मीराबाई चानू का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक का संकल्प: 'अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी'
सारांश
मुख्य बातें
ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारत की दिग्गज वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने स्पष्ट किया है कि वह देशवासियों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरने के लिए तैयार हैं। टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता ने कहा कि पूरी वेटलिफ्टिंग टीम कड़ी मेहनत कर रही है और वह व्यक्तिगत रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ देने का इरादा रखती हैं। यह बयान 23 जुलाई 2026 को ग्लासगो में दिया गया।
मीराबाई का संकल्प और टीम की तैयारी
मीराबाई ने कहा, "इस बार वेटलिफ्टिंग में ज़्यादा पदक आने की उम्मीदें हैं। हम सभी बहुत कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमारी टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हम पदक जीतेंगे या नहीं, यह तो इवेंट वाले दिन ही पता चलेगा, लेकिन हम अपनी पूरी कोशिश करेंगे। हम अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। मैं भी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि टीम की संख्या भले ही कम हो, लेकिन हर एथलीट का जज़्बा पूरा है।
एथलीटों की कम संख्या पर चिंता
मीराबाई ने इस संस्करण में वेटलिफ्टिंग में भाग लेने वाले एथलीटों की कम तादाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "इस बार अलग-अलग जगहों से इतने सारे प्रतिभागियों को देख बहुत अच्छा लग रहा है। एक बुरी बात यह है कि एथलीटों की संख्या कम है। यह खेल के लिए अच्छा नहीं है।" हालाँकि उन्होंने भरोसा जताया कि जो भी एथलीट आए हैं, वे अपने देश के लिए पूरी ताकत से उतरेंगे।
कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई का शानदार इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स मीराबाई के करियर का सबसे सफल मल्टी-स्पोर्ट मंच रहा है। उन्होंने ग्लासगो 2014 में अपने कॉमनवेल्थ डेब्यू पर रजत पदक जीता था। इसके बाद गोल्ड कोस्ट 2018 और बर्मिंघम 2022 — दोनों संस्करणों में उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस अनूठी उपलब्धि ने उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत की सबसे सफल वेटलिफ्टरों में से एक बना दिया।
पेरिस ओलंपिक की निराशा और वापसी की राह
पेरिस 2024 ओलंपिक में महिलाओं के 49 किग्रा वर्ग में मीराबाई बहुत कम अंतर से पदक से चूक गई थीं। उस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया, "ओलंपिक की तैयारी के दौरान, मैं भारी ट्रेनिंग का बोझ नहीं झेल पा रही थी। जब भी मैं ट्रेनिंग का लोड बढ़ाती, तो दर्द की वजह से मुझे ट्रेनिंग रोकनी पड़ती थी। मेरी चोट पूरी तरह ठीक नहीं हुई थी, इसलिए मैं अपना पूरा जोर नहीं लगा पा रही थी। नतीजतन, मैंने अपनी योजना से बहुत कम ट्रेनिंग किया और शायद इसीलिए मैं वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई।" यह ऐसे समय में आया है जब मीराबाई ग्लासगो में अपने करियर को नई ऊँचाई देने के लिए उतरने वाली हैं।
ऐतिहासिक उपलब्धि और प्रेरणा का सफर
गौरतलब है कि मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में 49 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक का भारत का 21 साल का इंतजार समाप्त किया था। इस उपलब्धि ने उन्हें देश की महानतम वेटलिफ्टरों में स्थान दिलाया और लाखों युवा एथलीटों के लिए एक प्रेरणास्रोत बना दिया। ग्लासगो में एक बार फिर उनकी नज़र उसी चमक को दोहराने पर है।