16 सितंबर 2026
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मध्य प्रदेश: गवर्नर मंगूभाई पटेल ने स्कूलों में सिकल सेल स्क्रीनिंग के दिए निर्देश, 1.34 करोड़ की जाँच पूरी

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मध्य प्रदेश: गवर्नर मंगूभाई पटेल ने स्कूलों में सिकल सेल स्क्रीनिंग के दिए निर्देश, 1.34 करोड़ की जाँच पूरी

सारांश

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने सिकल सेल उन्मूलन मिशन की समीक्षा बैठक में प्राइमरी स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों की स्क्रीनिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। राज्य में 1.34 करोड़ की जाँच पूरी; 92% को जेनेटिक स्टेटस कार्ड जारी।

मुख्य बातें

राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने 16 सितंबर 2026 को प्राइमरी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में सिकल सेल स्क्रीनिंग शिविर लगाने के निर्देश दिए।
मध्य प्रदेश में अब तक 1.34 करोड़ लोगों की सिकल सेल बीमारी के लिए स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
स्क्रीनिंग किए गए 92 प्रतिशत लोगों को जेनेटिक स्टेटस कार्ड जारी किए गए हैं।
जागरूकता अभियान के तहत 4,825 'सिकल मित्र' तैयार; संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के अनुसार राज्य में टीबी ठीक होने की दर 89 प्रतिशत तक पहुँची।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने 16 सितंबर 2026 को भोपाल स्थित लोक भवन में अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राइमरी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में शिविर लगाकर बच्चों की सिकल सेल बीमारी की जाँच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। राज्य में अब तक 1.34 करोड़ लोगों की इस जेनेटिक बीमारी के लिए स्क्रीनिंग की जा चुकी है, और जाँचे गए 92 प्रतिशत लोगों को जेनेटिक स्टेटस कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

समीक्षा बैठक का पूरा घटनाक्रम

राज्यपाल पटेल ने 'नेशनल सिकल सेल एलिमिनेशन मिशन 2047' और 'नेशनल ट्यूबरकुलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम' की बुधवार को लोक भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को यह दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शुरुआती पहचान इसलिए ज़रूरी है ताकि सिकल सेल बीमारी से प्रभावित और सिकल सेल ट्रेट वाले बच्चों को समय पर उचित काउंसलिंग और फॉलो-अप मिल सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि काम का फोकस मात्र स्क्रीनिंग की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि ठोस परिणाम सुनिश्चित करने पर होना चाहिए।

जन-प्रतिनिधियों और युवाओं की भागीदारी पर जोर

राज्यपाल पटेल ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सांसदों और विधायकों के साथ मिलकर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के लिए संसाधन और आर्थिक सहयोग जुटाएं। उन्होंने यह भी कहा कि सिकल सेल और टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान में जन-प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।

इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्रों को 'सिकल मित्र' बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उनके अनुसार, 'जागरूकता सबसे अहम हथियार है और युवाओं को इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।'

राज्य की स्वास्थ्य उपलब्धियाँ

बैठक में उपस्थित उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने जानकारी दी कि अब तक स्क्रीनिंग किए गए लोगों में से 92 प्रतिशत को जेनेटिक स्टेटस कार्ड वितरित हो चुके हैं। इसके साथ ही जागरूकता अभियान के तहत 4,825 'सिकल मित्र' तैयार किए गए हैं और उनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

उपमुख्यमंत्री शुक्ला ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश में टीबी के ठीक होने की दर अब 89 प्रतिशत तक पहुँच गई है और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

सिकल सेल मिशन 2047 की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नेशनल सिकल सेल एलिमिनेशन मिशन 2047 के तहत देशभर में जनजातीय और अन्य प्रभावित आबादी के बीच व्यापक स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा है। मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहाँ आदिवासी जनसंख्या में सिकल सेल बीमारी की व्यापकता अपेक्षाकृत अधिक है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर इस बीमारी को 2047 तक समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।

आगे की राह

राज्यपाल के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा है कि वह जल्द ही प्राइमरी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में शिविरों की रूपरेखा तैयार करेगा। 'सिकल मित्र' कार्यक्रम के विस्तार से युवा स्वयंसेवकों का नेटवर्क और मज़बूत होने की उम्मीद है, जो ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में जागरूकता फैलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि निदान के बाद कितने प्रभावित बच्चों को निरंतर चिकित्सीय देखभाल मिल रही है। 'सिकल मित्र' जैसी सामुदायिक पहलें सराहनीय हैं, पर जब तक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में हाइड्रोक्सीयूरिया जैसी दवाओं की उपलब्धता और विशेषज्ञ रेफरल प्रणाली मज़बूत नहीं होती, स्क्रीनिंग की संख्या केवल डेटा बनकर रह सकती है। 2047 के उन्मूलन लक्ष्य को पाने के लिए पहचान के बाद का पूरा देखभाल तंत्र उतना ही महत्वपूर्ण है जितनी स्क्रीनिंग खुद।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में सिकल सेल स्क्रीनिंग की अब तक क्या स्थिति है?
मध्य प्रदेश में अब तक 1.34 करोड़ लोगों की सिकल सेल बीमारी के लिए स्क्रीनिंग की जा चुकी है और जाँचे गए 92 प्रतिशत लोगों को जेनेटिक स्टेटस कार्ड जारी किए गए हैं। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने अब बच्चों की स्क्रीनिंग को और तेज़ करने के निर्देश दिए हैं।
नेशनल सिकल सेल एलिमिनेशन मिशन 2047 क्या है?
यह केंद्र सरकार का एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य 2047 तक भारत में सिकल सेल बीमारी को समाप्त करना है। इसके तहत जनजातीय और अन्य प्रभावित समुदायों में व्यापक स्क्रीनिंग, जेनेटिक काउंसलिंग और उपचार सुनिश्चित किया जाना है।
'सिकल मित्र' कार्यक्रम क्या है और इसमें कितने लोग शामिल हैं?
'सिकल मित्र' वे स्वयंसेवक हैं जो सिकल सेल बीमारी के प्रति समाज में जागरूकता फैलाते हैं। मध्य प्रदेश में अब तक 4,825 'सिकल मित्र' तैयार किए गए हैं और उनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, जिसमें विश्वविद्यालय और कॉलेज के छात्रों को जोड़ने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में टीबी उन्मूलन की क्या स्थिति है?
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के अनुसार, मध्य प्रदेश में टीबी के ठीक होने की दर अब 89 प्रतिशत तक पहुँच गई है और मृत्यु दर में भी कमी दर्ज की गई है। राज्य इस मामले में राष्ट्रीय लक्ष्यों की दिशा में प्रगति कर रहा है।
राज्यपाल पटेल ने जन-प्रतिनिधियों की भागीदारी पर क्यों जोर दिया?
राज्यपाल पटेल का मानना है कि स्वास्थ्य अभियानों में सांसदों और विधायकों की सक्रिय भूमिका से शिविरों के लिए संसाधन और जन-जागरूकता दोनों बढ़ेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ मिलकर उनके निर्वाचन क्षेत्रों में हेल्थ कैंप आयोजित करने की सलाह दी।
राष्ट्र प्रेस
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