मीराबाई चानू का लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड, PM मोदी बोले — 'हर आंसू से गोल्ड टपक रहा था'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो का कुल भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता और इतिहास रच दिया — वे लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गईं। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर ग्लासगो से लौटे भारतीय खिलाड़ियों से विशेष मुलाकात की और चानू की भावुक जीत पर उन्हें बधाई दी।
पोडियम पर आंसू, पीएम का दिल छू लेने वाला बयान
ग्लासगो के पोडियम पर गोल्ड मेडल गले में पड़ते ही मीराबाई की आँखें भर आई थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे इसका कारण पूछा और कहा, 'इतने आंसू टपक रहे थे कि मुझे लगता है कि हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो।' यह पल मुलाकात का सबसे भावनात्मक क्षण बन गया।
मीराबाई ने प्रधानमंत्री को जवाब देते हुए कहा, 'मैं उस दिन बहुत खुश और भावुक थी। मैं गोल्ड मेडल जीतने के बाद इसलिए रोई थी, क्योंकि पेरिस ओलंपिक में मेरा मेडल सिर्फ एक किलो से रह गया था।'
चार साल की चुनौतियाँ और अटूट संघर्ष
मीराबाई ने अपनी भावनाओं को विस्तार से साझा करते हुए कहा, 'एक खिलाड़ी के तौर पर आपको बहुत चीजों का सामना करना पड़ता है। इन चार वर्षों में मैंने काफी कुछ झेला — हर समय इंजरी चल रही थी और परिवार में भी समस्याएँ थीं।' उन्होंने आगे कहा, 'जब पोडियम पर खड़ी थी और राष्ट्रगान बजा, तो देश का तिरंगा ऊपर देखकर खुद को रोक नहीं सकी।'
यह बयान उस दबाव की झलक देता है जो एक शीर्ष एथलीट हर ओलंपिक चक्र में वहन करता है। पेरिस ओलंपिक 2024 में मीराबाई मात्र एक किलो के अंतर से पदक से चूक गई थीं — वह निराशा इस बार के स्वर्ण की मिठास को और गहरा कर गई।
ऐतिहासिक उपलब्धि — विश्व में पहली
मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 (गोल्ड कोस्ट), 2022 (बर्मिंघम) और अब 2026 (ग्लासगो) में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीते। 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो का कुल भार उठाकर जीता यह गोल्ड उन्हें वेटलिफ्टिंग के इतिहास में एक अनूठे स्थान पर स्थापित करता है। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वे दुनिया की पहली वेटलिफ्टर हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का समग्र प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। देश ने कुल 39 पदक जीते — 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य। मीराबाई का गोल्ड इस शानदार पदक तालिका की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा।
आगे की राह — लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028
इस जीत के बाद मीराबाई की नज़रें अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 पर होंगी, जहाँ वे पेरिस की निराशा का हिसाब चुकाना चाहेंगी। प्रधानमंत्री मोदी की इस व्यक्तिगत मुलाकात ने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया और यह संदेश दिया कि देश अपने चैंपियनों के संघर्ष को पहचानता है।