राज्यपाल मंगुभाई पटेल का निर्देश: जनजातीय कार्यशाला की अनुशंसाएँ संवेदनशीलता से लागू हों

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राज्यपाल मंगुभाई पटेल का निर्देश: जनजातीय कार्यशाला की अनुशंसाएँ संवेदनशीलता से लागू हों

सारांश

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने जनजातीय विकास को लेकर कड़ा संदेश दिया — बजट का लक्षित उपयोग हो, लापरवाही पर कार्रवाई हो और पेसा समिति से स्कूलों की निगरानी हो। मध्य प्रदेश में सर्वाधिक जनजातीय आबादी के बावजूद जमीनी हकीकत और नीतिगत इरादे के बीच की खाई पाटना अब केंद्रीय चुनौती है।

Key Takeaways

  • राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 28 अप्रैल को लोकभवन, भोपाल में जनजातीय प्रकोष्ठ व जनजातीय कार्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता की।
  • 16-17 अप्रैल को आयोजित जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाएँ संवेदनशीलता के साथ लागू करने का निर्देश दिया।
  • जनजातीय विकास बजट का उपयोग पूरी तरह लक्षित उद्देश्य पर हो; लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी।
  • पेसा निगरानी समिति के माध्यम से जनजाति क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी का निर्देश।
  • अन्य जनजातीय बाहुल्य राज्यों के नवाचारों को मध्य प्रदेश की ज़रूरतों के अनुसार अपनाने पर बल।

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मंगलवार, 28 अप्रैल को भोपाल के लोकभवन में जनजातीय प्रकोष्ठ और जनजातीय कार्य विभाग की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जनजातीय कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने दोहराया कि जनजातीय कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इससे जुड़े सभी विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है।

बैठक की पृष्ठभूमि

जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने राज्यपाल को 16 और 17 अप्रैल को आयोजित जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं की विस्तृत जानकारी दी। इस कार्यशाला में देश के जनजातीय बाहुल्य राज्यों के अनुभव और नवाचार साझा किए गए थे, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार के क्षेत्र में किए गए प्रयोग शामिल थे।

बजट के लक्षित उपयोग पर ज़ोर

राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण और विकास के लिए प्रावधानित बजट राशि का उपयोग पूरी तरह जनजाति-उन्मुख होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राशि को केवल लक्षित उद्देश्य पर ही खर्च किया जाए। पात्र हितग्राहियों के चयन, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बजट के समुचित उपयोग में और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी चेताया कि जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

क्षेत्र-केंद्रित विकास की आवश्यकता

राज्यपाल ने रेखांकित किया कि मध्य प्रदेश देश का सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला विस्तृत राज्य है। इसलिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निवासरत जनजातियों के विकास एवं कल्याण के कार्य और अधिक क्षेत्र-केंद्रित होने चाहिए। उन्होंने मैदानी भ्रमण के माध्यम से जनजातीय विकास प्रयासों की जमीनी हकीकत जानने पर विशेष बल दिया। साथ ही, अन्य जनजातीय बाहुल्य राज्यों के नवाचारों को मध्य प्रदेश की ज़रूरतों के अनुसार समझकर अपनाने की अपील की।

शिक्षा और पेसा निगरानी

पटेल ने कहा कि शिक्षा ही प्रगति का सुनिश्चित मार्ग है और जनजातीय सशक्तिकरण में इसकी भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने निर्देश दिया कि जनजाति क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। पेसा निगरानी समिति के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षण और शैक्षणिक गुणवत्ता की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किए जाने की भी अपेक्षा उन्होंने व्यक्त की।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

लोकभवन के जवाहर खण्ड सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खाण्डेकर, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त सह संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह, जनजातीय कार्य विभाग व जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य तथा लोकभवन के अधिकारी उपस्थित रहे। आगे आने वाले हफ्तों में इन अनुशंसाओं के क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

Point of View

ये निर्देश महज़ प्रशासनिक अनुष्ठान बनकर रह सकते हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने जनजातीय बैठक में क्या निर्देश दिए?
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 28 अप्रैल को भोपाल में जनजातीय कार्यशाला की अनुशंसाओं को संवेदनशीलता के साथ लागू करने, बजट का लक्षित उपयोग सुनिश्चित करने और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने जनजातीय कल्याण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
जनजातीय उपयोजना कार्यशाला कब और कहाँ आयोजित हुई थी?
जनजातीय उपयोजना कार्यशाला 16 और 17 अप्रैल को आयोजित हुई थी, जिसमें देश के जनजातीय बाहुल्य राज्यों के शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार क्षेत्र के नवाचार साझा किए गए। इस कार्यशाला की अनुशंसाओं की जानकारी प्रमुख सचिव गुलशन बामरा ने राज्यपाल को दी।
पेसा निगरानी समिति की भूमिका क्या है?
पेसा निगरानी समिति का उपयोग जनजाति क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षण और शैक्षणिक गुणवत्ता की निगरानी व मूल्यांकन के लिए किया जाना है। राज्यपाल ने इस समिति को और अधिक सक्रिय बनाने पर बल दिया।
मध्य प्रदेश में जनजातीय विकास क्यों विशेष महत्व रखता है?
मध्य प्रदेश देश का सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला विस्तृत राज्य है, इसलिए यहाँ जनजातीय विकास एवं कल्याण के कार्य विशेष रूप से क्षेत्र-केंद्रित और संवेदनशील होने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने मैदानी भ्रमण के माध्यम से जमीनी हकीकत जानने पर भी ज़ोर दिया।
बैठक में कौन-कौन से प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे?
बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खाण्डेकर, राज्यपाल के उप सचिव सुनील दुबे, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त सह संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह तथा जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य और लोकभवन के अधिकारी उपस्थित रहे।
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