मीराबाई चानू का लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड, भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का दिल्ली में भव्य स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद 2 अगस्त को स्वदेश वापसी की, जहाँ नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खिलाड़ियों का भव्य स्वागत हुआ। मीराबाई चानू ने ग्लासगो में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता — यह उनका लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड है।
हवाई अड्डे पर उमड़ा जनसैलाब
खिलाड़ियों के आगमन से पहले ही इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर प्रशंसकों की भारी भीड़ जुट गई थी। जैसे ही टीम के सदस्य बाहर निकले, उन्हें माला पहनाई गई और ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच उनका भव्य स्वागत किया गया। यह उत्सव भारतीय खेल प्रेमियों के उस जोश का प्रतीक था जो हर बड़ी जीत के बाद देखने को मिलता है।
मीराबाई चानू: तिहरे स्वर्ण की गौरवगाथा
पत्रकारों से बातचीत में मीराबाई चानू ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है कि मैं देश के लिए गोल्ड मेडल जीत सकी। यह पल मेरे लिए बेहद गर्व का है।' 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो का कुल भार उठाकर उन्होंने यह स्वर्ण पदक हासिल किया। गौरतलब है कि यह उनका लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड है — एक ऐसी उपलब्धि जो भारतीय भारोत्तोलन के इतिहास में दुर्लभ है।
लवप्रीत सिंह: एक किलो से चूका सोना, पर बढ़ा रंग
110 प्लस किलोग्राम वर्ग में 388 किलो भार उठाकर रजत पदक जीतने वाले लवप्रीत सिंह ने कहा कि वह इस बार के प्रदर्शन से बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा था, इसलिए पदक का रंग बदलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। लवप्रीत गोल्ड से महज एक किलोग्राम पीछे रह गए। भारतीय नौसेना में कार्यरत लवप्रीत ने अपने नौसेना कप्तान विजय कुमार और समस्त देशवासियों का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली प्रतियोगिता में वह स्वर्ण पदक लाने का पूरा प्रयास करेंगे।
ज्ञानेश्वरी और ऋषिकांत की भी चमकी किस्मत
53 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वालीं ज्ञानेश्वरी यादव ने कहा कि मेडल के साथ स्वदेश लौटना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है। उन्होंने 2030 में भारत में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने का संकल्प लिया। ऋषिकांत सिंह ने भी भारोत्तोलन में रजत पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया और स्वदेश लौटने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय भारोत्तोलन अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स भारत में आयोजित होने हैं, जो इस टीम के लिए घरेलू मैदान पर इतिहास रचने का सुनहरा अवसर होगा।