मीराबाई चानू ने CWG 2026 में गोल्ड की हैट्रिक लगाई, अब एशियन गेम्स 2026 का अधूरा सपना पूरा करने की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को ऐतिहासिक तोहफा दिया और इसी के साथ CWG में लगातार तीसरे गोल्ड की हैट्रिक भी पूरी की। जीत के कुछ ही घंटों बाद 31 वर्षीय इस मणिपुरी वेटलिफ्टर ने अपना ध्यान अगले बड़े लक्ष्य — एशियन गेम्स 2026 — की ओर मोड़ लिया, जो 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच जापान के आइची-नागोया में आयोजित होगा।
मुख्य प्रदर्शन: रिकॉर्ड-तोड़ वापसी
ग्लासगो में चानू का सफर आसान नहीं रहा। स्नैच में 82 किग्रा के पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने वजन उठाया और फिर 85 किग्रा तक बढ़ाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड स्थापित किया। क्लीन एंड जर्क में भी पहला प्रयास नाकाम रहा, लेकिन दूसरे प्रयास में 105 किग्रा उठाकर प्रतियोगिता समाप्त होने से पहले ही गोल्ड सुनिश्चित कर लिया।
CWG में चानू का सफरनामा
मणिपुर की इस बेटी ने 2014 में CWG में रजत पदक से अपना सफर शुरू किया था। इसके बाद 2018 और 2022 में लगातार दो स्वर्ण पदक जीते और अब 2026 में तीसरा गोल्ड जोड़कर कॉमनवेल्थ इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया। यह उपलब्धि भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए एक मील का पत्थर है।
एशियन गेम्स: अधूरा लक्ष्य
CWG में तिहरे स्वर्ण के बावजूद एशियन गेम्स अब तक चानू के लिए अजीत किला रहा है। हांग्जो एशियन गेम्स 2022 में उन्होंने महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में स्नैच में 83 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 108 किग्रा समेत कुल 191 किग्रा उठाया, लेकिन चौथे स्थान पर रहीं। क्लीन एंड जर्क के अंतिम प्रयास में 117 किग्रा उठाने की कोशिश के दौरान जांघ में चोट लग गई थी, जिसने उनकी दावेदारी कमज़ोर कर दी।
अब क्या है तैयारी
ग्लासगो में ही ट्रेनिंग जारी रखते हुए चानू ने संकेत दिया है कि वे इस बार एशियन गेम्स में पदक का खाता खोलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अधिकारियों के अनुसार, वे अभी पूरी तरह फिट हैं और CWG की जीत ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दी है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वेटलिफ्टिंग महाद्वीपीय स्तर पर अपनी पहचान और मज़बूत करना चाहती है।