सिकल सेल स्क्रीनिंग: मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल का निर्देश — प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में लगें कैंप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 16 सितंबर 2026 को भोपाल के लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन 2047 और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राथमिक विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्क्रीनिंग कैंप लगाकर बच्चों की जाँच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। राज्यपाल पटेल ने इस अवसर पर सिकल सेल और क्षय रोग उन्मूलन अभियान में जनप्रतिनिधियों की सहभागिता और युवाओं को 'सिकल मित्र' बनाने पर विशेष बल दिया।
राज्यपाल के प्रमुख निर्देश
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे सांसदों और विधायकों से सम्पर्क कर उनके क्षेत्रों में सिकल सेल एवं क्षय रोग उन्मूलन अभियान के लिए आवश्यक संसाधन और वित्तीय सहयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इन रोगों के उन्मूलन का सबसे महत्वपूर्ण घटक है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों को 'सिकल मित्र' बनने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि जागरूकता की यह लहर समाज के निचले स्तर तक पहुँच सके। उन्होंने क्षय रोग के संबंध में कहा कि यह 6 माह में पूरी तरह ठीक हो सकता है, परंतु इसके लिए रोगी द्वारा नियमित रूप से दवा का सेवन और उसकी निरंतर निगरानी आवश्यक है।
मध्य प्रदेश में अब तक की प्रगति
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 34 लाख लोगों की सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है। इनमें से 92 प्रतिशत को जेनेटिक कार्ड का वितरण किया जा चुका है। सिकल मित्र पहल के अंतर्गत अब तक 4,825 सिकल मित्र बनाए गए हैं और इनकी संख्या बढ़ाने के बहुआयामी प्रयास जारी हैं।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने यह भी बताया कि प्रदेश में क्षय रोग से मुक्ति दर 89 प्रतिशत तक पहुँच गई है और मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
आयुष विभाग की भूमिका
आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि उनका विभाग 30,000 से अधिक सिकल सेल रोगियों के घर-घर जाकर दवा वितरण का कार्य कर रहा है। सिकल सेल प्रभावित व्यक्तियों से भी नियमित सम्पर्क बनाए रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि सिकल मित्र बनाने की पहल को आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सदस्यों और महाविद्यालय के छात्रों को विशेष रूप से प्रेरित किया जाएगा। इस अभियान की शुरुआत सिकल सेल से सर्वाधिक प्रभावित जिलों — बड़वानी, धार और अनूपपुर — से की जाएगी।
आगे की राह
गौरतलब है कि राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन 2047 के तहत देश भर में, विशेषकर जनजातीय बहुल क्षेत्रों में, व्यापक स्क्रीनिंग और उपचार का लक्ष्य है। मध्य प्रदेश के जनजातीय जिलों में सिकल सेल की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है, जिससे इस राज्य पर विशेष ध्यान देना ज़रूरी है।
राज्यपाल पटेल के निर्देशों के बाद अब यह देखना होगा कि प्राथमिक स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक स्क्रीनिंग की पहुँच कितनी तेज़ी से सुनिश्चित हो पाती है और सांसदों-विधायकों की वित्तीय भागीदारी अभियान को ज़मीनी स्तर पर कितना मज़बूत करती है।