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महाराष्ट्र आदिवासी स्कूलों में 2 साल में 584 छात्रों की मौत, सीजेपी ने छेड़ा 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान

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महाराष्ट्र आदिवासी स्कूलों में 2 साल में 584 छात्रों की मौत, सीजेपी ने छेड़ा 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने खुद माना — दो साल में 584 आदिवासी बच्चों की मौत, यानी हर दिन एक बच्चा। गढ़चिरौली में 79 लड़कियाँ एक कमरे में, खाट नहीं, सर्पदंश से तीन की जान गई। अब सीजेपी सड़क पर है और NHRC ने नोटिस जारी किया है — सवाल है, जवाबदेही कब आएगी?

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने स्वीकार किया कि आदिवासी आवासीय स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 584 छात्रों की मौत हुई — औसतन प्रतिदिन एक।
गढ़चिरौली के एक हॉस्टल में 79 लड़कियाँ एक कमरे में रह रही थीं; अगस्त 2026 में सर्पदंश से तीन आदिवासी लड़कियों की मौत हुई।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गढ़चिरौली मामले में नोटिस जारी किया है।
मंजूर 720 EMRS स्कूलों में से केवल 477 चालू; हज़ारों शिक्षण पद रिक्त।
सीजेपी ने 3 महीने के भीतर स्वतंत्र ऑडिट, राज्य-वार मृत्यु आँकड़े और सार्वजनिक डैशबोर्ड की माँग रखी।
संसदीय स्थायी समिति ने 20 वर्षों में आश्रम-स्कूल योजना को केवल 14 राज्यों तक सीमित पाया।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा आदिवासी आवासीय स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 584 छात्रों की मौत स्वीकार किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नागपुर में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की औपचारिक शुरुआत की, जो इन मौतों के लिए सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग करता है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इन दो वर्षों में औसतन प्रतिदिन एक बच्चे की जान गई।

अभियान की शुरुआत और नेतृत्व

सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक एवं संस्थापक अभिजीत दिपके ने नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस अभियान की घोषणा की। उनके साथ राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और संयुक्त सचिव अक्षय शिंदे भी उपस्थित रहे। दिपके ने आवासीय स्कूलों में लगातार हो रही आदिवासी छात्रों की मौतों पर सरकार से सीधे जवाब माँगे।

गढ़चिरौली कांड और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नोटिस

यह अभियान विशेष रूप से उस घटना के बाद महत्वपूर्ण हो गया है जब अगस्त 2026 में गढ़चिरौली के एक हॉस्टल में तीन आदिवासी लड़कियों की सर्पदंश से मृत्यु हो गई। बताया गया कि खाट न होने के कारण उन्हें जमीन पर सोना पड़ा था और एक ही कमरे में 79 लड़कियाँ रह रही थीं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में नोटिस जारी किया है।

दिपके के तीखे सवाल: 'बकरी या इंसान?'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिपके ने कहा, 'हमारे आदिवासी और वंचित समुदायों की लगातार अनदेखी हमारे देश की अंतरात्मा पर एक गहरा दाग है।' उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई त्रासदी होती है, सरकार ₹2 लाख के चेक या पशु-धन देकर मानवीय क्षति को नज़रअंदाज़ करती है। उन्होंने पूछा कि किसी मंत्री के परिजन को ऐसा मुआवज़ा स्वीकार्य होता? उन्होंने बालाघाट में 30 से अधिक बच्चों की मौत का भी ज़िक्र किया और कहा कि ये बच्चे दूषित पानी पीने और रोकी जा सकने वाली फूड पॉइजनिंग से मर रहे हैं, जबकि संविधान उन्हें समान अधिकार देता है।

संसदीय समिति के निष्कर्ष और योजनाओं की विफलता

सीजेपी ने रेखांकित किया कि ये मौतें एकल घटनाएँ नहीं, बल्कि एक स्थापित पैटर्न हैं। संसद की एक स्थायी समिति के निष्कर्षों के अनुसार, बीस वर्षों में आश्रम-स्कूल योजना केवल 14 राज्यों तक पहुँच पाई है। नई एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (EMRS) योजना के तहत मंजूर 720 स्कूलों में से केवल 477 ही संचालित हो रहे हैं। पिछले वर्ष मंत्रालय ने अपने मंजूर EMRS बजट का मात्र तीन-चौथाई हिस्सा ही खर्च किया, जबकि हज़ारों शिक्षण पद रिक्त हैं।

सीजेपी की माँगें और आगे की राह

पार्टी ने माँग की है कि तीन महीनों के भीतर देश के प्रत्येक आदिवासी आवासीय स्कूल का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, परिणाम सार्वजनिक किए जाएँ और पिछले दस वर्षों में हुई मौतों की राज्य-वार जानकारी जारी की जाए। साथ ही मंजूर बनाम संचालित स्कूलों का सार्वजनिक डैशबोर्ड बनाने की माँग भी रखी गई है। यह अभियान आने वाले हफ्तों में राज्यभर में विस्तार पाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों की संस्थागत उपेक्षा का परिणाम हैं — और सरकार का खुद यह स्वीकार करना इस संकट की गहराई बताता है। असली सवाल यह नहीं है कि ये मौतें क्यों हुईं, बल्कि यह है कि EMRS जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए बजट आवंटित होने के बावजूद उसका तीन-चौथाई भी खर्च क्यों नहीं हुआ। जब तक आदिवासी कल्याण बजट के खर्च को परिणामों से नहीं जोड़ा जाएगा, हर अभियान और हर नोटिस महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र के आदिवासी स्कूलों में 584 मौतें कैसे हुईं?
महाराष्ट्र सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि पिछले दो वर्षों में उसके आश्रम स्कूलों में 584 छात्रों की मौत हुई। इनमें दूषित पानी, फूड पॉइजनिंग, सर्पदंश और अत्यधिक भीड़भाड़ जैसी स्थितियाँ प्रमुख कारण बताई गई हैं।
'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान क्या है?
यह सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) द्वारा 16 सितंबर 2026 को नागपुर से शुरू किया गया अभियान है। इसका उद्देश्य आदिवासी आवासीय स्कूलों में हो रही मौतों के लिए सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करना और तीन महीनों में स्वतंत्र ऑडिट की माँग करना है।
गढ़चिरौली हॉस्टल मामले में NHRC ने नोटिस क्यों जारी किया?
अगस्त 2026 में गढ़चिरौली के एक हॉस्टल में सर्पदंश से तीन आदिवासी लड़कियों की मौत हो गई, क्योंकि उन्हें खाट न होने के कारण जमीन पर सोना पड़ा और एक कमरे में 79 लड़कियाँ रह रही थीं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है।
एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (EMRS) योजना में क्या कमियाँ हैं?
EMRS योजना के तहत 720 स्कूलों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन केवल 477 ही संचालित हो रहे हैं। पिछले वर्ष मंत्रालय ने स्वीकृत बजट का मात्र तीन-चौथाई खर्च किया और हज़ारों शिक्षण पद रिक्त हैं।
सीजेपी ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
सीजेपी ने माँग की है कि तीन महीनों के भीतर हर आदिवासी आवासीय स्कूल का स्वतंत्र ऑडिट हो, पिछले दस वर्षों की राज्य-वार मृत्यु जानकारी सार्वजनिक की जाए और मंजूर बनाम चालू स्कूलों का पब्लिक डैशबोर्ड बनाया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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