23 जुलाई 2026
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मीराबाई चानू का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक का संकल्प: 'अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी'

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मीराबाई चानू का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक का संकल्प: 'अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी'

सारांश

तीन कॉमनवेल्थ पदक और एक ओलंपिक रजत — मीराबाई चानू ग्लासगो में फिर उतरी हैं, इस बार पेरिस की निराशा को पीछे छोड़ने और भारत की वेटलिफ्टिंग विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ। उनका एक ही संदेश है: 'मैं अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।'

मुख्य बातें

साइखोम मीराबाई चानू ने 23 जुलाई 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का संकल्प दोहराया।
उन्होंने ग्लासगो 2014 में रजत, गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में स्वर्ण पदक जीते हैं।
टोक्यो ओलंपिक 2020 में 49 किग्रा वर्ग में रजत जीतकर वेटलिफ्टिंग में भारत का 21 साल का ओलंपिक पदक का इंतजार खत्म किया था।
पेरिस 2024 ओलंपिक में चोट के कारण वह पदक से चूक गई थीं; ग्लासगो में वापसी का यह पहला बड़ा मौका है।
मीराबाई ने इस संस्करण में वेटलिफ्टिंग में एथलीटों की कम संख्या पर चिंता जताई, इसे खेल के लिए अच्छा नहीं बताया।

ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने स्पष्ट किया है कि वह देशवासियों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने के लिए तैयार हैं। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता ने कहा कि पूरी वेटलिफ्टिंग टीम कड़ी मेहनत कर रही है और वह व्यक्तिगत रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ देने का इरादा रखती हैं। यह बयान 23 जुलाई 2026 को ग्लासगो में दिया गया।

मीराबाई का संकल्प और टीम की तैयारी

मीराबाई ने कहा, "इस बार वेटलिफ्टिंग में ज़्यादा पदक आने की उम्मीदें हैं। हम सभी बहुत कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमारी टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हम पदक जीतेंगे या नहीं, यह तो इवेंट वाले दिन ही पता चलेगा, लेकिन हम अपनी पूरी कोशिश करेंगे। हम अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। मैं भी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीम की संख्या भले ही कम हो, लेकिन हर एथलीट का जज़्बा पूरा है।

एथलीटों की कम संख्या पर चिंता

मीराबाई ने इस संस्करण में वेटलिफ्टिंग में भाग लेने वाले एथलीटों की कम तादाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "इस बार अलग-अलग जगहों से इतने सारे प्रतिभागियों को देख बहुत अच्छा लग रहा है। एक बुरी बात यह है कि एथलीटों की संख्या कम है। यह खेल के लिए अच्छा नहीं है।" हालाँकि उन्होंने भरोसा जताया कि जो भी एथलीट आए हैं, वे अपने देश के लिए पूरी ताकत से उतरेंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई का शानदार इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स मीराबाई के करियर का सबसे सफल मल्टी-स्पोर्ट मंच रहा है। उन्होंने ग्लासगो 2014 में अपने कॉमनवेल्थ डेब्यू पर रजत पदक जीता था। इसके बाद गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 — दोनों संस्करणों में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस अनूठी उपलब्धि ने उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत की सबसे सफल वेटलिफ्टरों में से एक बना दिया।

पेरिस ओलंपिक की निराशा और वापसी की राह

पेरिस 2024 ओलंपिक में महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में मीराबाई बहुत कम अंतर से पदक से चूक गई थीं। उस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया, "ओलंपिक की तैयारी के दौरान, मैं भारी ट्रेनिंग का बोझ नहीं झेल पा रही थी। जब भी मैं ट्रेनिंग का लोड बढ़ाती, तो दर्द की वजह से मुझे ट्रेनिंग रोकनी पड़ती थी। मेरी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी, इसलिए मैं अपना पूरा जोर नहीं लगा पा रही थी। नतीजतन, मैंने अपनी योजना से बहुत कम ट्रेनिंग किया और शायद इसीलिए मैं वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई।" यह ऐसे समय में आया है जब मीराबाई ग्लासगो में अपने करियर को नई ऊँचाई देने के लिए उतरने वाली हैं।

ऐतिहासिक उपलब्धि और प्रेरणा का सफर

गौरतलब है कि मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक का भारत का 21 साल का इंतजार समाप्त किया था। इस उपलब्धि ने उन्हें देश की महानतम वेटलिफ्टरों में स्थान दिलाया और लाखों युवा एथलीटों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना दिया। ग्लासगो में एक बार फिर उनकी नज़र उसी चमक को दोहराने पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो वह खोखला आश्वासन नहीं, बल्कि सिद्ध इतिहास से उपजा आत्मविश्वास है। लेकिन एथलीटों की घटती संख्या पर उनकी चिंता उस बड़े सवाल की ओर इशारा करती है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है — क्या कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग की भागीदारी और प्रासंगिकता घट रही है? भारत के लिए पदक की उम्मीद बरकरार है, पर खेल के भविष्य पर बहस ज़रूरी है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीराबाई चानू कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्या लक्ष्य लेकर उतर रही हैं?
मीराबाई चानू ने स्पष्ट किया है कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन देने और देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पूरी वेटलिफ्टिंग टीम कड़ी मेहनत कर रही है और पदक जीतने की कोशिश करेगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का अब तक का रिकॉर्ड कैसा रहा है?
मीराबाई ने ग्लासगो 2014 में रजत पदक, गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 में स्वर्ण पदक जीते हैं। यह उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत की सबसे सफल वेटलिफ्टरों में से एक बनाता है।
पेरिस ओलंपिक 2024 में मीराबाई चानू क्यों पदक नहीं जीत पाईं?
मीराबाई ने खुद बताया कि पेरिस ओलंपिक की तैयारी के दौरान चोट पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी, जिससे वह ट्रेनिंग का पूरा बोझ नहीं उठा पाईं। इस कारण उन्होंने योजना से बहुत कम ट्रेनिंग की और महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में बहुत कम अंतर से पदक चूक गईं।
टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू की उपलब्धि क्या थी?
मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक का भारत का 21 साल का इंतजार समाप्त किया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने उन्हें देश की महानतम वेटलिफ्टरों में स्थान दिलाया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग को लेकर मीराबाई ने क्या चिंता जताई?
मीराबाई ने इस संस्करण में वेटलिफ्टिंग में भाग लेने वाले एथलीटों की कम संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह खेल के लिए अच्छा नहीं है, हालाँकि उन्होंने भरोसा जताया कि जो एथलीट आए हैं वे अपने देश के लिए पूरी ताकत से प्रदर्शन करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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