मीराबाई चानू का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लगातार तीसरा स्वर्ण, बोलीं — 'सरकार सहयोग जारी रखे, और पदक लाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
भारोत्तोलन खिलाड़ी मीराबाई चानू ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 48 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार तीसरा स्वर्ण पदक था और इस आयोजन में भारत का पहला स्वर्ण भी। शानदार प्रदर्शन के बाद चानू स्वदेश लौट आई हैं।
चानू की स्वर्णिम वापसी
स्वदेश लौटने पर मीराबाई चानू ने कहा, "मैं बहुत उत्साहित हूँ कि मेरी कामयाबी को इतने अच्छे से पहचाना गया। मैं इसे ज़रूर स्वीकार करूंगी।" उन्होंने 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की भारत में संभावित मेज़बानी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनेगा।
सरकारी सहयोग पर चानू का संदेश
मीराबाई चानू ने भारतीय खेल संरचना में हो रहे बदलावों की सराहना की। उन्होंने कहा, "पूरे भारत की खेल संरचना में बहुत सारे बदलाव हुए हैं। सरकार खेल को बढ़ावा देने के लिए बहुत सहयोग दे रही है, जो खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ी बात है।" चानू ने आगे जोड़ा कि यदि सरकार हर खिलाड़ी को — चाहे वे युवा हों, पदक विजेता हों, या अभी तक पदक न जीते हों — सही ट्रेनिंग और विदेशी प्रशिक्षण की सुविधा देती रहे, तो भारत भविष्य में और भी अधिक पदक जीतेगा।
चोट और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती
एथलीट जीवन की कठिनाइयों पर बात करते हुए चानू ने कहा, "एक खिलाड़ी की ज़िंदगी में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। ज़्यादातर चोटें तब लगती हैं जब आप अपने पीक पर होते हैं या किसी बड़ी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे होते हैं।" उन्होंने कहा कि मज़बूत मानसिकता, कड़ी मेहनत, त्याग और अनुशासन ही एक खिलाड़ी को आगे ले जाते हैं।
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और भारत की उम्मीदें
चानू ने भारत में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की संभावित मेज़बानी को युवा पीढ़ी के लिए 'बहुत बड़ा अवसर' बताया। उनका मानना है कि घरेलू धरती पर बड़े आयोजन से न केवल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा, बल्कि देश में खेल संस्कृति को भी बल मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में अपनी उपस्थिति को लगातार मज़बूत कर रहा है।