27 जुलाई 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मीराबाई चानू ने स्नैच में 85 किग्रा उठाकर भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: मीराबाई चानू ने स्नैच में 85 किग्रा उठाकर भारत को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

सारांश

मीराबाई चानू ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का पहला दिन भारत के नाम कर दिया — स्नैच में 85 किग्रा का नया रिकॉर्ड और 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण। उनका कहना है कि ध्यान रिकॉर्ड पर नहीं, एशियाई खेलों की तैयारी पर था। यह जीत सिर्फ पदक नहीं, संघर्ष और समर्पण की कहानी है।

मुख्य बातें

मीराबाई चानू ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता।
महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्नैच में 85 किलोग्राम भार उठाकर नया रिकॉर्ड बनाया।
चानू ने कहा कि उनका ध्यान रिकॉर्ड पर नहीं, बल्कि एशियाई खेलों से पहले प्रदर्शन सुधारने पर था।
48 किग्रा वर्ग भविष्य के कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं रहेगा, जिससे यह पदक और ऐतिहासिक हो जाता है।
पोडियम पर राष्ट्रगान के दौरान चानू की आँखों में आए आँसू खुशी और संघर्ष दोनों की अभिव्यक्ति थे।

भारोत्तोलन खिलाड़ी मीराबाई चानू ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इन खेलों में भारत का पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया। स्नैच में 85 किलोग्राम भार उठाकर उन्होंने इस वर्ग में नया रिकॉर्ड भी स्थापित किया।

मुख्य प्रदर्शन

मीराबाई ने 48 किग्रा वर्ग के स्नैच राउंड में 85 किलोग्राम भार उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाया। यह प्रदर्शन उनकी तकनीकी परिपक्वता और शारीरिक तैयारी दोनों का प्रमाण है। गौरतलब है कि 48 किग्रा वर्ग भविष्य के कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं रहेगा, जिससे यह पदक और भी विशेष बन जाता है।

चानू की प्रतिक्रिया

पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू ने कहा, "हर खिलाड़ी का सपना कॉमनवेल्थ गेम्स में जाने का रहता है। ये गेम्स हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं, ताकि हम देश के लिए कुछ करके दिखाएं। हर प्रतियोगिता में दबाव होता है, लेकिन हमें उसे संभालना होता है।"

उन्होंने आगे कहा, "मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और जो कुछ भी कर सकती थी, वह सब किया। मुझे खुशी है कि मैंने इन खेलों में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता है।"

रिकॉर्ड पर नहीं, प्रदर्शन पर था ध्यान

मीराबाई ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता रिकॉर्ड तोड़ना नहीं, बल्कि अपना सर्वश्रेष्ठ देना था। उन्होंने कहा, "मैं असल में कोई रिकॉर्ड तोड़ने के बारे में नहीं सोच रही थी क्योंकि 48 किलोग्राम वर्ग अब कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं रहेगी। मेरा ध्यान अपने प्रदर्शन पर था और यह समझने पर कि एशियाई खेलों से पहले मुझे किन सुधारों की जरूरत है।"

कोच के निर्देश पर 85 किग्रा का प्रयास करने के बारे में उन्होंने कहा, "मेरे कोच ने बोला कि ये करना है, तो मैंने बोला कि ठीक है मैं कर लूंगी, लेकिन रिकॉर्ड के लिए मैंने इतना नहीं सोचा था। यह खुशी की बात है कि रिकॉर्ड बना।"

भावुक हुईं चानू

पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान सुनते हुए मीराबाई की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा, "ट्रेनिंग के दौरान मुझे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें चोटें और कई मुश्किल दौर शामिल थे। पोडियम पर खड़े होकर मुझे वे सभी त्याग याद आ गए। जब हमारी मेहनत रंग लाती है और राष्ट्रगान बजता है, तो स्वाभाविक रूप से आंखों में आंसू आ जाते हैं। आज जो आंसू मेरी आंखों से निकले, वे खुशी के आंसू थे।"

आगे की राह

मीराबाई चानू की नज़र अब एशियाई खेलों पर है, जहाँ वे इस प्रदर्शन से मिले आत्मविश्वास को और धार देना चाहती हैं। ग्लासगो 2026 में यह स्वर्ण पदक भारत के पदक अभियान की शानदार शुरुआत है और देशभर के खेल प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एशियाई खेलों की तैयारी था — यह परिपक्वता दर्शाता है कि वे दीर्घकालिक प्रदर्शन को तात्कालिक सुर्खियों से ऊपर रखती हैं। 48 किग्रा वर्ग के कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर होने के बाद यह उनका इस मंच पर संभवतः अंतिम स्वर्ण है — जो इसे और भी ऐतिहासिक बनाता है। भारतीय भारोत्तोलन के लिए असली परीक्षा अब एशियाई खेलों में होगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?
मीराबाई चानू ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। यह इन खेलों में भारत का पहला गोल्ड मेडल था।
मीराबाई चानू ने स्नैच में कितना वजन उठाया?
मीराबाई चानू ने स्नैच में 85 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने बताया कि यह प्रयास उनके कोच के निर्देश पर किया गया था।
क्या 48 किग्रा वर्ग अगले कॉमनवेल्थ गेम्स में भी होगा?
नहीं, मीराबाई चानू ने खुद बताया कि 48 किलोग्राम वर्ग अब कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा नहीं रहेगा। इसीलिए उनका ध्यान रिकॉर्ड तोड़ने से अधिक अपने प्रदर्शन और एशियाई खेलों की तैयारी पर था।
मीराबाई चानू का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण जीतने के बाद मीराबाई चानू की नज़र एशियाई खेलों पर है। उन्होंने कहा कि ग्लासगो में उनका मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि एशियाई खेलों से पहले उन्हें किन सुधारों की जरूरत है।
मीराबाई चानू ने पोडियम पर रोने की वजह क्या बताई?
मीराबाई चानू ने कहा कि ट्रेनिंग के दौरान चोटों और कठिन दौर से गुजरने के बाद पोडियम पर खड़े होकर राष्ट्रगान सुनते समय वे सभी त्याग याद आ गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये खुशी के आँसू थे।
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