजागर किया था कि आतंकी नेटवर्क केवल बाहरी तत्वों तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र के भीतर भी इनकी पैठ हो सकती है। ऐसे में एनआईए की संपत्ति जब्ती की मुहिम न केवल दंडात्मक है, बल्कि भविष्य के वित्तपोषण को रोकने का एक निवारक उपाय भी है।

आने वाले महीनों में एनआईए और अधिक आरोपियों की संपत्तियों पर शिकंजा कस सकती है, क्योंकि एजेंसी इन दोनों मामलों में सक्रिय जांच जारी रखे हुए है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस खतरनाक सच्चाई की याद दिलाती है जो दविंदर सिंह प्रकरण में सामने आई थी — कि आतंकी नेटवर्क कभी-कभी सुरक्षा तंत्र के भीतर से ही पोषित होते हैं। जब एक वर्दीधारी अधिकारी आतंकियों का वाहक बनता है, तो यह सवाल उठता है कि निगरानी तंत्र कहां चूका। एनआईए का संपत्ति जब्ती अभियान दंडात्मक तो है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये मामले अदालत में कितनी तेजी से निर्णय तक पहुंचते हैं — क्योंकि वर्षों तक लंबित मुकदमे न्याय की धार कुंद कर देते हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने बडगाम में किसकी संपत्ति जब्त की?
एनआईए ने बडगाम के एसके बाग में तफाजुल हुसैन परिमू की 11.5 मरला संपत्ति जब्त की। तफाजुल हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हथियार तस्करी और आतंकी वित्तपोषण मामले में मुख्य आरोपी है और अक्टूबर 2020 से हिरासत में है।
तफाजुल हुसैन परिमू का दविंदर सिंह से क्या संबंध है?
तफाजुल कथित तौर पर पूर्व डीएसपी दविंदर सिंह से जुड़ा था, जिन्हें 11 जनवरी 2020 को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को वाहन में ले जाते हुए गिरफ्तार किया गया था। उसी मामले की विस्तारित जांच में तफाजुल को गिरफ्तार किया गया था।
लेथपोरा सीआरपीएफ शिविर पर हमला कब हुआ था?
30 दिसंबर 2017 की रात तीन आतंकवादियों ने लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ शिविर पर हमला किया था। इसमें पांच जवान शहीद और तीन गंभीर रूप से घायल हुए थे, जबकि जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी मारे गए थे।
फैयाज अहमद मगरे कौन है और उसकी संपत्ति क्यों जब्त हुई?
फैयाज अहमद मगरे जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा आरोपी है जिसे फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने 22 अप्रैल को उसकी पुलवामा जिले के लेथपोरा स्थित संपत्तियां जब्त कीं, जिन्हें आतंकवाद से अर्जित आय माना जाता है।
एनआईए आतंकियों की संपत्ति क्यों जब्त करती है?
एनआईए आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क को तोड़ने के लिए संपत्तियां जब्त करती है। यह कार्रवाई यूएपीए और संबंधित कानूनों के तहत होती है, जिससे आतंकी संगठनों की आर्थिक नसें काटी जा सकें और भविष्य की गतिविधियों को रोका जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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